अनाज की खरीद पूरे साल हो : वीरेंद्र सिंह मस्त

0
21

भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ ने एग्रीकल्चर स्टैंडिंग कमेटी के सामने मांग रखते हुए कहा कि किसानों का अनाज सरकार पूरे साल खरीदे। एग्रीकल्चर स्टैंडिंग कमेटी की बैठक पांच नवंबर को हुई थी। उन्होंने कहा कि फसलों की खरीद कुछ महीनों तक ही की जाती है। ऐसे में किसान भी परेशान होता है और उस खरीदे अनाज के भंडारण में भी समस्याएं आती हैं। ऐसे में अगर अनाज की खरीद सरकार पूरे साल करे तो किसानों को भी कोई समस्या नहीं होगी। भंडारण में भी कोई समस्या नहीं आएगी।

सासंद मस्त ने कहा कि पूरे साल खरीद से बाजार के बिचौलियों से भी किसान सुरक्षित रहेगा। साथ ही अनाज भंडारण के दौरान जो अनाज सड़ जाता है, उससे निजात मिलेगी। 25 से 30 प्रतिशत अनाज भंडारण या उचित भंडारण न हो पाने के कारण सड़ जाता है। अगर साल भर अनाज की खरीद की जाएगी तो अनाज सड़ेगा नहीं। इससे किसानों को भी सहूलियत होगी। किसान को जितनी जरूरत होगी, उतना ही अनाज बेचेगा। मस्त ने कहा कि उनकी बातों को स्टैंडिंग कमेटी में शामिल सभी अधिकारियों ने गौर से सुना है। उम्मीद है कि उनकी बातों को मान लिया जाएगा।

‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018’ में विश्व के 119 देशों में भारत की रैंकिंग 103 है। यूनीसेफ का दावा है कि भारत में तीन लाख बच्चों की मौत भूख के कारण हो जाती है। देश में चार बच्चों में से एक बच्चा कुपोषित है।
देश में हर आधे घंटे में एक किसान खुदकुशी कर लेता है। 2017 में एक आरटीआई में सामने आया कि एफसीआई के गोदामों में सन 2011 से 2017 के बीच में लगभग 62 हजार टन अनाज बर्बाद हुए थे। इसमें सबसे अधिक गेंहू और चावल सड़े थे। वर्ष 2016 से लेकर 2017 के मार्च तक 8679 टन अन्न बर्बाद हुआ। पूरे भारत में एफसीआई के गोदाम की संख्या 1889 है। इन्हीं गोदामों के भरोसे सरकार देश की इतनी बड़ी आबादी के पेट भरने के लिए अनाज का भंडारण करती है। यहां भी सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर अनाज का संरक्षण करता है, साथ ही जो अनाज सड़ जाते हैं उसको फेंकने के लिए भी सरकार के काफी पैसे खर्च होते हैं।

उन्होंने बताया कि चारी और राघवन की रिसर्च बताती है कि भारत में 25 से 30 प्रतिशत अनाज बर्बाद हो जाता है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में भंडारण, रखरखाव, अनाज प्रोसेसिंग की उचित व्यवस्था न होने के कारण ये अनाज बर्बाद हो जाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here