जंतर मंतर पर बुलंद होती आवाजें

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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसान परेशान होते हैं। कभी सूखा पड़ जाता है, तो कभी बाढ़ आ जाती है। रोजाना देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार के पास मुआवजा देने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।

वहीं किसान मौसम और सरकारी उपेक्षा से परेशान है। किसानों के दुर्दिन का खात्मा हो, इसके लिए भारतीय कृषक दल के नेतृत्व में देश के विभिन्न कोने से आए किसानों ने जंतर- मंतर पर 10 जून को घरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री से ठोस कदम उठाने की मांग हुई है।

धरने को संबोधित करते हुए भारतीय कृषक दल के अध्यक्ष सरोज कुमार दीक्षित ने कहा- “देश के विकास में अन्नदाता किसानों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। सरकार द्वारा ठोस रणनीति नहीं बनाने के कारण आज किसान हताश और निराश हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सूखा, बाढ़, बेमौसम बारिश ने हजारों किसानों को अपनी जीवनलीला समाप्त करने को मजबूर कर दिया है। किसानों की आत्महत्या सरकार के संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। आखिर सरकार इतनी उदासीन क्यों है?

सूखा, बाढ़, बेमौसम बारिश ने हजारों किसानों को अपनी जीवनलीला समाप्त करने को मजबूर कर दिया है। किसानों की आत्महत्या सरकार के संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।– सरोज दीक्षित (भारतीय कृषक दल)

एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में मृतक किसानों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना हुई। देशभर से आए किसानों ने कैंडल मार्च किया। धरने में शामिल खुशबू देवी कहती हैं- “हम किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ हैं। सरकार के नुमाइंदों को हकीकत की रोशनी दिखाने के लिए दिन में कैंडल मार्च निकाला गया है। इन लोगों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंप किसानों के हित में ठोस रणनीति बनाने की मांग की है।”

अरविंद से नाजार हम

“दिल्ली को अपने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से काफी उम्मीदें थीं। खासकर अनुबंध पर काम करने वाले लोगों को। लेकिन कुर्सी पर बैठते ही वे भी अन्य नेताओं की तरह हो गए।” अतिथि अध्यापक संघ से जुड़े लोग यही बता रहे हैं।

2013-14 के अकार्यरत अतिथि अध्यापकों की पुन:नियुक्ति की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर एक समूह धरना दे रहा है। वहां एकत्र लोग अतिथि अध्यापक संघ से जुड़े हैं। दिल्ली में अतिथि अध्यापकों की संख्या एक हजार है। ये लोग दो जून से ही तपती गर्मी में बैठे है। आठ जून को इन लोगों ने सांकेतिक भूख हड़ताल की थी।

“दिल्ली को अपने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से काफी उम्मीदें थीं। खासकर अनुबंध पर काम करने वाले लोगों को। लेकिन कुर्सी पर बैठते ही वे भी अन्य नेताओं की तरह हो गए।”- अतिथि अध्यापक संघ।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष राहुल मलिक का कहना है कि जब तक उन लोगों की नियुक्ति नहीं हो जाती वे यहीं बैठे रहेंगे। सरकार द्वारा कोई पहल न किए जाने पर इनका धरना 13 जून से आमरण अनशन में बदल जाएगा। इनका कहना है या तो नौकरी मिले या फिर मौत। बीते 4 जून को कुछ अतिथि अध्यापक अपनी मांग पत्र केजरीवाल ने उन्हें

आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इन लोगों से संपर्क करेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है।

राहुल आगे कहते हैं कि हम सत्र 2014-15 से ही बेरोजगार हैं। 27 जून से स्कूल खुल जाएंगे। नियुक्ति की आशा में हम आज भी इस उम्मीद में बैठे हैं कि ईमानदार व पारदर्शी सरकार बिना भेद-भाव के हमारे साथ निष्पक्ष न्याय करेगी। अतिथि अध्यापक संघ की दिल्ली सरकार से जानना चाहती है कि शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा जिस कॉमन परीक्षा की घोषणा की गई है, क्या उसमें ये लोग बैठ सकते हैं?

परेशान किरायेदार भी जंतर मंतर पर

जंतर मंतर पर मकान मालिकों के मनमाना किराया वसूली से परेशान लोग सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। बीते पांच जून को गैर सरकारी संस्था ‘न्याय चक्र वेलफेयर एसोसिएशन’ ने दिल्ली में रह रहे किरायेदारों के अधिकार को लेकर धरना- प्रदर्शन किया।

दिल्ली सरकार के समक्ष उन्होंने अपनी कुछ मांगे रखी हैं, जिसके न माने जाने पर वे लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। किरायेदारों के साथ हो रही ज्यादती को उन लोगों ने सरकार के सामने रखा है। जिसमें किरायेदारों से बिजली व पानी का बिल 40 फीसदी अधिक लिया जाना प्रमुख है। ये लोग चाहते हैं कि सरकारदिल्ली में वर्षों से रह रहे किरायेदारों का पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया को आसान बनाए।

दिल्ली में मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का शोषण रोकने के लिए वाजिब किराया दर तय किया जाए। मकान मालिकों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए।- न्याय चक्र वेलफेयर एसोसिएशन।

साथ ही सरकार किरायेदारों के लिए एक स्वतंत्र विभाग बनाए, जिसमें दिल्ली में रहने वाले सभी किरायेदारों की सूची हो। इसके अलावा दिल्ली में मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का शोषण रोकने के लिए वाजिब किराया दर तय किया जाए। मकान मालिकों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए।

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