एक्टू सड़क पर

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मजदूर संगठन मोदी सरकार की नई श्रम नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसी क्रम में वे जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए।

नरेन्द्र मोदी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू) ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। वे नरेन्द्र मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं।

एक्टू के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने सरकार के विरोध में जमकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारी संगठित तथा असंगठित क्षेत्र के स्थाई और ठेका मजदूरों के हित में श्रम कानूनों में बदलाव की मांग कर रहे थे।

एक्टू द्वारा इस विरोध प्रदर्शन को ‘मोदी सरकार का भंडाफोड़ अभियान’ नाम दिया गया था। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एक्टू के राष्ट्रीय सचिव राजीव डिमरी ने कहा कि देश की मेहनतकश जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी अभियान के दौरान ‘अच्छे दिनों का वादा किया था।’ लेकिन सरकार बनने के तुरंत बाद नरेन्द्र मोदी आगाह कर रहे हैं कि आने वाले दिन कठिन होंगे और राष्ट्रहित में जनता को ‘कड़वी गोलियां’ खानी पड़ेंगी।

डिमरी आगे कहते हैं कि अच्छे दिनों के चुनावी वादे की जगह आ आम जनता के लिए ‘बुरे दिन’, यही मोदी सरकार के तीन महीनों के शासन की असलियत है।

धरना-प्रदर्शन में अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा भी मोदी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। वे कहते हैं कि महंगाई पर लगाम लगाना नरेन्द्र मोदी ने अपनी पहली प्राथमिकता बताई थी, लेकिन तीन महीनों में इस पर कोई नियंत्रण नहीं हो पाया है। खुद को मजदूर नंबर एक कहने वाले नरेन्द्र मोदी मजदूरों के अधिकारों पर चौतरफा हमला कर रहे हैं।

वहीं एक्टू के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीकेएस गौतम कहते हैं कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के साथ ही तमाम राज्यों जैसे दिल्ली में और अधिक कॉर्पोरेट-परस्त और मजदूर-विरोधी माहौल तैयार हो रहा है। मोदी सरकार बनने के बाद दिल्ली व अन्य सभी राज्यों में मजदूर वर्ग, विशेषकर असंगठित एवं ठेका मजदूरों का शोषण और अधिक बढ़ा है।

देश की मेहनतकश जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी अभियान के दौरान ‘अच्छे दिनों का वादा किया था।’ लेकिन सरकार बनने के तुरंत बाद नरेन्द्र मोदी आगाह कर रहे हैं कि आने वाले दिन कठिन होंगे और राष्ट्रहित में जनता को ‘कड़वी गोलियां’ खानी पड़ेंगी।- राजीव डिमरी, एक्टू के राष्ट्रीय सचिव

उनका कहना है कि पूरा असंगठित क्षेत्र ही आज ठेकाकरण के चपेट में आ चुका है। नए श्रम कानून फैक्टरी मालिकों को मजदूरों के शोषण करने की खुली छूट प्रदान करेंगे।

जंतर मंतर पर एक ओर जहां सैकड़ों मजदूर अपने हक की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय अहिंसा मंच के लोग देश में आर्थिक आजादी लाने की मुहिम चलाने के लिए बैठे हुए थे।

उनका कहना था कि देश में राम राज तभी आ सकता है जब यहां आर्थिक आजादी मिलेगी। उनका कहना है कि प्रत्येक भारतवासी भारत की संपत्ति का मालिक है। सबको समान मालिकाना हक देने के लिए सरकार को गरीबों से कर वसूली बंद करनी होगी और उनसे ज्यादा कर लेना होगा, जिनके पास अथाह धन है। वे आयकर को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण मानते हैं।

उनका तर्क है कि जितना ज्यादा कर प्रतिशत उतना ज्यादा भ्रष्टाचार। इस मंच के संस्थापक रोशनलाल अग्रवाल देश में राम राज लाने के लिए जंतर मंतर पर हवन भी करवा रहे थे। उनका कहना है कि राम राज का मतलब समानता स्थापित करना है। गौरक्षा और एकल कर व्यवस्था से देश में आर्थिक समानता आएगी।

इसमें दोराय नहीं की आज देश अमीरी-गरीबी और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझ रहा है। सरकार ने पिछड़ी और अनूसुचित जातियों को तो आरक्षण दे दिया, लेकिन जो गरीब सवर्ण जाति के हैं उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस बार जंतर-मंतर पर एक संस्था गरीब सवर्णों के लिए आवाज उठाते दिखी।

‘अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा (सामान्य वर्ग)’ देश के सभी सांसदों, विधायकों और नेताओं से निवेदन कर रही है कि वे सवर्णों के लिए आवाज उठाए। सवर्ण जाति के युवा बड़ी संख्या में बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

संस्था के अध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह परमार कहते हैं कि सवर्ण समाज के साथ केंद्र और राज्य सभी स्तर की योजनाओं और नौकरियों में भेदभाव किया जा रहा है। उनकी कई पीढ़ी बेरोजगारी में दिन काट रही है। वे लाचारी और फटेहाली के शिकार हो गए हैं। उन्हें बराबरी का हक दिलाना जरूरी है। इसलिए हमारा मोर्चा देश भर में आंदोलन चलाने की तैयारी कर रहा है।

मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह कहते हैं कि सवर्ण छात्रों के हित में सरकार को अविलंब कदम उठाने चाहिए। प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक उनके लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की जानी चाहिए। उन्हें सामाजिक सुरक्षा की सभी योजनाओं में 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही गरीबी उन्मूलन (बीपीएल आधारित) योजनाओं में सवर्णों का हिस्सा भी तय किया जाना चाहिए।

देश का विभिन्न तबका सरकार से अपने रोजी-रोटी की सुरक्षा और अपने मेहनत की वाजिब कीमत मांग रहा है। जनता मोदी सरकार से अपील कर है कि वह ऐसी कोई भी नीति न बनाए जिससे देश में अमीरी और गरीबी की खाई और चौड़ी हो जाए। देश की हर जनता को आर्थिक रूप से सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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