पाकिस्तान के पिछवाड़े ही सांप!

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मेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान में पाले-पोसे जा रहे आतंकवादी गुटों के बारे में प्रसिद्ध टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ‘पाकिस्तान अपने पिछवाड़े में सांप पाल रहा है। पाकिस्तानी सेना संपेरा की तरह इन सांपों को नचाती है और इन्हें दूध पिलाती है। लेकिन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिये इनमें से कुछ सांप परेशानी की वजह बन चुके हैं। वे दुश्मन भारत को काटने के बदले पाकिस्तानी सेना और सरकार को ही डसने लगे हैं। फिर भी पाकिस्तानी सेना कोई सबक नहीं लेती और वह सोचती है कि वह इनकी कमान अपने हाथ में रख सकती है। उलटे वह दुनिया को यह बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करती है कि वह खुद ही आतंकवाद का शिकार है और इसे खत्म करने के लिये जी जान से जुटी हुई है।’

पाकिस्तान की घातक रणनीति की वजह से वहां दो तरह के आतंकवादी गुट सक्रिय हो गये हैं। एक-पड़ोसी देशों भारत, अफगान और ईरान विरोधी और दूसरा पाकिस्तान विरोधी। पाकिस्तानी सेना दोनों तरह के आतंकी गुटों के साथ भिन्न तरीके से पेश आती है। खासकर भारत विरोधी आतंकवादी गुटों को एक ही कमांड के तहत नियंत्रित करने के लिये पाकिस्तानी सेना ने यूनाइटेड जेहाद काउंसिल की स्थापना की है।

पाकिस्तान की घातक रणनीति की वजह से वहां दो तरह के आतंकवादी गुट सक्रिय हो गये हैं। एक-पड़ोसी देशों भारत, अफगान और ईरान विरोधी और दूसरा पाकिस्तान विरोधी। पाकिस्तानी सेना दोनों तरह के आतंकी गुटों के साथ भिन्न तरीके से पेश आती है। खासकर भारत विरोधी आतंकवादी गुटों को एक ही कमांड के तहत नियंत्रित करने के लिये पाकिस्तानी सेना ने यूनाइटेड जेहाद काउंसिल की स्थापना की है। इस काउंसिल की कमान पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी आईएसआई के ही किसी कोई नामजद पूर्व सैनिक के पास होती है। इसका मुखिया हरकत-उल-मुजाहिदीन का सरगना सईद सलाहुद्दीन है, जिसे भारत ने दाऊद इब्राहीम के साथ लौटाने की मांग की है।

पाकिस्तान अपने पिछवाड़े में सांप पाल रहा है। पाकिस्तानी सेना संपेरा की तरह इन सांपों को नचाती है और इन्हें दूध पिलाती है। लेकिन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिये इनमें से कुछ सांप परेशानी की वजह बन चुके हैं। वे दुश्मन भारत को काटने के बदले पाकिस्तानी सेना और सरकार को ही डसने लगे हैं।

हिलेरी क्लिंटन (पूर्व विदेश मंत्री, अमेरिका)

दूसरी ओर, पाकिस्तान विरोधी जेहादी गुटों को पाकिस्तानी सुरक्षा बल कौम का दुश्मन मानते हैं। उनके खिलाफ पाकिस्तानी सेना कार्रवाई करती है। पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां इस तरह आतंकवादी गुटों को गुड और बैड टेररिस्ट की संज्ञा देती है। गुड टेररिस्टों को पाकिस्तान पड़ोसी देशों के कथित आजादी आंदोलन का सिपाही कहता है। पाकिस्तान में पूर्ण शरिया कानून लागू करने के लिये अभियान वाले और पाकिस्तानी सेना एवं सरकारी ठिकानों पर हमला करने वाले को बैड टेररिस्ट कहते हैं। पाकिस्तान की धरती पर पल-बढ़ रहे आतंकवादी गुटों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी नजर है लेकिन वे पाकिस्तान की भूराजनीतिक स्थिति और पाकिस्तान की बदमाशी करने की ताकत यानी न्युसेंस वैल्यू से डरते हैं। इसलिये पाकिस्तान सरकार पर कोई प्रभावी दबाव नहीं डाल पाते। विचार संस्था ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की आई एक रिपोर्ट में टिप्पणी की गई थी कि पाकिस्तान आतंकवादी गुटों का सबसे बड़ा प्रायोजक देश है।

एक नजर में पाकिस्तान के आतंकी संगठन
 एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी मसूद अहजर को तकरीबन साठ हजार डॉलर प्रत्येक महीने फंडिंग करती है। 1984 में हूजी (हरकत-उल-जिहादी-अल-इस्लामी) का गठन पाकिस्तान में हुआ। जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने के लिये आईएसआई ने इसका समर्थन किया। वर्तमान समय में भारत और अमेरिका ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है। 1985 में हूजी से अलग होकर हरकत-उल-मुजाहिदीन नामक संगठन बनाया गया। इसके नेता फजिऊर रेहमान खलील पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय है। इस संगठन पर पाकिस्तान, कनाडा, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रतिबंध लगाया है। 1989 में एक इस्लामी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने आतंकी विंग बनाया। इसका नाम हिजबुल मुजाहिदीन रखा। हिजबुल पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के इशारे में काम करता है। इसका सरगना सैयद सलाहुद्दीन है। 2002 में भारत ने इसे आतंकी संगठन घोषित किया है। सितंबर 2016 में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को भारतीय सेना ने मार गिराया था। सैयद सलाहुद्दीन ने भारत विरोधी आतंकवादी संगठनों का एक ग्रुप 1994 में बनाया था। जिसका नाम युनाइटेड जिहाद काउंसिल रखा गया। इस आतंकी काउंसिल का सरगना वह खुद ही है। इसमें करीब 13 आतंकी संगठन सदस्य हैं। लस्कर-ए-तैयबा, हरकत-उल- मुजाहिदीन और अल-बदर जैसे आतंकी संगठन इसके सदस्यों में शामिल हैं। अल-बदर मुख्यत: हिजबुल मुजाहिदीन के बैनर तले काम करता था। मगर 1998 में यह अलग हो गया।               इसकानेता बख्त जमिन है। लस्कर-ए-तैयबा भी पाकिस्तान के एक इस्लामिक संगठन का आतंकी विंग है। इस इस्लामिक संगठन का नाम मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद है। इसने लस्कर का गठन 1990 में किया। हाफिज सईद इसका सरगना है। इसे भी आईएसआई का समर्थन मिला हुआ है। नब्बे के दशक में इसने जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने का पूरा प्रयास किया। भारत, पाकिस्तान अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस पर प्रतिबंध लगाया है। 2001 में प्रतिबंध के बाद 2002 में इसने जमात-उद-दावा नामक चैरिटेबल संगठन बनाया। 1993 में हरकत-उल- जिहादी- अल- इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन को मिलाकर हरकत-उल-अंसार नामक आतंकी संगठन बनाया गया। 1993-94 के बीच इसके कई सरगना और आतंकी गिरμतार हुए, जिसमें मसूद अजहर भी शामिल है। अमेरिका के प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस संगठन को खत्म कर हरकत-उल- जिहादी-अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन, दोनों फिर से अलग-अलग काम करने लगे।

पाकिस्तानी सेना और सरकार के लिये सिरदर्द बन चुके करीब एक दर्जन घरेलू आतंकवादी संगठन वहां सक्रिय हैं। उनमें प्रमुख हैं, तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), लश्कर-ए-उमर (एलईओ), सिपाही साहेबा पाकिस्तान (एसएसपी), तहरीके जफेरिया पाकिस्तान (टीजेपी), तहरीके नफज-ए-शरियत मोहम्मद (टीएनएसएम), लश्कर-ए-जांघवी (एलईजे), सिपाहे मोहम्मद पाकिस्तान (एसएमपी), जमात उल फुकरा, नदीम कमांडो, पोपुलर फ्रंट फार आर्म्ड रेजिस्टेंस, मुस्लिम यूनाइटेड आर्मी, हरकत-उल-मुजाहिदीन आलम (एचयूएमए)।
वहां तीस से अधिक ऐसे आतंकवादी संगठन भी हैं, जो पड़ोसी देशों में विद्रोही गतिविधियों को भड़काने के लिये ही खड़े किये गए हैं। इन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की ओर से वित्तीय और सैनिक मदद मिलती है। इन संगठनों की सूची इस प्रकार है।
1़ हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (एचयूएम)
2. हरकत उल अंसार (एचयूए)। जिसे हरकत-
उल-मुजाहिदीन नाम से जाना जाता है।
3़ लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी)
4़ जैश-ए-मोहम्मद मुजाहिदीन तंजीम
(जेईएमएमटी)
5़ अल-बदर
6. जमात-अल-मुजाहिदीन
7़ लश्कर-ए-जब्बार (एलएजे)
8़ हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी
9. मुत्तहदा जेहाद काउंसिल
10़ अल-बर्क
11़ तहरीक-उल-मुजाहिदीन
12़ अल-जेहाद
13़ जम्मू कश्मीर नेशनल लिबरेशन आर्मी
14़ पीपल्स लीग
15. मुस्लिम जांबाज फोर्स
16़ कश्मीर जेहाद फोर्स
17. अल-जेहाद फोर्स
18. अल-उमर मुजाहिदीन
19. महाज-ए-आजादी
20़ इस्लामी जमात-ए-तुलबा
21़ जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स लिबरेशन फ्रंट
22. इख्वान-उल-मुजाहिदीन
23़ इस्लामी स्टूडेंट्स लीग
24़ तहरीक-ए-हुरियत-ए-कश्मीर
25़ तहरीक-ए-निफाज-ए-फिकर-ए-
जफरिया
26. अल-मुस्तफा लिबरेशन फाइटर्स
27़ तहरीक-ए-जेहाद-अल-इस्लामी
28. मुस्लिम मुजाहिदीन
29. अल-मुजाहिद फोर्स
30़ तहरीक-ए-जेहाद
31. इस्लामी इनकलाब महाज
इन संगठनों को सक्रिय रखने के पीछे सेना और धार्मिक तंजीमों के निहित स्वार्थ होते हैं। सेना इनके यहां भर्ती किये गये बेरोजगार, अर्द्धशिक्षित लड़कों का इस्तेमाल करती है। इन धार्मिक तंजीमों को जेहाद के नाम पर विदेशों, खासकर खाड़ी देशों से बडी राशि चंदा में मिलती है। इनसे उनका धार्मिक धंधा चलता है। इन धार्मिक तंजीमों का ग्रामीण इलाकों और अनपढ़ लोगों पर दबदबा बन जाता है। ये लोग राजनीतिक दलों के लिये वोट बैंक भी बन जाते हैं। इमरान खान ने पिछले चुनावों में उग्रवादियों के पक्ष में जो रवैया अपनाया, वह इस बात का प्रमाण है कि राजनीतिक लोग इनका दोहन करते हैं। आज का जमाना रिवोल्युशन इन मिलिट्री अफेयर्स यानी आरएमए का है, जिसमें सेनाएं अत्याधुनिक सैनिक तकनीक का इस्तेमाल कर दुश्मन को परास्त करने की रणनीति अपनाती हैं, पर पाकिस्तानी सेना कुछ और करती है। वह ऐसे सैनिक पैदा करते हैं जो केवल आरएमए वाले साज-सामान ही अपने जेहादी सैनिकों को देने में भरोसा नहीं करतीं बल्कि उसके दिल-दिमाग को ही बदलने में विश्वास करती है।

अमेरिकी सेना में भर्ती किये जा रहे सैनिक हर तरह के हथियार, वर्दी, संचार तंत्र आदि से लैस होते हैं। भारतीय सेना के जवानों को भी ऐसी ही क्षमता प्रदान करने की कवायद चल रही है। आधुनिक मानी जाने वाली अमेरिका या भारतीय सेना के लिये तैयार किये जा रहे इनफैन्ट्री सोल्जर ऐज ए सिस्टम(इनसास) से पाकिस्तानी जेहादी सैनिक बेहतर मुकाबला कर सकते हैं क्योंकि वे फिदायीन सैनिक बनाए जाते हैं। आरएमए तकनीक के जरिये सेनाएं दुश्मन के संचार तंत्र पर हावी होने की कोशिश करती हैं। दुश्मन के इलेक्ट्रानिक तंत्र को तबाह करने की कोशिश करती हैं।

दुश्मन के रडार जाल को अवरुद्ध करने की कोशिश करती हैं। दुश्मन की संपूर्ण गतिविधियों पर नजर रखकर उसे उसके ही घर में मारने की रणनीति बनाती हैं लेकिन पाक सेना ऐसे जवान तैयार कर रही है, जो अपनी सेना की ताकत किसी वैज्ञानिक तकनीक के जरिये नहीं बल्कि उनके दिमाग को ही बदल कर आत्मघाती बनाने की कला पर भरोसा करती है। एक ऐसी सेना जिसके सैनिक और जवान नियमित सैनिक नहीं होते बल्कि उसके सैनिक अल्लाह के सिपाही होते हैं। ये सैनिक की हर कला को जानते हैं लेकिन वे सैनिक की वर्दी नहीं पहनते। न ही वे किसी सेना के नियमित वेतनभोगी होते हैं।

ऐसे ही जवान जेहादी कहे जाते हैं। इसे पालने-पोसने के लिये पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई जेहादी तंजीमों को वित्तीय मदद देती है। इसके जेहादियों को सैनिक ट्रेनिंग देने में भी मदद करती है। यही वजह है कि पाकिस्तान में आज तीन दर्जन से अधिक आतंकवादी संगठन पल रहे हैं, जो पाकिस्तानी सेना के लिये बिना वर्दी वाले सैनिक पैदा करते हैं। ये ऐसे घुसपैठिये होते हैं जो पैदल सैनिक की तरह पड़ोसी के इलाके में घुसते हैं और आबादी वाले इलाकों में घुसकर गुरिल्ला छापामार की तरह घात लगाकर हमले करते हैं। इस तरह की लड़ाकू भूमिका किसी पेशेवर सेना के जवान नहीं निभा सकते।

पाकिस्तान को पता है कि भारत को युद्ध में नहीं हराया जा सकता। इसलिये वह इन जेहादियों को प्रशिक्षित कर रहा है। ताकि इन जेहादी लड़कों का इस्तेमाल वह भारत के खिलाफ कम तीव्रता वाले युद्द के लिये कर सके। कम तीव्रता वाला युद्द शहरी इलाके में लड़ा जाता है। सुरक्षा बल जब इससे निबटने के लिये जवाबी कार्रवाई करते हैं, तब आस-पास के लोगों और इलाकों में जानमाल का भारी नुकसान होता है। इससे स्थानीय आबादी में भारत विरोध का माहौल बनता है। इससे पाकिस्तानी सेना की रणनीति को लागू करना आसान होता है।

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