नए स्वरूप में प्रगति मैदान

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राजधानी दिल्ली का प्रगति मैदान नई काया में ढल रहा है। सैकड़ों कर्मचारी दिन-रात इस काम में जुटे हैं। इसके निकटवर्ती इलाके से आते-जाते कोई भी इस दृश्य को देख सकता है।

वर्ष 2019 तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अवसर मिले तो जी-20 शिखर वार्ता का शानदार आयोजन किया जा सके। इसके लिए 3000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट है।

राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) इस काम की जिम्मेदारी ली है। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) के एक अधिकारी ने बताया कि जी-20 शिखर सम्मेलन में आने वाले विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर पूरी संरचना को तैयार किया जा रहा है।

आईटीपीओ के उप प्रबधंक(जनसंपर्क) संजय व्शिष्ठ कहते हैं कि जिस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का रुतबा बढ़ा है, उसी के अनुरूप प्रगति मैदान को तैयार किया जा रहा है। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में यह इमारत ‘मील का पत्थर’ साबित होगी।

हालांकि, प्रगति मैदान अपने अतीत में कई राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं का साक्षी रहा है। इस मैदान में बना ‘द हॉल ऑफ नेशंस’ और ‘द हॉल ऑफ इंडस्ट्रीज’ का अपना महत्व रहा है, लेकिन अब ये चित्रों में ही दिखेंगे। सही बात यह है कि प्रगति मैदान अपनी पुरानी स्मृतियों को छोड़ नई पहचान पाने को लालायित है।

जी 20 में कैसा होगा नया प्रगति मैदान

नये बन रहे प्रगति मैदान को दो प्रमुख भागों में बांट कर देखा जा सकता है। पहला भाग सम्मेलन केन्द्र और दूसरा प्रदर्शनी केन्द्र। सम्मेलन केंद्र में 7 हजार लोगों को एक साथ समाहित कर लेने की क्षमता होगी।

इसमें से एक विशेष सभागार होगा जिसकी क्षमता तीन हजार लोगों की होगी। आईटीपीओ के उप प्रबंधक (जनसंपर्क) संजय वशिष्ठ बताते हैं कि जिस तरह से भारत का रुतबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है, उसी के अनुरूप ये इमारत बनाई जा रही है। यह इमारत अपने आप में मील का पत्थर साबित होगी।

वहीं सम्मेलन केंद्र में अलग-अलग क्षमताओं के 27 बैठक कक्ष होंगे। वहीं 1,51,687 वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहे प्रदर्शनी केन्द्र के प्रारूप पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें उन तत्वों को भी जोड़ने की कोशिश की गई है जो पुराने प्रदर्शनी हॉल में मौजूद थे, इसके साथ कुछ नये तकनीकी प्रारूपों को इसका हिस्सा बनाया गया है।

यहां अलग-अलग क्षमताओं के तीन ओपेन थियेटर बनाए जा रहे हैं जो पुराने प्रगति मैदान की व्यवस्था में छोटे रूप में मौजूद था।

“ जिस तरह से भारत का रुतबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है, उसी के अनुरूप प्रगति मैदान को तैयार किया जा रहा है। यह बदलाव अपने आप में मील का पत्थर साबित होगा। ”

चूंकि ये पूरा निर्माण जी 20 जैसे बड़े आयोजन को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति को यातायात संबंधी कोई भी परेशीनी न हो, इस बात का ध्यान बेहद ही बेहतर ढंग से दिया जा रहा है। इसके लिए मेट्रो के साथ एक साझा समझौता करते हुए प्रगति मैदान से एक सीधा पुल जोड़ा जाएगा।

इससे लोग मेट्रो से सीधे प्रगति मैदान में प्रवेश कर सकेंगे। वहीं अपने वाहन से यहां आने वालों के लिए मथुरा रोड और भैंरो रोड से एक इंटर कनेक्टिंग टनल का निर्माण किया गया है जो बिना किसी रुकावट के आने वालों को सीधे प्रगति मैदान में प्रवेश करवाएगा।

इन तैयारियों के बीच गैर सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के अतिरिक्त केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सशस्त्र कमांडो ने प्रगति मैदान की चौबीसों घंटे सुरक्षा का जिम्मा संभाल रखा है। आईटीपीओ ने काफी समय पहले सरकार से प्रगति मैदान की बेहतर व सशस्त्र सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी।

इस मांग के आधार पर ही सीआईएसएफ की एक विशेष टुकड़ी को यहां तैनात कर दिया गया है। चूंकि यह स्थान अंतरराष्ट्रीय मानक पर विकसित किया जा रहा है। इस वजह से इसकी सुरक्षा भी आवश्यक हो जाती है।

कैसे आयोजित होता है जी 20 सम्मेलन

20 देशों का समूह जी 20 एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है जो दुनिया के 20 प्रमुख औद्योगिक और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है। जी20 विश्व के सकल घरेलू उत्पाद के 85 प्रतिशत और कुल आबादी के दो तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

1999 में जी20 का गठन हुआ था वर्तमान समय में जी20 के 20 सदस्यों में जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, चीन, भारत, रूस, सऊदी अरब, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, इंडोनेशिया, इटली और मेक्सिको के नाम शामिल हैं।

जी-20 सम्मेलन का आयोजन सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से होता है। इसके लिए सभी सदस्य देशों को पांच समूहों में बांटा गया है। हर समूह में चार सदस्य हैं।

एक समूह का कोई सदस्य देश जब सम्मेलन की मेज़बानी का चुका होता है तो उसके बाद दूसरे समूह का अन्य सदस्य देश उसके लिए दावेदारी कर सकता है। जैसे कि पांचवें समूह के सदस्य देश चीन ने 2016 में सम्मेलन की मेज़बानी की थी।

उसके बाद चौथे समूह के सदस्य देश जर्मनी ने 2017 में। इस संगठन के दूसरे समूह में भारत को रूस, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के साथ रखा गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की सचिव रीटा टीटीया ने 2019 की शुरुआत में काम का पहला चरण पूरा होने की उम्मीद जताई है ताकि यहां जी-20 समिट का आयोजन किया जा सके।

इमारत के अतीत से जुड़ी कहानीयां

1972 में स्वतंत्रता दिवस की सिल्वर जुबली मनाने के मौके पर प्रगति मैदान में बने ‘हॉल ऑफ नेशंस’ को मूर्त रूप दिया गया था।

इस लैंडमार्क बिल्डिंग का डिजाइन आर्किटेक्ट रवि रेवाल ने तैयार किया था। बताया जाता है कि रवि रेवाल को इस काम के लिए कई आवेदकों के बीच में एक प्रतियोगिता के बाद चुना गया था।

इस इमारत का उद्घाटन 3 नवंबर, 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। इस ऐतिहासिक हॉल में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर स्टारर फिल्म त्रिशूल की भी शूटिंग हुई थी।

“ उस सयम स्टील खरीदना और इतने बड़े स्तर पर उसका प्रयोग हमारे लिए अत्यधिक खर्चीला था, लेकिन हमको उसका विकल्प तलाशना था जो कंकरीट के माध्यम से हो लेकिन उसका आकार स्टील के जालीदरा निर्माण जैसा हो। महेंद्र राज, हॉल ऑफ नेशन में इंजीनियर रहे  ”

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस इमारत को ढहा दिया गया। अदालत का फैसला धरोहर इमारतों की रक्षा के लिए गठित हेरिटेज कंजर्वेशन कमिटी (एचसीसी) पर आधारित था।

कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ 60 साल या उससे अधिक पुरानी इमारतों पर धरोहर के दर्जे के लिए विचार किया जाता। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हॉल ऑफ नेशंस सिर्फ 45 साल पुराना है।

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