लोकसभा चुनाव में भिड़ने को तैयार

त्तीसगढ़ में इन दिनों कांग्रेस और भाजपा के बीच शह और मात का खेल राजनीतिक सुर्खियों में है। पूर्ववर्ती रमन सरकार के खिलाफ संभावित घोटालों और गड़बड़झाला की परत उधेड़ने में कांग्रेस जोर-शोर से लगी हुई है। सत्तासीन होते ही एक के बाद एक एसआईटी का गठन कर लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा को चौतरफा घेरने की फौरी रणनीति पर काम कर रही है। धारदार राजनीतिक हमले में भाजपा भी कहीं पीछे नहीं है। पार्टी किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में आयी कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं। वहीं भाजपा को अपनी अंदरूनी कलह से जल्द निपटना होगा। अभी राज्य में लोकसभा की कुल 11 में से 10 सीटें भाजपा के पास हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार के मंत्री तथा विधायक चुनाव नहीं लड़ेंगे। संभावना व्यक्त की गई है कि विधानसभा चुनाव में जो टिकट से वंचित हो गये थे, उन्हें अपवाद स्वरूप मौका मिल सकता है।

चुनाव हारने के बाद सत्ता-संगठन के नेताओं में आपसी रार से पार्टी फजीहत की स्थिति में हैं। हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फूटने के उपरांत अनुषांगिक संगठनों की दखल से मामलें का पटाक्षेप हुआ। तीसरा मोर्चा जोगी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं। यद्यपि लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बदलते राजनीतिक परिवेश में सर्वे एवं आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस में फरवरी अंत तक दावेदारों के पैनल भेज दिये जायेंगे। कांग्रेस, विधानसभा चुनाव की तरह ही लोकसभा चुनाव के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया है। कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग के साथ ही संकल्प शिविरों की अपनी तैयारी पूरी कर ली है। लोकसभा के कुल 11 सीटों के लिए प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से संभावित दावेदारों के नाम लगभग तय कर लिए हैं। इस परिप्रेक्ष्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार के मंत्री तथा विधायक चुनाव नहीं लड़ेंगे। संभावना व्यक्त की गई है कि विधानसभा चुनाव में जो टिकट से वंचित हो गये थे, उन्हें अपवाद स्वरूप मौका मिल सकता है। पीसीसी के मुमाबिक बूथ सेक्टर, ब्लॉक एवं जिला से आये हुए उम्मीदवारों की सूची ही अधिकृत होगी। पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए बेदाग छवि और आम जनता की पसंद के अनुरूप ही प्रत्याशी का चयन होगा। कांग्रेस में अभी संगठन के नेताओं, पूर्व विधायकों, महापौर के अलावा कई दावेदार टिकट के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव में भाजपा करारी हार के बाद लोकसभा चुनाव के लिए फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इसके लिए आरएसएस के आंतरिक सर्वे और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पसंद से ही प्रत्याशी चुने जायेंगे। 3 सांसदों को छोड़कर 8 लोकसभा सीटों पर नये चेहरे उतारे जा सकते हैं। अभी तक भाजपाध्यक्ष के लिए कवायद पूरी नहीं हो सकी है। आदिवासी वर्ग से केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव साय, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविचार नेताम, जशपुर राजघराने के देवेन्द्र प्रताप सिंह और पिछड़ा वर्ग से विधायक अजय चंद्राकर के नाम चर्चा में हैं। जातीय समीकरण और राजनीतिक संतुलन को देखते हुए अंतिम समय में किसी अन्य नाम पर भी मुहर लग सकती है।
राजनीतिक सूत्रों की माने तब विष्णुदेव साय को संगठन में जगह मिलने के बाद उनकी जगह नये नाम पर विचार किया जा सकता है। राजनांदगांव से अभिषेक सिंह की जगह डॉ. रमन सिंह को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बस्तर से कद्दावर प्रत्याशी नहीं होने से दिनेश कश्यप दोहराये जा सकते हैं। कांकेर से विधानसभा चुनाव हार जाने के बाद विक्रम उसेंडी दौड़ से बाहर हो गये हैं। बिलासपुर से लखन लाल साहू, जांजगीर-चांपा से कमलादेवी पाटले, सरगुजा से कमल भानसिंह और सरोज पांडे के राज्यसभा में चले जाने के बाद इन संसदीय क्षेत्रों से नये चेहरे की तलाश है। कोरबा, महासमुंद में भी नये प्रत्याशी होंगे। रायपुर से वरिष्ठ सांसद रमेश बैस को टिकट मिल सकती है। मार्च के प्रथम सप्ताह में आदर्श आचार संहिता लगते ही सूची जारी होने की संभावना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here