बोट यात्रा से मिलेगा वोट?

पूरा घाट लोगों की भीड़ से पट गया था। सभी लोग उनको देखना चाहते थे। उनके साथ फोटो खींचवाना चाहते थे। उनसे मिलना चाहते थे। प्रियंका दीदी सभी का हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहीं थीं। हमने अखबार में पढ़ा कि वह मल्लाहों और गरीबों से मिलने आईं हैं। लेकिन हमको अभी मोदी और योगी ज्यादा जम रहे हैं। हमारे ज्यादातर लोग उनको पसंद करते हैं। ये कहना है, राजकुमार का। वह प्रयागराज के संगम तट पर नाव चलाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए 18 मार्च से गंगा यात्रा को माध्यम बनाकर प्रचार अभियान शुरू किया। इस यात्रा का नाम ‘गंगा यात्रा’ रखा गया। प्रियंका प्रयागराज से गंगा में बोट यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक पहुंची। इस पूरी यात्रा के दौरान प्रियंका केवट, मछुआरों, बिंद, निषाद, कुर्मी, कुनबी जैसी जातियों के अतिरिक्त उन तमाम मतदाताओं को साधने की कोशिश करती दिखीं जो मुख्य विमर्श में कहीं पीछे छूट गये हैं।

यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी युवाओं को तहरीज देती दिखीं। हालांकि उनका युवा चेहरा युवाओं को अपने साथ जोड़ने में कितना सफल होता है यह तो वक्त तय करेगा। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र और छात्राओं से भी मिलीं।

प्रियंका ने इसके लिए प्रयागराज को चुना। इसके कई राजनैतिक मायने हैं। प्रयागराज इंदिरा गांधी की जन्मस्थली है। यहीं 19 नवंबर 1917 को पंडित जवाहरलाल नेहरू की राजनीतिक विरासत को संभालने वाली कन्या का जन्म हुआ। जिसका नाम रखा गया इंदिरा प्रियदर्शिनी। यह क्षेत्र लगातार कांग्रेस के राजनैतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस दौरान कांग्रेस पार्टी ने अपना स्वर्णिम काल भी देखा। इलाहाबाद सीट पर 1984 तक कांग्रेस का कब्जा था। उसके बाद से लगतार पार्टी इस सीट पर सिकुड़ती चली गई। प्रियंका ने गंगा के तटों के माध्यम से जिन इलाकों का दौरा किया वह इलाके कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करते थे। बीते करीब चार दशक में अन्य पार्टियों ने कांग्रेस के वोटबैंक पर कब्जा जमा लिया।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्याम कृष्ण पांडेय बीते कई सालों से पार्टी में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। श्याम कृष्ण कहते हैं ‘कांग्रेस के अच्छे दिन और बीजेपी के बुरे दिन तो तीन राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) में कांग्रेस को मिली जीत के बाद ही शुरू हो गये थे। राहुल गांधी की रैलियों में भंयकर भीड़ देखने को मिल रही है। इस उत्साह भरे माहौल में प्रियंका की इंट्री ने सोने पर सुहागा कर दिया।’

प्रियंका गांधी ने अपने चुनावी अभियान की शुरूआत संगम तट पर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर से की। मंदिर के महंत आनंद गिरी ने प्रियंका गांधी को पूजा अर्चना करवाई। प्रियंका गांधी की राजनीति में प्रवेश को वह कैसे देखते हैं। इसके जवाब में आनंद गिरी कहते हैं कि ‘यह हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। यहां सभी को पूजा अर्चना करने की अनुमति है। यह जगह राजनीति से अलग है। यहां सभी नेता आते रहते हैं। किसी भी नेता का कोई विशेष महत्व यहां नहीं होता। लेकिन प्रियंका अगर राजनीति में आई हैं तो उन्हें युवाओं को खुद से जोड़ना होगा। कांग्रेस इसमें अभी तक असफल रही है। लोग यहां योगी आदित्यनाथ की कुंभ व्यवस्था से बेहद खुश हुए हैं।’

कांग्रेस इंदिरा गांधी के महत्व को अच्छी तरह से जानती है। उसको पता है अगर वह प्रियंका को इंदिरा की परछाई बताने में सफल हुई तो ये लड़ाई उनके लिए आसान हो सकती है। यही वजह है कि पार्टी, प्रियंका और इंदिरा को जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी सत्ता का केंद्र रहे स्वराज भवन में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज है। खुद प्रियंका जब प्रयागराज आईं तो वह यहीं रुकीं। ऐसा दशकों बाद हुआ था। किसी बड़े कांग्रेसी नेता ने यहां से अपने चुनावी कार्यक्रम की शुरूआत की। प्रियंका इस मौके को अपनी दादी इंदिरा गांधी से जोड़ना नहीं भूली। उन्होंने एक कमरे की फोटो भी साझा की और लिखा ‘स्वराज भवन के आंगन में बैठे हुए वह कमरा दिख रहा है जहां मेरी दादी का जन्म हुआ था। रात को सुलाते हुए दादी मुझे जोन आॅफ आर्क की कहानी सुनाया करती थीं। आज भी उनके शब्द दिल में गूंजते हैं। वह कहती थीं- निडर बनो और सब अच्छा होगा।

’कांग्रेस में प्रियंका के आने से एक जोश तो आया है जिसे हर स्तर पर साफ देखा जा सकता है। प्रदेश इकाई का हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता इस बात को स्वीकार्य भी कर रहा है। लेकिन जनता के बीच फिलहाल वह बड़ी छाप छोड़ती नहीं दिखती। सुरेश तिवारी हंडिया के चंदापुर गांव के रहने वाले हैं। सुरेश कहते हैं ‘कई मुद्दों पर सवर्णों का बीजेपी से मतभेद जरूर है लेकिन हम छोटे लाभ के लिए बड़ा नुकसान नहीं करेंगे। देश को बचाने के लिए मोदी बहुत जरूरी है। प्रियंका को अभी राजनीति में बहुत कुछ सीखना है।’

प्रियंका अपनी बोट यात्रा के दौरान सिरसा घाट पर उतरी। यह क्षेत्र मिली-जुली आबादी वाला है। यहां अगड़ी और पिछड़ी हर जातियां निवास करती हैं। यहां प्रियंका को देखने के लिए लगभग आधा गांव और उससे सटे इलाकों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे थे। रामवीर निषाद यहीं पैदा हुए। वह यहां छोटा-मोटा व्यवसाय करके अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। रामवीर कहते हैं

‘जब कोई बड़ा नेता गांव देहत में आता है तो उसको देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा होना स्वभाविक होता है।’ पूछे जाने पर कि प्रियंका गांधी के आने के बाद क्या आप कांग्रेस को वोट देगें तो उन्होंने साफ कहा इस गांव में शौचालय बनाए गये जो भाजपा सरकार की देन है। हां, पूरा विकास हमारे गांव का नहीं हुआ है लेकिन कुछ बड़े काम जरूर हुए हैं।’

इस पूरी बोट यात्रा के दौरान एक चेहरा था जो पल-पल प्रियंका के साथ थे। वह थे, नौ बार विधायक रह चुके एव राज्यसभा के पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी। तिवारी का कहना है कि ‘प्रियंका गांधी की बोट यात्रा बेहद सफल रही उन्हें पूरी यात्रा के दौरान अपार प्यार मिला। तटों और घाटों पर लोगों की भीड़ इस तरफ इशारा कर रही थी।’
यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी युवाओं को तहरीज देती दिखीं। हालांकि उनका युवा चेहरा युवाओं को अपने साथ जोड़ने में कितना सफल होता है ये तो वक्त तय करेगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र और छात्राओं से भी मिलीं। प्रयागराज में छात्रों के कई वर्ग इस बात से सहमत दिखे कि कांग्रेस ने शिक्षा के क्षेत्र, खासतौर पर उच्च शिक्षा में बड़े काम करवाए हैं। लेकिन असहमति जताने वाले भी कई मिले। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ा रहे सहायक प्राध्यापक अभिषेक अग्निहोत्री कहते हैं ‘प्रियंका की बोट यात्रा में राजनीति जरूर हो सकती है, लेकिन युवाओं में प्रियंका गांधी को लेकर गजब का कौतुहल है। अगर वह अपने कहे हुए वादों पर कुछ गंभीरता से काम करती दिखीं तो स्वस्थ राजनीति का एक चेहरा सामने जरूर आयेगा। क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में भाजपा से कई जगहों पर बड़ी चूक हुई है।’
हालांकि तीन दिन की बोट यात्रा करना कोई छोटा फैसला नहीं था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मोदी और शाह की जोड़ी को टक्टर देने के लिए प्रियंका को और गंभीरता से मेहनत करनी होगी।

अगर उनको भाजपा से सीधी टक्कर लेनी है तो राहुल की तरह छुट्टियों पर जाने से बचना होगा। अपने तथ्यों, तर्कों और कार्यक्रमों के माध्यम से चर्चा में बना रहना होगा। अगर वह ऐसा करने में सफल हुईं तो वो बड़ी लकीर खींच सकेंगी जिसके लिए उन्हें सक्रिय राजनीति में लाया गया है। अंदरखाने यह बहस अब जोरो पर है कि प्रियंका वो करीश्माई चेहरा हो सकती हैं जो नरेंद्र मोदी को सीधी टक्कर दे। यही वजह है कि कांग्रेस के कुछ नेता अब प्रियंका को और बड़े स्तर पर पार्टी में देखना चाहते हैं। इसमें कुछ ऐसे नेता भी मिले जो यह मान कर चल रहे हैं कि अब जल्द ही राहुल की जगह प्रियंका लेने वाली हैं।

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