बेमेल शादी, दूल्हा बेगाना

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ऐश्वर्या से लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप के शुभ विवाह से ठीक एक दिन पहले 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास (पटना) पर एक पोस्टर लगाया गया था। इसमें तेज प्रताप को शिव व ऐश्वर्या को पार्वती के रूप में दर्शाया गया था। लेकिन किसी को यह आभास नहीं था कि इन कथित शिव और पार्वती के मिलन के महज छ: महीने बाद ही ‘शिव’ की तीसरी आंख खुल जाएगी और वह पटना स्थित परिवार न्यायालय में ‘पार्वती’ से खुद को बेगाना (तलाक के लिए) करने के लिए आवेदन दाखिल कर देंगे। कहने की जरूरत नहीं है कि भगवान शिव के बारे में ऐसी कथा प्रचलित है कि जब उनकी तीसरी आंख खुलती थी तो संसार में प्रलय की आशंका बढ़ जाती थी।

लेकिन इस मामले में शिव (तेज प्रताप) क्रोधित हैं तो पार्वती मजबूत और मौन। यहां तो शिव अपने को कमजोर कहने पर तुला हुआ है और कह भी रहा है कि उसका पूरा परिवार पार्वती के साथ है। यही कारण है कि पटना से चल कर गये एक होटल से अदृश्य हुए ‘शिव’ के बारे में जानकारी मिली कि वह कृष्ण की बाल कर्मस्थली वृंदावन में तप कर रहा है।
इस बेमेल जोड़ी की शादी पिछली 12 मई को हुई थी और जानना जरूरी है कि इस दिन शनिवार था। लोग अब कहने लगे हैं कि शनि की कुदृष्टि इस बेमेल जोड़ी पर इस कदर पड़ी कि उनके रिश्ते पर ही ग्रहण लग गया। तेज प्रताप अब खुलेआम कह रहे हैं कि पूरा परिवार उनकी पत्नी के साथ है। हालांकि राजद के नजदीकी लोगों ने अब यह कहना शुरू कर दिया है कि तेज प्रताप जदयू व भाजपा की गोद में खेल रहे हैं। वे तेज प्रताप के मौजूदा सहयोगियों को असामाजिक तत्व कहने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।

ऐश्वर्या और तेज प्रताप की बेमेल जोड़ी की शादी 12 मई को हुई थी। जानना जरूरी है कि इस दिन शनिवार था। लोग अब कहने लगे हैं कि शनि की कुदृष्टि इस बेमेल जोड़ी पर इस कदर पड़ी कि उनके रिश्ते पर ही ग्रहण लग गया। तेज प्रताप अब खुलेआम कह रहे हैं कि पूरा परिवार उनकी पत्नी के साथ है।

कहना गैरजरूरी है कि नवंबर के पहले सप्ताह में तेज प्रताप पटना से वहां गए जहां कभी महात्मा बुद्ध को शांति प्राप्त हुई थी। बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत ने इस संवाददाता को बताया कि वहां वह रॉयल रिजेंसी होटल में रुके थे। लेकिन इस हताशाभरी हालत में उनका बोधगया जाना शायद तेज प्रताप की ओर से की जा रही शांति की तलाश में शामिल नहीं है। गया में काम करने वाले एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार ने इस संवाददाता को बताया कि तेज प्रताप की पैठ गया में है क्योंकि यहां के विधायकों की पहुंच तेजस्वी यादव के पास इसलिए नहीं है क्योंकि तेजस्वी अनुशासन पसंद इंसान हैं।
हालांकि लोगों की जिज्ञासा तेज प्रताप के यात्रा-वृत्तांत में कम और शादी की विफलता की वजह जानने में ज्यादा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कालेज से स्नातक करने वाली ऐश्वर्या ने एमिटी यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की है। हालांकि गूगल पर उपलब्ध विकीपीडिया तेज प्रताप यादव के बारे में उनकी योग्यता की जानकारी को छोड़कर अन्य सभी जानकारी उपलब्ध करवा रहा है। यानी कभी गौ-माता को कृष्ण की तरह बांसुरी की तान सुनाने वाले तेज प्रताप के कार्यकलाप रूपी बेसुरी तान ने उनको अपने पारिवारिक सदस्यों व अपनी पत्नी से ही जुदा कर रहा है। एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार के पटना दμतर में काम करने वाले और लालू प्रसाद के पारिवारिक सदस्यों के बारे में अच्छी समझ रखने वाले एक पत्रकार ने इस संवाददाता को बताया कि ‘चारित्रिक जिद’ ने तेज प्रताप यादव को विधायक बनाया, फिर मंत्री भी बनाया और अब उन्हें पत्नी से बेगाना बना रहा है।

चारा घोटाले के बाद लालू प्रसाद यादव के पारिवारिक सदस्यों की जिंदगी में आया यह राजनीतिक तूफान कहीं उनकी राजनीतिक नाव को ही न डूबो दे, यह चर्चा भी पटना के राजनीतिक गलियारे में गूंज रही है। लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में हुई सजा झेल रहे हैं तो बाहर उनका परिवार तेज प्रताप यावद की ‘करतूत’ से उपजे सदमे को झेल रहा है।

वहीं, जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक इस घटना पर सिर्फ इतना कहते हैं कि यह निहायत ही व्यक्तिगत और पारिवारिक मामला है, इसलिए वह कुछ नहीं बोलना चाहते। अभी तक किसी ने भी इस घटना पर कुछ नहीं बोला है। लेकिन अगर इस घटना के राजनीतिक असर की बात करें तो कहना होगा कि पटना के समीप स्थित दानापुर के गंगा दियरा से चली सामंती हवा ने ही इस इलाके के यादवों के मनसूबे को बुलंद बनाया है। इसके चलते ये यादव अपने को बिहार के अन्य यादवों से अलग मानते हैं। शायद यही कारण है कि दानापुर के यादव, लालू प्रसाद को कभी भी आत्मसात नहीं कर पाए। मौजूदा भाजपा सांसद रामकृपाल यादव की लालू व उनके परिवार के खिलाफ बगावत व भाजपा से मिलाप भी दानापुर के यादवों की कथित सामंती मानसिकता की अभिव्यक्ति है। इससे पूर्व रामलखन सिंह यादव सरीखे नेताओं ने कभी भी लालू प्रसाद को भाव नहीं दिया था।

हालांकि लालू प्रसाद की चढ़ती राजनीति व आर्थिक समृद्धि ने ही दरोगा प्रसाद राय के परिवार को लालू के पारिवारिक सदस्यों के साथ एक सूत्र में बंधने को मजबूर किया। लेकिन इन दो यादवों के बीच सामाजिक मलाल अभी भी बाकी है। कहना गैरवाजिब नहीं है कि अगर यह शादी अंत में टूट जाती है तो दानापुर के यादवों के क्रोध का कहर लालू प्रसाद के पारिवारिक सदस्यों की राजनीति पर जरूर बरपेगा और यादवों का यह कुनबा चंद्रिका यादव (ऐश्वर्य के पिता) को अपने पक्ष में करते हुए एक साथ लालू परिवार की राजनीति पर हमला बोलेगा।
उधर, ऐश्वर्य के मायके वाले पूरी तरह मौन हैं। तेज प्रताप को छोड़कर लालू प्रसाद के अन्य पारिवारिक सदस्यों के बारे में कहा जा रहा है कि सब ऐश्वर्र्या के साथ हैं। लेकिन रह-रहकर मीडिया में आ रही खबरों में यह जरूर कहा जा रहा है कि इस घटना की पृष्ठभूमि में राजनीतिक वजह मौजूद है। दरोगा प्रसाद राय की जन्मस्थली सारण को इस घटना की वजह से अलग नहीं किया जा सकता। अखबारों की सुर्खियां कह रही हैं कि ऐश्वर्या या पिता चंद्रिका राय को सारण से चुनाव लड़ने की चाहत है। 2019 में लोकसभा का चुनाव होना है।
अब सारण लोकसभा क्षेत्र की राजनीतिक कुंडली पर गौर किया जाए। 2009 में लालू प्रसाद यादव यहां से सांसद बने। हालांकि चारा घोटाले में हुई सजा के संताप के कारण वह 2014 के दौरान चुनाव नहीं लड़ पाए और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को यहां से मैदान में उतारा। लेकिन विजयश्री उनके हाथ नहीं लग पाई। भाजपा के राजीव प्रताप रूडी अब यहां से लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि अगर सारण से चंद्रिका राय राजद से टिकट चाहते हैं तो कोई भी उनकी राह का रोड़ा नहीं बन सकता क्योंकि दरोगा राय के बेटे (चंद्रिका राय, दरोगा प्रसाद राय के बेटे हैं।) की सामाजिक व राजनीतिक हैसियत इतनी तो जरूर है कि उन्हें उनकी जन्मस्थली से चुनाव लड़ने से बेदखल नहीं कर सकता।
हालांकि तेज प्रताप को लेकर अब यह भी कहा जा रहा है कि 29 तारीख को वह पटना अवश्य जाएंगे सुनवाई से ठीक पहले। उन्हें डर है कि पटना अगर वह पहले गए तो उनके पारिवारिक सदस्य उन पर समझौते के लिए दबाव डालेंगे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि उन्होंने गया जाकर अपने राजनीतिक पक्ष को मजबूत कर लिया है। आने वाले चुनाव में उनकी राह अपने परिजनों की राह से जुदा होगी। हालांकि बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत कहते हैं कि तेज प्रताप के व्यक्तित्व का गलत आकलन किया जा रहा है। वह बेहद ही धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। कुमार यहीं नहीं रुकते, वह यह भी कहते हैं कि योगी होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीति कर रहे हैं।
लेकिन चारा घोटाले के बाद लालू प्रसाद के पारिवारिक सदस्यों की जिंदगी में आया यह राजनीतिक तूफान कहीं उनकी राजनीतिक नाव को ही न डूबो दे, यह चर्चा भी पटना के राजनीतिक गलियारे में गूंज रही है। लालू प्रसाद चारा घोटाले में हुई सजा झेल रहे हैं तो बाहर उनका परिवार तेज प्रताप की ‘करतूत’ से उपजे सदमे को झेल रहा है।

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