पार्टी या परिवार की संपत्ति?

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चौटाला परिवार में कलह चरम पर है। स्व.चौधरी देवीलाल की राजनीति और पार्टी पर काबिज होने की जंग चल रही है। पार्टी और परिवार दो धड़े में बंट गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इनेलो अब एक रह पाएगा?

हरियाणा की सत्ता पर कब्जा जमाने का ख्वाब देख रही इंडियन नेशनल लोकदल के सामने अब पार्टी बचाने की चुनौती है। चौटाला परिवार में वर्चस्व की जंग छिड़ी है। पार्टी और परिवार दो खेमे में बंट गया है। आए दिन विभिन्न मुद्दों पर मनोहर लाल खट्टर सरकार को घेरने वाली इनेलो नेता अब आपस में ही आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। चाचा अभय चौटाला और भतीजे दुष्यंत चौटाला के बीच की यह लड़ाई भविष्य में क्या मोड़ लेगा, अभी ठीक से कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में इनेलो का क्या भविष्य होगा, इसको लेकर चर्चा आम है।
ऐसा नहीं है कि यह सब अचानक शुरू हो गया। चौटाला परिवार लंबे समय से अंतर्कलह का शिकार है। अंतर सिर्फ इतना है कि कल तक जो पर्दे के पीछे चल रहा था अब वह सबके सामने है। पार्टी के अंदर सियासी वर्चस्व की जंग काफी लंबे समय से चल रही है। 16 जनवरी, 2013 को पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके बड़े पुत्र अजय चौटाला के शिक्षक भर्ती घोटाले में दस वर्ष के लिए जेल जाने के बाद परिवार में पार्टी नेतृत्व को लेकर विवाद शुरू हुआ। उस समय अभय चौटाला और अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला के बीच तीव्र मतभेद देखने को मिले। लेकिन पार्टी की जिम्मेदारी अभय को मिली। इसके बाद से परिवार के अंदर मतभेद बढ़ता गया।
इसी बीच इनेलो की राजनीति में चौधरी देवीलाल के चौथी पीढ़ी का पदार्पण होता है। अजय चौटाला के बड़े पुत्र दुष्यंत चौटाला के हाथ पार्टी की युवा शाखा और छोटे पुत्र दिग्विजय चौटाला के हाथ छात्र इकाई की कमान आती है। दुष्यंत जींद से लोकसभा सदस्य चुने जाते हैं और राज्य में उनकी राजनीतिक पहुंच बढ़ती है। पार्टी और प्रदेश के अंदर दुष्यंत के राजनीतिक कद बढ़ने के साथ ही परिवार में विवाद बढ़ता गया। सूबे में दुष्यंत युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं और उनके अच्छे-खासे समर्थक हैं। ऐसे में पार्टी को संचालित करने को लेकर दुष्यंत और अभय चौटाला के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है। इनेलो का विवाद अब नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं होता है तो पार्टी टूटने से कोई रोक नहीं सकता है।


ताजा विवाद गोहाना रैली से शुरू होती है। 7 अक्टूबर को चौधरी देवीलाल के 105वीं जयंती के अवसर पर गोहाना में इनेलो-बसपा की संयुक्त रैली थी। पैरोल पर जेल से बाहर आए ओमप्रकाश चौटाला भी रैली में शामिल थे। रैली में जब पार्टी के नेता भाषण दे रहे थे तो दुष्यंत और दिग्विजय के समर्थक नारे लगा रहे थे और उन्हें सूबे का अगला मुख्यमंत्री कह रहे थे। दुष्यंत समर्थकों के इस व्यवहार पर ओमप्रकाश चौटाला काफी नाराज हुए। चौटाला ने कहा कि मैंने देख लिया कि कौन क्या कर रहा है। माहौल खराब करने वाले या तो सुधर जाएं, वरना चुनाव से पहले निकालकर बाहर फेंक दूंगा। दरअसल, दुष्यंत इस रैली में अपने समर्थकों के जरिए ओमप्रकाश चौटाला के सामने अपनी धाक दिखा रहे थे। और चाचा अभय चौटाला को यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि वे पार्टी के स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं। दुष्यंत समर्थकों के इस व्यवहार को ओमप्रकाश चौटाला ने काफी गंभीरता से लिया। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस भेजकर दुष्यंत और दिग्विजय से जवाब मांगा। दुष्यंत ने नोटिस का जवाब तो दिया। लेकिन इसके तुरंत बाद हरियाणा में रैलियां और जनसभाएं शुरू कर दीं। उधर अभय चौटाला ने भी सिरसा में इनेलो कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पार्टी पर अपनी पकड़ को दिखाने की कोशिश की। बैठक के बाद अभय चौटाला ने कहा कि, ‘‘पार्टी के नब्बे फीसद पदाधिकारी और विधायक बैठक में उपस्थित रहे। उनका किसी से कोई मतभेद नहीं है दुष्यंत और दिग्विजय उनके अपने बच्चों जैसे हैं।’’
पार्टी में चल रहे घमासान के बीच सांसद दुष्यंत चौटाला ने टीवी चर्चा के लिए आठ प्रवक्ताओं की सूची जारी कर दी। कहा गया कि ये प्रवक्ता जननायक सेवा दल के प्रतिनिधि के तौर पर अजय चौटाला के परिवार का पक्ष रखेंगे। जननायक सेवा दल को चौधरी देवीलाल की नीतियों के प्रचार प्रसार के लिए साल 2002 में अजय चौटाला ने बनाया था। सेवा दल के राष्ट्रीय प्रमुख दिनेश डागर का कहना है कि मीडिया खासतौर पर इलेक्ट्रानिक मीडिया में अपना पक्ष रखने के लिए यह जरूरी था। इसमें से ज्यादातर वह चेहरे हैं जो सालों से टीवी डिबेट में इनेलो का पक्ष रखते आए हैं।

विरासत की जंग के प्रमुख किरदार
अजय चौटाला कहते हैं कि, ‘‘इनेलो न तो मेरे बाप की बपौती है और न किसी के बाप की, इनेलो कार्यकर्ताओं की है, इसे किसी की बपौती नहीं बनने देंगे।’’ लेकिन यह सही नहीं है। अन्य क्षेत्रीय एवं पारिवारिक पार्टियों की तरह ही इनेलो भी चौधरी देवीलाल परिवार की राजनीतिक संपत्ति है। इनेलो में पार्टी कार्यकर्ताओं के शीर्ष पर पहुंचने की कौन कहे दूसरे-तीसरे नंबर पर भी नहीं पहुंच सकते हैं। दूसरे और तीसरे नंबर पर भी परिवार के लोग ही काबिज हैं।
देश के उप-प्रधानमंत्री रहे चौधरी देवीलाल इंडियन नेशनल लोकदल के संस्थापक हैं। अपने जीवनकाल में चौधरी देवीलाल पार्टी के सर्वेसर्वा रहे तो दूसरे नंबर पर उनके बड़े पुत्र ओमप्रकाश चौटाला रहे। हां! विरासत की इस लड़ाई में देवीलाल के दूसरे पुत्र रंजीत सिंह चौटाला को कांग्रेस का दामन थामना पड़ा। तब ओमप्रकाश चौटाला को बड़े आराम से विरासत मिल गयी थी। शिक्षक भर्ती घोटाला में दस वर्ष की सजा होने के बावजूद वे पार्टी के राष्ट्रीय  अध्यक्ष तो उनके साथ ही सजा काट रहे उनके बड़े पुत्र अजय चौटाला पार्टी महासचिव हैं। उनकी पत्नी नैना चौटाला विधायक हैं। अजय चौटाला के दो बेटे हैं- दुष्यंत और दिग्विजय। दुष्यंत चौटाला हिसार से लोकसभा सांसद होने के साथ ही पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष हंै, जबकि दिग्विजय चौटाला पार्टी की छात्र इकाई इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स आॅर्गनाइजेशन के प्रमुख हैं।
अभय सिंह चौटाला हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। अभय इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। एक तरह से पूरा परिवार राजनीति में है। 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में इनेलो को 24 फीसदी वोट मिले थे और 90 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी के लोकसभा में दो तो राज्यसभा में एक सदस्य हैं।
अब पार्टी में वर्चस्व को लेकर घमासान है। इसकी प्रमुख वजह दुष्यंत चौटाला और उनके चाचा अभय सिंह चौटाला का रिश्ता है। दोनों भाइयों के परिवार के बीच विरासत की जंग छिड़ी है। अजय चौटाला के जेल में होने के कारण उनके पुत्र दुष्यंत चौटाला बगावत पर उतर आए हैं।  ऐसे में सवाल उठता है कि इस पीढ़ी में रंजीत सिंह की राह पर कौन होगा?

गोहाना रैली में हुए उपद्रव में दुष्यंत और दिग्विजय को दोषी मानते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई पर पार्टी की ओर से एक बयान जारी किया गया- ‘‘पार्टी की युवा एवं छात्र शाखा में अनुशासन और इनेलो के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी दिखाई दी। युवा शाखा सात अक्टूबर को गोहाना रैली में अपनी भूमिका निभाने में नाकाम रही तो भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (आईएनएसओ) को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया गया। इसलिए दोनों संगठनों को भंग किया जाता है। ’’ ओमप्रकाश चौटाला ने अपने दोनों पौत्रों पर गोहाना रैली को बाधित करने के लिए पार्टी विरोधी दलों के साथ साजिश रचने का भी आरोप लगाया।
दुष्यंत और दिग्विजय ने अपने निष्कासन को अवैध बताते हुए राज्य भर में न्याययुद्ध यात्रा निकालने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस तरह का निर्णय पार्टी महासचिव अजय चौटाला ही ले सकते हैं। पार्टी से निकाले जाने के बाद दुष्यंत के समर्थक गुस्से में हैं। कई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। अपने पुत्र दुष्यंत को हरियाणा का भावी मुख्यमंत्री घोषित करने वाली नैना चौटाला सूबे में जगह-जगह जनसभा कर रही हैं। वे कहती हैं कि, ‘‘अभय चौटाला और 15 लोगों ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। कुछ लोग नहीं चाहते कि अजय चौटाला और उनका परिवार इनेलो में रहे।’’
पार्टी छोड़ रहे नेताओं पर अभय सिंह चौटाला कहते हैं कि, ‘‘जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं उनका संगठन में कोई भविष्य नहीं है। ये ऐसे लोग हैं जिनका जुड़ाव कांग्रेस से है। कुछ कांग्रेसी पार्टी को कमजोर करना चाहते हैं।’’ इस बयान पर अजय चौटाला ने पलटवार करते हुए कहा कि, ‘‘मुझे उन लोगों पर तरस आता है जो पार्टी को खून-पसीने से सींचने वाले कार्यकर्ताओं को कांग्रेसी बता रहे हैं।’’
शिक्षक भर्ती घोटाले में पिता के साथ जेल की सजा काट रहे अजय चौटाला इस पूरे घटनाक्रम से काफी नाराज हैं। 5 नवंबर को पैरोल पर रिहा हुए अजय चौटाला ने दिल्ली में अपने बेटे के सरकारी आवास 18 जनपथ पर कार्यकर्ताओं से कहा कि हक मांगने से नहीं छीनने से मिलता है। महाभारत का हवाला देते हुए कहा, ‘याचना नहीं अब रण होगा।’ इससे साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में चौटाला परिवार का कलह इनेलो का राजनीतिक महाभारत बन सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी की कमान अभय चौटाला के हाथों में ही रहेगी या दुष्यंत और दिग्विजय की जोड़ी उनसे छीन लेगी।

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