पश्चिमी बंगाल में बम-संस्कृति प्रभावी: शिव प्रकाश

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‘सेव बंगाल’ की वेबसाइट का लोकार्पण करते भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश

दिल्ली का कांस्टीट्यूशन क्लब 24 नवंबर को पश्चिमी बंगाल की ममता सरकार के कारनामों के चित्रण का गवाह बना। राज्य की कानून व्यवस्था, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की रणनीति, उनकी विभाजनकारी राजनीतिक संस्कृति पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। एक डाक्यूमेंटरी के जरिये भी उन्हें दर्शाया गया। अवसर था ‘सेव बंगाल’ (बंगाल बचाओ) कार्यक्रम का। आयोजन में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठनमंत्री शिव प्रकाश, राज्य पार्टी के अध्यक्ष दिलीप घोष और राज्यसभा सदस्य स्वपन दास गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित थे। चर्चा की शुरुआत ‘सेव बंगाल’ अभियान के संयोजक और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक अनिर्वाण गांगुली ने की।

उन्होंने बंगाल के ताजा हालात के बारे में बताया और कहा कि ‘सेव बंगाल’ अभियान राज्य की दुर्दशा को उजागर करने तक ही सीमित नहीं रहेगा। उसके समाधान का रास्ता भी तलाशा जाएगा। राज्यसभा सदस्य स्वपन दास गुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस के राज में हो रहे भेदभाव पर प्रकाश डाला और कहा कि भाजपा ही राज्य को तृणमूल शासन के अत्याचार से बचा सकती है। दिलीप घोष ने ममता के कुशासन को तथ्यों के साथ उजागर किया। मुख्य वक्ता शिव प्रकाश ने कहा कि राज्य में 34 साल तक वामपंथियों का शासन रहा। करीब आठ साल ममता राज को हो गया है। जनता ने ममता को इसलिए बांगडोर सौंपी थी ताकि राज्य में बदलाव हो लेकिन उन्होंने पूरी तरह निराश किया। चेहरा बदला, झंडा बदला, पार्टी बदली लेकिन शासन-पद्धति नहीं बदली। राजनीतिक संस्कृति नहीं बदली।

उन्होंने आरोप लगाया कि महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की यादों को मिटाने की सायास कोशिशें हो रही हैं। शिक्षा का बुरा हाल है। देश के कई राज्य, जहां भाजपा का शासन है, वहां अर्थव्यवस्था से लेकर शिक्षा का स्तर बढ़ा है, ये राज्य विकसित राज्यों की श्रेणी में गिने जाते हैं। लेकिन वामपंथियों और ममता के शासन में राज्य बदहाली की ओर तेजी से जा रहा है। पूरे देश में बड़े शैक्षिक सुधार हो रहे हैं लेकिन राज्य का जाधवपुर विश्वविद्यालय अब भी नक्सली पैदा कर रहा है। राज्य में बम-संस्कृति प्रभावी हो रही है। करीब 50 साल से राज्य में लोगों ने वामपंथ देखा, पढ़ा और जिया। उसका परिणाम आज सभी बंगाली भुगत रहे हैं।

वर्ग संघर्ष जैसा हिंसक विचार अब अप्रासंगिक हो चुका है। सेव बंगाल अभियान के सह संयोजक अनिमेश विस्वास बताते हैं कि आयोजन में दिल्ली समेत एनसीआर के जिलों में रह रहे बंगाली समुदाय से जुड़े जागरूक नागरिकों को बुलाया गया। उद्देश्य उनमें जागरूकता पैदा करना है ताकि बंगाल को दुर्दशा से बचाया जा सके। यह अभियान देश के उन सभी स्थानों पर किया जाएगा जहां बंगाली मूल के लोग रहते हैं। आयोजन में प्रमुख रूप से पूर्व एयर मार्शल एके मुखोपाध्याय, पूर्व मेजर जनरल पीके मलिक, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह, पूर्व पार्षद आनंद मुखर्जी, सुशांत कर, रंजन मुखर्जी आदि उपस्थित थे।

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