तुष्टिकरण अब गले की फांस

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ममता बनर्जी ने कुछ दिनों पहले 28 हजार दुर्गा पूजा समितियों को 10-10 हजार रुपये यानी कुल 28 करोड़ रुपये आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था। इससे पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई। राज्य में मुस्लिम संगठनों ने भी ममता बनर्जी के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर कर विरोध जताया था। उनकी मांग थी कि यदि दुर्गा पूजा समितियों को आर्थिक मदद दी जा रही है तो फिर राज्य के इमामों और मुअज्जिनों के वेतन-भत्तों में भी बढ़ोतरी की जाए।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें दुर्गा पूजा आयोजकों को 28 करोड़ रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी। इससे आयोजकों को धन मिलने का रास्ता साफ हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 और राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ही ममता ने हिन्दू वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए यह घोषणा की। लेकिन अब मुस्लिम समुदायों की ओर से ही ममता बनर्जी का विरोध उनके गले की हड्डी बन गया।
दरअसल, ममता बनर्जी ने कुछ दिनों पहले 28 हजार दुर्गा पूजा समितियों को 10-10 हजार रुपये यानी कुल 28 करोड़ रुपए आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था। इसके बाद से पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई थी। बीते दिनों राज्य में मुस्लिम संगठनों ने भी ममता बनर्जी के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर कर विरोध जताया था। उनकी मांग थी कि यदि दुर्गा पूजा समितियों को आर्थिक मदद दी जा रही है तो फिर राज्य के इमामों और मुअज्जिनों के वेतन-भत्तों में भी बढ़ोतरी की जाए।
आॅल बंगाल माइनॉरिटीज यूथ फेडरेशन के महासचिव कमरुज्जमां ने कहा, भारत एक सेक्युलर देश है, किसी भी सरकार को किसी धार्मिक कार्यक्रम को प्रायोजित नहीं करना चाहिए। ममता बनर्जी तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं। साथ ही यह भी कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ सीएम ममता बनर्जी भेदभाव कर रही हैं। कोलकाता के फुरफुरा शरीफ के इमाम पीरजादा ताहा सिद्दीकी ने तो पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को कठघरे में ही खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा जो लोग भाजपा पर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हैं, वे खुद भी कई बार इसमें शामिल होते हैं। हाल ही में दमदम में हुए धमाकों में तृणमूल का भाजपा पर आरोप ऐसा ही इशारा करता है। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ गुस्से का जमकर इजहार किया। मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी में टीपू सुल्तान मस्जिद के सामने हुई इस रैली में इमाम पीरजादा ने सीएम ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। कोलकाता पुलिस द्वारा रैली की इजाजत न दिए जाने के फैसले को भी चुनौती देते हुए इमाम ने कहा, हम यहां पर तलवारें और लाठियां लेकर नहीं आए हैं। हम यहां अपनी मांगों के समर्थन में इकट्ठा हुए हैं। इसमें आखिर गलत क्या है?
इमाम पीरजादा ने सभी के साथ समान व्यवहार करने की नसीहत देते हुए कहा कि बंगाल के लोगों ने लेμट फ्रंट की सरकार को पहले उखाड़ फेंका था और अगर हमसे ऐसा सलूक जारी रखा गया तो इस सरकार को भी उसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ममता बनर्जी द्वारा राज्य की 28 हजार दुर्गापूजा कमेटियों को बतौर चंदा 10-10 हजार रुपये देने संबंधी घोषणा के खिलाफ बीते महीने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सिर्फ कोलकाता में करीब 3000 पूजा पंडाल हैं और सभी गांवों में कुल मिलाकर 25,000 के करीब। यह वह संख्या है जिसे मान्यता प्राप्त है।
बहरहाल, बीजेपी और वाम दलों ने ही ममता बनर्जी के इस फैसले को
तुष्टीकरण के लिए उठाया गया कदम बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल
सिन्हा ने कहा, यह और अच्छा होता अगर वह इस रकम को बंगाल में गरीबों की मदद के लिए खर्च करतीं। सीपीएम ने इसे प्रतियोगी सांप्रदायिकता बताया। विधानसभा में सीपीएम विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा, पहले उन्होंने (ममता सरकार) आम करदाता को बढ़ी कीमतों से दबाया, फिर लोकल क्लबों को छूट देनी शुरू की और अब पूजा समितियों को करोड़ों देने का उपक्रम किया। यह प्रतियोगी सांप्रदायिकता का उदाहरण है जिसका राज्य पर विपरीत प्रभाव होगा।

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