चीन तक पहुंचे आजमगढ़ के दीये

बटला हाउस कांड, वाराणसी विस्फोट और सिमी की प्रयोगशाला के रूप में स्थापित हो चुका आजमगढ़ तेजी से अपनी छवि बदल रहा है। अब यहां विश्व प्रसिद्ध तुलसी की आॅर्गेनिक की खेती हो रही है, साथ ही ब्लैक पाटरी (काली मिट्टी के बर्तन) के लिए ‘ग्लोबल इमेज’ बना चुके निजामबाद कस्बे से विश्व के कई देशों में मिट्टी के दीये निर्यात हो रहे हंै। इस बार सर्वाधिक निर्यात का आग्रह चीन से आया। चीन के अलावा मारीशस, त्रिनिडाड, थाईलैंड, वियतनाम, कनाडा, अमेरिका और इग्लैंड से भी मिट्टी के दीयों की भरी मांग बनी रही। दरअसल निजामबाद के मिट्टी के बर्तनों के बनाने की प्रकिया मुगलकालीन है। बहुत गुणवत्तापूर्ण दीये बनाये जाते हैं।

राज्य सरकार के एक जिला, एक उत्पाद की नीति ने निजामबाद के ब्लैक पाटरी को नए पंख दे दिए हैं। वर्ष 1994 में जिला उद्योग केंद्र द्वारा ब्लैक पाटरी और मिट्टी के बर्तनों के कारोबारियों को सुविधा के लिए लघु उद्योग केंद्र बनाया गया। इसके तहत 150 प्लॉट 99 साल के पट्टे पर दिए गए लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद न तो कारीगरों की सुध ली गयी, न ही ब्लैक पाटरी की मार्केटिंग हुई। योगी साकार ने सत्ता में आने के बाद पूरे प्रदेश के जिलों में सर्वे करा कर एक जिला एक उत्पाद की नीति लागू की। आजमगढ़ जिले को ब्लैक पाटरी उद्योग के रूप में विकसित करने का अवसर मिला। अब सरकार ब्लैक पाटरी उद्योग को अनुदान मुहैया करा रही है।

इसकी मार्केटिंग हो रही है। कारीगरों को सम्मानित किया जा रहा है। परिणाम यह हुआ है कि आठ देशों से करोड़ों रुपये की ब्लैक पाटरी और दीपक आयात करने का आर्डर कई महीने पहले ही जिला उद्योग केंद्र को मिले। आजमगढ़ के उद्योग उपायुक्त रंजन चतुर्वेदी इसे और विस्तार देते हैं। कहते हैं, ‘सरकार की तमाम योजनाओं ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है 135 चयनित कारीगरों को 16 करोड़ रुपये दीर्घ अवधि का कर्ज दिया गया। सरकार ने मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली, परिणाम स्वरूप आठ देशों को करोड़ों की ब्लैक पाटरी और मिट्टी के दीयों को निर्यात किया जा चुका है।’ निजामबाद के प्रमुख व्यापारी मोहमद सना उल्लाह बताते हंै कि ब्लैक पाटरी सिर्फ डायनिंग हाल की ही शोभा ही नहीं बढ़ाती है वरन धार्मिक कार्यों में मिट्टी के बर्तनों का खूब इस्तेमाल होता है। इस साल तो योगी सरकार की सार्थक पहल ने आजमगढ़ के दीयों और ब्लैक पाटरी को आठ देशों में पंहुचा दिया।

विश्व के बाजारों में अपनी धमक जमा चुका चीन इस वर्ष बड़े आयातक के रूप में उभरा है। निजामबाद के दीये चीन स्थित भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय रहे। चीन के अलावा लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया महाद्वीप जिले के निजामबाद के मिट्टी की दीयों की भरमार रही। यहां के 1500 कारीगरों को कार्ड दिया गया। 8000 अन्य लोगों को इस अभियान से सीधे जोड़ा गया। वैसे निजामबाद कस्बे के आस पास 80 हजार लोगों को परोक्ष-अपरोक्ष रूप से एक जिला एक उत्पाद नीति का सीधा लाभ मिल रहा है ब्लैक पाटरी उद्योग के सम्मानितों की लम्बी सूची है जिन्हें अधिक मांग के चलते मुंबई, नागपुर, दिल्ली ,पुणे, बेंगलुरु सहित बड़े शहरों में आपूर्ति करनी पड़ती है। निजामबाद के मिट्टी बर्तनों का 5 करोड़ तिमाही का कारोबार है। कच्चे माल के अभाव के बावजूद यहां के कुम्हार जी जान से जुटे हंै। सरकार की ओर से नसीरपुर गांव के तालाब से मिट्टी निकालने की व्यवस्था की गयी है।

सरकार की पहल ने नई पीढ़ी को भी इस पुस्तैनी कारोबार के प्रति आकर्षित किया है। संगीता प्रजापति कहती हैं कि मैं अपनी तीन बेटियों को ब्लैक पाटरी के हुनर सिखाऊंगी जिससे वे अपने जीवन में इस नायाब कला को आगे बढ़ा सकें। सरकार की पहल को हम जन-जन तक पहुंचाएंगे। योगी सरकार की इस पहल से न केवल निजामबाद की आर्थिक स्थिति बदल रही है वरन आजमगढ़ सफलता के नये सोपान गढ़ रहा है।

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