घेरे में असली राजदार

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प्रदेश के खनन घोटाले में आईएस अफसर बी चंद्रकला के यहां सीबीआई छापे के बाद मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव समेत कई राजनेताओं के फंसने के आसार हैं। अखिलेश के कार्यकाल में खनन घोटाला हुआ था। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती ने उनका साथ देने का फैसला किया है, लोकसभा चुनाव साथ-साथ लड़ने का ऐलान भी किया है। दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन इस गठजोड़ से अखिलेश यादव खनन घोटाले की जांच की आंच से नहीं बच सकते।

 

बात अब केवल दागी आईएएस अफसर बी चंद्रकला के यहां सीबीआई के छापे तक सीमित नहीं रही। जिन अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में खनन घोटाला हुआ, वह भी उसकी जद में आ गये हैं। उनके पक्ष में हालांकि बसपा प्रमुख मायावती आ गई हैं। दोनों दलों ने सड़क पर उतरने की धमकी भी दी है। लेकिन अखिलेश खनन घोटाले की जांच की आंच से बच नहीं सकते। जब खनन घोटाला हुआ, उस समय अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। समय 2012 से 2016 का है। मुख्यमंत्री के साथ उनके पास खननमंत्री का भी जिम्मा था। बी चंद्रकला हमीरपुर की जिलाधिकारी थीं। उनके प्रस्ताव पर बताते हैं,अखिलेश ने एक ही दिन में खनन के 13 लाइसेंसों को नियम विरुद्ध मंजूरी दी थी।
सीबीआई ने बी. चन्द्रकला के लखनऊ आवास समेत कानपुर, नोएडा, हमीरपुर, जालौन, दिल्ली समेत 14 ठिकानों पर छापेमारी की। चन्द्रकला के घर पर 6 जनवरी को छापा मारा। उन पर खनन पट्टों के आवंटन मेंं अनियमितता के आरोप हैं। उन्होंने जुलाई 2012 के बाद जिले में 50 मौरंग खनन के पट्टे किये थे। उन पट्टों को ई-टेंन्डर के जरिए स्वीकृति देने का प्रावधान था। इसके बाद भी चन्द्रकला ने प्रावधानों की अनदेखी कर पट्टे जारी कर दिये। वर्ष 2012-13 में खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था। चूंकि 2011 के बाद से प्रदेश के सभी खनन मंत्री जांच के घेरे में हैं। ऐसे मेंं सीबीआई अखिलेश यादव व पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति एवं सपा विधायक रमेश मिश्रा से पूछताछ कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार रमेश मिश्रा ने नियमों का उल्लंघन कर कई लोगों को खनन का पट्टा दिलवाया था। परोक्ष रूप से वे स्वयं भी इस कारोबार में शामिल रहे। इन सभी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक और ई-टेन्डर शुरू होने के बाद भी सीधे खनन के ठेके दे दिये गये। न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने 2016 में सात प्रारम्भिक मामले दर्ज किये। इनमें 2 मामलों में एफआईआर पहले ही दर्ज हो चुकी है।

वर्तमान मामला हमीरपुर जिले में हुए अवैध खनन का है। पूर्व में भी जांच ब्यूरो चन्द्रकला से पूछताछ कर चुका है। इस मामले में उनकी संलिप्तता को देखते हुए चन्द्रकला के घर की फाल्स सीलिंग सोफा और बेड तक की जांच की गयी। उनके नोएडा स्थित ठिकाने पर भी छापे मारे गये। इस दौरान कई अहम दस्तावेज भी मिले। उनके दो बैंक खाते एवं एक लॉकर को भी सीज कर दिया गया। 2008 बैच की आईएएस अफसर बी चन्द्रकला अखिलेश सरकार के पसंदीदा अधिकारियों में रही हैं। चन्द्रकला को सपा सरकार में पूरे 5 वर्ष अलग-अलग जिलो में तैनाती दी गयी। 13 अप्रैल 2012 में चन्द्रकला को पहली बार हमीरपुर जिले की कमान मिली। इसके बाद उन्हें मथुरा, बुलन्दशहर, बिजनौर एवं मेरठ का प्रभार सौंपा गया।

 

भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: महेंद्र नाथ पांडेय (प्रदेश अध्यक्ष भाजपा)
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय कहते हैं कि खनन घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के आदेश पर हो रही है। सीबीआई स्वतंत्र है। उसके काम में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं हो रहा है। सपा और बसपा के नेताओं का प्रलाप समझ में नहीं आ रहा है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनना चाहिए। हमारी सरकार सदैव कानून के दायरे में रखकर न्यायालय के निर्णयों का सम्मान करती रही है। कानून सबके लिए एक समान है। इसलिए इस प्रकरण पर विधि सम्मत कार्यवाही होनी चाहिए। गम्भीरता से यह बात सोचने की है कि भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर कभी ऊंगली क्यों नहीं उठी? जांच क्यों नहीं हुयी? कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह हमारे मुख्यमंत्री रहे हैं। किसी पर आंच नहीं आयी।

आय से अधिक सम्पत्ति का मामला

बी चन्द्रकला आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में भी फंस सकती हैं। वर्ष 2017 में चन्द्रकला की सम्पत्ति एक साल में अचानक काफी बढ़ने पर चर्चा में आई थीं। चर्चा है कि उन्होंने सीबीआई की छापेमारी से 10 दिन पहले ही तेलंगाना के मलकाजगिरी में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। उसकी कीमत लगभग 22.50 लाख रुपये में खरीदी थी। चन्द्रकला ने विगत वर्षों के दौरान जिन सम्पत्तियों का ब्योरा दिया था। उनका उल्लेख 2019 के रिर्टन में नहीं किया गया।

खनन माफिया करवाते थे तैनाती

अखिलेश यादव की सरकार में खनन माफिया, नेताओं के साथ मिलजुल कर जिलों में अधिकारियों की नियुक्ति कैसे कराते थे। इसकी झलक सीबीआई द्वारा मारे गये छापे के बाद दिख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण जिलाधिकारी के पास खनन पट्टों के आवंटन का अधिकार होना था। इसी वजह से खनन माफिया पहले तो अपने मनचाहे अफसरों को डी.एम. बनवाते थे। इसके बाद मनमाने ढंग से खदानों के पट्टे ले लेते थे। सीबीआई को हमीरपुर में हुए खनन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की संलिप्तता के प्रमाण मिल रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपनी ही सरकार की ई-टेन्डर नीति और इसी मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हुए खनन पट्टे बांटे। इसके बाद 14 जून 2013 को भी उन्होंने एक और खनन पट्टे को मंजूरी दी। अखिलेश यादव के बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति खनन मंत्री बने। एक जनहित याचिका दाखिल होने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने स्वयं के आदेशों के उल्लंघन की खुली तस्वीर देखी। इस पर हैरानी जताते हुए न्यायालय ने पूरे प्रकरण की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो से कराने का निर्देश दिया।

अखिलेश यादव बेदाग: राम गोविंद चौधरी, नेता विपक्ष
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बेदाग छवि के शानदार राजनेता हैं। मेरा एक लम्बा राजनीतिक अनुभव है। मैने यह महसूस किया है कि इनके जैसा ईमानदार, समर्पित, विकासशील एवं हर वर्ग को साथ लेकर लाभ पहुंचाने का कार्य करने वाला कोई दूसरा नेता नहीं है। इनके पांच वर्ष के कार्यकाल में समाज, पत्रकार, अखबार, पत्रिका, चैनल कोई भी इन पर ऊंगली नहीं उठा सका। केन्द्र की लगभग साढे चार वर्ष और यूपी की दो वर्ष की सरकार पूरी तरह फेल है। पूरे देश में अखिलेश स्वीकार्यता बढ़ी है। लोग इन्हें भविष्य का नेता मान रहे हैं। अखिलेश की विकास की छवि से घबराये भाजपाई उनके चरित्र हनन पर उतारू हैं। भाजपा 2014 से अपने कार्य पर नहीं दे रही है। विपक्षी पार्टियों के चरित्र हनन में लगी है।

चहेतो को बांटी रेवड़ी
केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने अभी तक अखिलेश सरकार द्वारा नियम विरुद्ध जारी किये गये 22 पट्टों तक ही अपनी जांच का दायरा बना रखा है। यह पट्टे हमीरपुर जिले में अलग-अलग व्यक्तियों को 17 फरवरी 2013 से 26 मई 2015 के बीच आवंटित किये गये थे। अखिलेश यादव ने जिन 14 पट्टों का आवंटित करने के लिए अनुमोदन किया। उसमें अधिकतर सपा के विधान परिषद सदस्य रमेश मिश्रा और उनके सम्बन्धियों के नाम पर थे। इसके अतिरिक्त अखिलेश सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति ने 8 पट्टे राबिया बेगम, सपा सांसद धनश्याम अनुरागी, कौशल्या चौबे, जगदीश सिंह और करन सिंह के नाम पर थे। अवैध खनन के मामले में सीबीआई की छापेमारी से बुंदेलखण्ड से लेकर लखनऊ, दिल्ली तक हलचल मची है।पूर्वांचल में भी पत्थर खदानों के अवैध आवंटन का आरोप चर्चा में है। सपा सरकार के कार्यकाल में मिर्जापुर व सोनभद्र जिले में लगभग 60 से ज्यादा पत्थर खदानों का आवंटन किया गया। इसमें मिर्जापुर में 30 से अधिक, सोनभद्र में 24 से अधिक खदानें न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर आवंटित की गयीं।

 

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