केरल में आईएस की दस्तक

एनआईए की ताजा रिपोर्ट से भारत की चिंता बढ़ गई है। दुनिया के सबसे खतरनाक संगठन आईएस ने दक्षिण के केरल में अपना पांव पसार लिया है। इस प्रांत में 2015 में एनआईए को एक-दो आॅडियो मिले थे। इनके प्रसारण के जरिए जिहाद की बड़ाई करते हुए, भारतीय युवाओं को चॉकलेट, घर और महिलाओं की भी पेशकश की गई है। जुलाई, 2015 में एक आरोपित अब्दुल रशीद उर्फ अब्दुल्ला को एनआईए ने भारत में आईएस के मुख्य ‘मोटिवेटर’ के तौर पर चिह्नित किया था।

दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी सगठन आईएस (इस्लामिक स्टेट) केरल के जरिए भारत में भी दस्तक दे चुका है। उसका मकसद यहां के मुस्लिम युवकों को हिंसा के खेल में शामिल कर यहां भी खून-खराबा करना है। एनआईए ने बड़ा खुलासा किया है। सितंबर में उसने आईएस के कमांडरों की अंगुलियों पर नाचने वाले केरल के एक ऐसे युवक नशीदुल हकजाफर को पकड़ा जो अब तक 14 और युवकों को आईएस में भर्ती करवा चुका है। एनआईए को नशीदुल के जरिए आतंकियों की साजिश के बारे में जो कुछ पता चला है, उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आंतकियों का आका अबू बकर अल बगदादी लगातार अफगानिस्तान में सक्रिय है। नशीदुल का कहना है, बगदादी के गुनाहों की फौज में भारतीय युवकों को शामिल किया जा रहा है। उन्हें ज्यादा पैसा, खूबसूरत लड़की और आलीशान मकान देने का लालच देकर गुमराह किया जाता है। आईएस की आला शक्ति अब कई देशों के नौजवान हैं।

इसने विश्व के मुस्लिम नौजवानों को धर्म और मजहब का पाठ पढ़ाने की आड़ में ‘काफिरों’ के खिलाफ बंदूक उठाने के लिए तैयार किया है। इस आतंकी संगठन में युवाओं की बहुत बड़ी फौज है जो आत्मघाती बमों और जैविक हथियारों से लैस हैं। आईएस के आका आॅनलाइन भर्ती कर रहे हैं। ये गैरमुस्लिम देशों के मुसलमान युवकों को इंटरनेट के जरिए गुमराह कर अपनी साजिश में शामिल करते हैं। बदले में उनके परिवारों को मोटी रकम दी जाती है। इसलिए मुस्लिम युवक आसानी से आतंकी सगठनों के झांसे में आ जाते हैं। केरल के वायनाड जिले के काल्पेटा का 26 वर्षीय नशीदुल हमजाफर अक्टूबर, 2017 में अफगानिस्तान गया था। उससे पूछताछ में पता चला है कि अफगानिस्तान के एक कथित इस्लामी राज्य में आईएस में भर्ती का दफ्तर  खोला गया है।

आईएस इराक में युवकों को आकर्षित करने के लिए अच्छी तरह से एक तेल प्रणाली चलाता है। उसके बाद उन युवकों को सीरिया और अफगानिस्तान भेज दिया जाता है। नशीदुल खुद केरल के कासरगोड और पलक्कड़ जिलों के 14 युवाओं को आईएस में शामिल करा चुका है। ये सभी नशीदुल के दोस्त थे और केरल और बेंगलुरु में एक साथ पढ़ते थे। अफगानिस्तान ने 11 सितंबर, 2018 को नशीदुल को एनआईए को सौंप दिया। उससे लंबी पूछताछ हुई। साथ ही उन 14 अन्य युवकों के मामले की भी जांच-पड़ताल चल रही है। पूछताछ रिपोर्ट (आईआर) के अनुसार, नशीदुल 2017 के मध्य में ओमान के लिए रवाना हुआ था और अफगानिस्तान पहुंचने के लिए वहां से ईरान गया।

ईरान में उसे अफगानिस्तान ले जाने के लिए दो आतंकियों अब्दुल रशीद उर्फ अब्दुल्ला और अशफाक मजीद को जिम्मेदारी दी गई। इन दोनों ने नशीदुल को अफगानों के लिए निर्वासन केंद्र में पहुंचा दिया। सोचा गया था कि नशीदुल निर्वासन  केंद्र में रहकर आसानी से आईएस के तमाम कामों को अंजाम देता रहेगा, लेकिन नर्वासन प्राधिकरण के अधिकारियों को नशीदुल की राष्ट्रीयता पर संदेह हो गया। जांच के बाद निश्चित हुआ कि नशीदुल पाकिस्तानी है और उसे पाक निर्वासन के अधिकारियों को सौंप दिया गया। आईएस के लोगों ने पाकिस्तान निर्वासन के अधिकारियों से संपर्क किया। नशीदुल ने भी महकमे के एक अधिकारी से झूठ बोला और कहा कि वह अफगानी है। पाकिस्तान के उस अधिकारी ने नशीदुल को अफगानिस्तान भेजने का सरकार से अनुरोध किया। अंतत: फिर उसे अफगान शिविर में भेज दिया गया। आतंकियों के आका भी यही चाहते थे। उन्होंने नशीदुल को मिशन पर लगा दिया।

“आतंकी संगठन आईएस में शामिल होने का संदेह है। वाट्सऐप सहित अन्य सोशल मीडिया के जरिए मिले सबूतों के आधार पर हमने यह संदेह जताया है। केरल पुलिस को इस बारे में वाट्सऐप, टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप्लिकेशन और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 300 से अधिक वॉइस क्लिप और संदेश सहित कई सबूत मिले हैं। हम मामले की जांच कर रहे हैं।”

                                                                                   लोकनाथ बेहरा(डीजीपी, केरल पुलिस)

सबसे पहला परिचय उसका निमुरुज से कराया गया। उसने कबाड़ से एक बाइक टैक्सी दिला दी। मकसद जो भी रहा हो, लेकिन जल्द ही दोनों युवक अफगान अधिकारियों की गिरμत में आ गए। कई महीने दोनों को हिरासत में रखा गया। पूछताछ में जब यह बात साबित हो गई कि नशीदुल भारत का है तो उसे निर्वासित कर दिया गया। नशीदुल हमजाफर का प्रिय विषय था विज्ञान। स्कूल में 60 प्रतिशत अंक से उसने परीक्षा पास की। उसके बाद बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर के लिए 2011 में बेंगलुरु चला गया। वहां उसकी मुलाकात एक मजहबी शख्स से हुई। यहीं से नशीदुल ने कट्टरवाद में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। तब्लीगी जमात प्रचारक बन गया। बिजनेस की पढ़ाई पूरी करते-करते नशीदुल की एक सालाफिस्ट प्रचारक से मुलाकात हुई। उसके संपर्क में आने के साथ ही वह ‘कट्टरवाद’ में बदल गया।

यह वह दौर था, जब आईएस इराक और सीरिया में बढ़ रहा था और तमाम नवजवानों के दिल- ओ-दिमाग में जेहाद का जहर भरने के लिए इंटरनेट पर लगातार सामग्री परोसी जा रही थी। उन दिनों नशीदुल हमजाफर दुबई और न्यूजीलैंड में रहकर अपना करियर बनाना चाहता था। उसकी मानें तो वह आईएस में शामिल होने का इच्छुक नहीं था। आतंकियों के ‘क्रूर’ तरीके से उसे बहुत डर लगता था। यहां तक कि जिन दोस्तों को वह आईएस में भेज चुका था, उनको लेकर भी डरा रहता था। आखिरकार 2016 में एक रोज नशीदुल तिरुवनंतपुरम स्थित केमर में ऑटोमोबाइल प्रशिक्षण कार्यक्रम का बहाना कर वापस लौट आया। इस बीच अफगानिस्तान पहुंच चुका उसका एक दोस्त शिहास और अन्य ने नशीदुल से फिर से संपर्क किया और आईएस से जुड़ने को कहा। व्हाट्सएप पर शिहास लगातार संदेश भेजता रहता। उसका कहना था, जैसा तुम सोच रहे हो, वैसा नहीं है। मीडिया 99 प्रतिशत झूठी रिपोर्ट पेश करता है।

इसके बाद उसने 110 पेज की एक पीडीएफ फाइल भेजी। वह पुस्तक ‘हिजरा और जिहाद और पैगंबर के इतिहास’ के बारे में थी। मई 2017 में ‘व्हाट्स टू केरल’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप पर शिहास से कुछ ऑडियो क्लिप भी प्राप्त हुए। क्लिप सुनने के बाद नशीदुल का रुख आईएस के प्रति नरम हो गया। वह उसके कायदे-कानून मानने लगा। जाकिर नायक, मुफ़्ती मेनक, नोमन अलीखान, बिलाल फिलिप इत्यादि के ऑडियो सुनना शुरू कर दिया। दाढ़ी बढ़ा ली। परिवार के सदस्यों को भी उसी तरह ढालने लगा, तुम लोग टीवी मत देखा करो और ब्याज पर रुपये उधार देना शुरू कर दो। मां-बहन को पूरी तरह से कपड़े पहनने का निर्देश दिया ताकि उनका शरीर ढका रहे।

कॉलेज के समय में नशीदुल कई युवाओं के संपर्क में रहा, जिनमें से अधिकतर बाद में आईएस में शामिल हो गए। इनमें एक इसाई युवक बेस्टिन विन्सेंट और उसका दोस्त शिहास भी था। नशीदुल इन्हें कोडवर्ड में ‘अल्कोहल और मारिजुआना’ कहता था। बाद में विन्सेंट ने इस्लाम कबूल कर लिया और अफगानिस्तान के नंगारहर प्रांत में जाकर रहने लगा। यहां उसका नाम सालाफी रखा गया और आईएस ने अपने वादे के मुताबिक उसकी एक लड़की से शादी करा दी। उस लड़की ने भी धर्म बदल लिया था और इन दोनों से अब एक बच्चा भी है। आतंकी संगठन आईएस की जमीन करीब 12 साल पहले इराक में तैयार हुई थी। वह 2006 का दौर था। अमेरिका एक लंबी लड़ाई के बाद इराक को सद्दाम हुसैन के चंगुल से आजाद करा चुका था। इस जंग में इराक पूरी तरह बर्बाद हो चुका था।

2011 में सद्दाम का भी अंत हो गया। अमेरिकी सेना ने इराक छोड़ दिया। वहां अब अगर कुछ बचा था तो तबाही और बर्बादी का मंजर। ऐसे में बहुत से छोटे-मोटे गुट अपनी ताकत दिखाने के लिए फिर से लड़ने लगे। उन्हीं में एक गुट अल-कायदा का भी था। इराक में इसका चीफ था- अबू बकर अल बगदादी। इस दहशतगर्द ने अजीब मंसूबे पाल रखे हैं। वह पूरी दुनिया पर दहशत की हुकूमत कायम करना चाहता है, लेकिन उस समय उसके पास न दौलत थी और न ही लड़ाके। मदद करने के लिए भी कोई नहीं तैयार था। ऐसे में उसने इराक पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अल-कायदा इराक का नाम बदलकर एक नया नाम आईएसआई (इस्लामिक स्टेट आफ इराक) रख दिया। आईएसआई के गठन के साथ ही बगदादी ने अमेरिका से हारी सद्दाम हुसैन की सेना के कमांडर और सिपाहियों को भी अपने साथ मिला लिया। कहावत है न दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। आईएसआई ने पुलिस, सेना के दμतर, चेकप्वाइंट्स और रिक्रूटिंग स्टेशंस को निशाना बनाना शुरू कर दिया। आतंक का कांरवा बढ़ता गया। आईएसआई में हजारों लोग शामिल हो गए, मगर बगदादी को वह कामयाबी तब भी नहीं मिली जिसकी उसे उम्मीद थी।

मायूस होकर उसने सीरिया का रुख किया। सीरिया उस दौरान गृह युद्ध झेल रहा था। अल-कायदा और फ्री सीरियन आर्मी वहां के दो सबसे बड़े गुट थे। बगदादी ने कामयाबी पाने के लिए यहां आईएसआई का नाम बदलकर आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया) कर दिया। आईएसआईएस करीब चार साल तक सीरिया में अपनी हुकूमत बनाने के लिए जद्दोजहद करता रहा पर कामयाब नहीं हुआ। वैसे इस बीच फ्री सीरियन आर्मी की कमर टूट गई। जून 2013 में पहली बार आर्मी जनरल ने दुनिया के आगे मदद की अपील की, ‘अगर हमें हथियार नहीं मिले तो बागियों से हम जंग हार जाएंगे।’ कई देशों पर इस अपील का जबरदस्त असर हुआ। अमेरिका, इजराइल, जॉर्डन, टर्की, सऊदी अरब और कतर ने फ्री सीरियन आर्मी को हथियार, पैसे और प्रशिक्षण की मदद देनी शुरू कर दी। एक हμते में इन देशों ने सारे आधुनिक हथियार, एंटी टैंक मिसाइल, गोला-बारूद सब कुछ सीरिया को मुहैया करा दिया।

बगदादी ने इस बीच नई चाल चली। उसने पूरी दुनिया को धोखा देने के लिए आईएसआईएस को फ्रीडम फाइटर संगठन बताते हुए फ्री सीरियन आर्मी में सेंध लगा दी। अमेरिका भी बगदादी की इस चाल को नहीं समझ पाया। सीरिया के सैनिकों को फ्रीडम फाइटर समझकर प्रशिक्षण देनी शुरू कर दी। ख्वाब में भी अमेरिका ने नहीं सोचा था कि जिसे वह फ्रीडम फाइटर समझ रहा है, वही लड़ाके आईएसआईएस संगठन में शामिल होकर एक रोज पूरी दुनिया के लिए काल बन जाएंगे। आखिरकार फ्री सीरियन आर्मी के अधिकतर लोग आईएसआईएस में शामिल हो गए। साल भर के अंदर आर्मी के लिए आए तमाम आधुनिक हथियार और गोला-बारूद आईएसआईएस तक पहुंच गए।

जून, 2014 से आईएसआईएस ने सीरिया में कहर बरपाना शुरू कर दिया। एक साल के भीतर सीरिया के रक्का, पामयेरा, दियर इजौर, हसाक्का, एलेप्पो, हॉम्स और यारमुक इलाके के कई शहरों पर बगदादी ने कब्जा कर लिया। इन शहरों में उसकी हुकूमत चलने लगी। उसके बाद इराक के भी कई शहरों मसलन रमादी, अनबार, तिकरित, मोसुल और फालुजा पर कब्जा कर लिया। इसके बाद बगदाद की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया, लेकिन जनवरी 2017 में बगदादी को मुंह की खानी पड़ी। अमेरिका ने हमले तेज कर दिए।

सीरिया और इराक के शहरों से आईएस का बोरिया-विस्तर बंध गया। करीब डेढ़ साल में तीन बार यह खबर आई कि आतंकियों का आका अबू बकर अल बगदादी मारा गया, लेकिन दुनिया की तमाम सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह आज भी एक पहेली बना हुआ है। फिलहाल, यह दहशतगर्द फिर से बोलने लगा है। पता चला है कि इराक और सीरिया से बोरिया-बिस्तर बंधने के बाद आईएसआईएस और उसका सरगना सीरिया से सोमालिया पहुंच चुका है। वहां आतंक की नई जमीन तैयार हो रही है और खुद बगदादी भी सोमालिया में ही छिपा है। अमेरिका की नजर सोमालिया पर जम गई। उसने हमले तेज कर दिए। बगदादी का कुछ पता नहीं है कि वह मारा गया या जिंदा है, लेकिन आंतकी हमले बंद नहीं हो रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2015 से अफगानिस्तान के करीब नौ राज्यों में आईएस अपनी पैठ बना चुका है। यहां के कई इलाकों में इस आतंकी संगठन की अपनी हुकूमत चलती है।

 

देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में एक दूसरे पर आतंकी संगठन तालिबान और आईएस के लड़ाके आपस में हमले भी करते रहते हैं। 2 जनवरी, 2018 को अफगान सुरक्षा बलों ने नांगरहार प्रांत में ही आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आईएस के 60 आतंकियों को मार गिराया था और 18 आतंकियों को गिरμतार करने का दावा किया था। उसके बाद इसी वर्ष 14 जनवरी को भी नांगरहार प्रांत में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर सुरक्षा बलों के हवाई हमलों में 17 आतंकी मारे गए थे। लेकिन ताजा रिपोर्ट से भारत की चिंता बढ़ गई है। अफगानिस्तान में आतंकियों के आकाओं ने आतंक का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। हिन्दुस्तान के नौजवानों को वे तरह-तरह से अपनी ओर आकर्षित करके आतंकी बना रहे हैं। दक्षिण भारत के केरल प्रांत में 2015 में एनआईए को एक-दो ऑडियो मिले थे। इनके प्रसारण के जरिए जिहाद की बड़ाई करते हुए, भारतीय युवाओं को चॉकलेट, घर और महिलाओं की भी पेशकश की गई है। जुलाई, 2015 में इस सिलसिले में एक आरोपित अब्दुल रशीद उर्फ अब्दुल्ला को एनआईए ने भारत में आईएस के मुख्य मोटिवेटर के तौर पर चिह्नित किया था। तब पता चला था कि केरल में वही आईएस की भर्ती और फंड जुटाने का आॅपरेशन चला रहा है। अबदुल्ला मूल रूप से केरल के कसारागोड जिले का ही रहने वाला है।

करीब दो साल पहले वह आईएस के ताल्लुक में आया था। उसे अफगानिस्तान में प्रशिक्षण दिया गया। उसके बाद इतनी तेजी से आंतक की सीढि़यां चढ़ीं कि आईएस के लिए भारत से भर्ती करने का मुख्य कर्ताधर्ता बन गया। अब तक वह केरल से 21 युवकों को अफगानिस्तान ले जाकर आईएस में शामिल करा चुका है। इनमें से दो-तीन युवक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब्दुल्ला भारत से अधिक से अधिक भर्ती के लिए हाथ-पैर मारने से बाज नहीं आ रहा था। वह अति-सुरक्षित टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के जरिए केरल में ऑडियो क्लिप्स भेजता था। इनमें मलयालम भाषा में इस्लाम के नाम पर युवकों का माइंडवॉश करने की कोशिश की जाती है। देश के खुफिया प्रतिष्ठान से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, हासिल किए गए ऑडियो में अब्दुल्ला की आवाज की प्रामाणिकता की पुष्टि हो चुकी है।

एक ऑडियो में वह कहता है, आईएस के पास इराक, लीबिया, खुरासन, अफ्रीका आदि में उससे कहीं ज्यादा इलाका है, जितना तुम समझते हो। यहां अबु बकर अल बगदादी की हुकूमत चलती है। वो दुनिया के सभी मुस्लिमों के नेता हैं। इसलिए उन्हें बयात (निष्ठा की शपथ) देना अनिवार्य है। अबदुल्ला बार-बार आईएस के कसीदे पढ़ता है। बताता है कि ये शरीयत को अपनाने वाला ‘सामान्य देश’ है। हम इस्लामिक स्टेट खुरासन में सामान्य जीवन जीते हैं। शरिया में जिसकी भी इजाजत है, वो यहां होता है। शरिया में जिसकी इजाजत नहीं है वो यहां नहीं हो सकता। इस्लामिक स्टेट सरकार के तहत यहां अलग-अलग महकमे हैं- जैसे शिक्षा, कृषि, पुलिस, संपत्ति, जकात (चेरेटी), वित्त और जिहाद का महकमा।

“दहशतगर्द किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं हैं। अब सोशल मीडिया एकाउंट से भी इनकी पहचान संभव होने लगी है। एनआईए ने धर-पकड़ तेज कर दी है। इस मामले में उसे बड़ी कामयाबी मिली है।”

                                                                                        राजनाथ सिंह(गृहमंत्री, भारत सरकार)

अब्दुल्ला युवकों को लुभाने के लिए कई तरह की सुविधाओं का भी वादा करता है। उन्हें अच्छा घर, गोश्त और अन्य सुविधाएं देने की बात करता है। अब्दुल्ला अफगानिस्तान स्थित आईएस के दμतर में बैठकर केरल के युवकों को महिलाओं का लालच देते भी सुना गया है। इसके बाद जिहाद के हिस्से के तौर पर जघन्य हिंसा के इस्तेमाल को वह जायज ठहराता है। वह कहता है- ‘ये सुन्नाह है कि जिहाद करो। इस्लामिक स्टेट भी मुशरीकीन, कुफ्र, मुर्तादीन और मुनाफीकीन के खिलाफ जिहाद करते हैं। अल्लाह हम सबको सही रास्ता दिखाए और हम सब जन्नत में मिल सकें।’ उच्च सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अब्दुल्ला कसारागोड से 17 और पालक्काड से चार युवकों को अफगानिस्तान में आईएस कैम्पों में ले जाकर शामिल करा चुका है। इन युवकों में डॉक्टर, इंजीनियर और मैनेजमेंट एक्सपर्ट भी शामिल हैं।

उच्च पदस्थ अधिकारियों ने बताया कि मार्च, 2018 तक भारत भर में कम से कम 75 लोग आईएस से संदिग्ध जुड़ाव के लिए गिरμतार किए जा चुके हैं। इनमें केरल से 21, तेलंगाना से 16, कर्नाटक से 9, महाराष्ट्र से 8, मध्य प्रदेश से 6, उत्तराखंड और तमिलनाडु से 4- 4, उत्तर प्रदेश से 3, राजस्थान से 2, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल से 1-1 लोग शामिल हैं। एनआईए मामले की जांच कर रही है।

 

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