काम नहीं, कारनामा

देश की सियासत रायसीना हिल्स और लुटियन जोन से तय होती है लेकिन ममता बनर्जी की राजनीति कोलकाता से। ममता बनर्जी की सियासत समझने वाले लोग मानते हैं कि वह अपना हर फैसला नतीजों की चिंता किए बगैर लिया करती हैं । वह दरअसल एक ‘एक्टिविस्ट’ हैं और अपनी सारी रणनीतियां उसी ‘एक्टिविज्म’ के इर्द-गिर्द तैयार करती हैं। बात चाहे जुलाई ’93 में उनके रॉयटर्स मार्च की हो या फिर सितंबर ’08 के सिंगूर आंदोलन की। उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन खुद तैयार की है।

रोज वैली घोटाला
रोज वैली घोटाले पर काफी वक्त से हड़कंप मचा हुआ है। इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। जानकारी के मुताबिक लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर चूना लगाने वाले इस समूह के पैर राजनीति, रियल एस्टेट और फिल्म जगत तक पसरे हुए थे। दरअसल, रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली समूह ने लोगों को दो अलग-अलग स्कीम का लालच दिया। करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था। आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर समूह ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया। इसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया।

 

यह अलग बात है कि अचानक से मिली सियासी जमीन पर ममता बनर्जी ने बाद में सियासी महल भी खड़े किए हैं। कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार और सीबीआई विवाद के मौजूदा घटनाक्रम को भी उसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। तीन फरवरी की शाम अपने धरने की शुरुआत के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वह संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं, उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं हैं, इसका भी डर नहीं है कि उनकी सरकार चली जाए और यहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। बकौल ममता, वह देश बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। इसमें सबके सहयोग की आकांक्षा है। उनके इस बयान का मतलब समझिए। दरअसल वह यह मुनादी कर रही हैं कि कोलकाता के मेट्रो चैनल पर बैठकर नजरें सीधे दिल्ली के रायसीना हिल्स पर है। वह करीब 8 साल से मुख्यमंत्री हैं। यदि इनके काम को देखा जाए तो काम कम, कारनामों के लिए ज्यादा सुर्खियों में रही हैं। भाजपा के विरोध में अपने आप को एकलौता साबित करने के क्रम में अनगिनत अजीबो गरीब हरकतें भी की हैं। मुद्दे अनेक हैं जिसके लिए स्वयं व अपनी सरकार और पार्टी को हमेशा कठघरे में खड़ा किया हैं। अदालतों ने भी वक्त-वक्त पर संज्ञान व प्रतिकूल प्रतिक्रिया व्यक्त किया है।

शारदा चिटफंड घोटाला
पश्चिम बंगाल की एक चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप ने लोगों को लुभावने ऑफर देकर चूना लगाया। शारदा चिटफंड ने लालच दिया कि सागौन से जुड़े बॉन्ड्स में निवेश कर 34 गुना ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकेगा। इसके लिए 25 साल का लॉकिंग पीरयड बताया गया था। मसलन, अगर आप 1 लाख रुपये का निवेश करते हैं तो 25 साल बाद आपको 34 लाख रुपये मिलेंगे। हालांकि ये बस एक लोगों को लालच देकर ठगी करने का पैंतरा था। वहीं आलू के व्यापार में 15 महीनों के भीतर ही रकम दो गुना करने का सपना भी इसी समूह ने दिखाया। लालच में आकर 10 लाख लोगों ने निवेश किया और आखिर में कंपनी पैसों के साथ फरार हो गई। इस घोटाले में बड़े कॉरपोरेट, राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम शामिल हैं। इस कंपनी के मालिक सुदिप्तो सेन ने सियासी जान-पहचान के दम पर खूब पैसे कमाये। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को जांच का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को इस मामले की जांच में सीबीआई को मदद करने का आदेश भी दिया। इससे पहले इस मामले में छानबीन के लिए साल 2013 में कमेटी का गठन किया गया, जिसकी अगुवाई राजीव कुमार ने की, लेकिन साल 2014 में मामला सीबीआई के पास चला गया। आरोप है कि घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइल और दस्तावेज गायब हैं। इन्हीं गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर सीबीआई पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती थी। गौरतलब है कि इस मामले के तार यूपीए सरकार के वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम से भी जुड़े हैं। उनका नाम भी आरोप पत्र में है। आरोप है कि चिटफंड घोटाले में घिरे शारदा समूह की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले।

 

फिलहाल यहां अदालतों के संज्ञान में चल रहे घोटालों व धोखाधड़ी की जांच की ही बात करेंगे। इस कड़ी में सबसे पहले आता है शारदा चिटफंड और रोज वैली घोटाला। शारदा चिट फंड में 40,000 करोड़ रुपये और रोज वैली स्कैम में 15,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। दरअसल, रोज वैली और शारदा चिटफंड मामले में ही कोलकाता पुलिस के आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ के लिए सीबीआई को उनकी तलाश है। अब उनसे मेघालय की राजधानी में शिलांग में पूछताछ भी हो चुकी है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि चिटफंड मामले में राजीव कुमार शक के घेरे में हैं। रोज वैली और शारदा चिटफंड मामले में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के निवास पर सीबीआई के 40 अधिकारियों की एक टीम भी पहुंची थी। पूछताछ के लिए उन्होंने कुमार को दो बार समन भी भेजा, लेकिन वो जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहयोग के लिए शिलांग गए। बहरहाल, रोज वैली और शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई ने अब तक 80 चार्जशीट फाइल की है जबकि एक हजार करोड़ से ज्यादा रुपये रिकवर कर लिए गए हैं।

शारदा समूह 239 निजी कंपनियों का एक संघ था और ऐसा कहा जा रहा है कि अप्रैल’13 में डूबने से पहले इसने 17 लाख जमाकर्ताओं से 40,000 करोड़ रुपये जमा किये थे। वहीं, रोज वैली के बारे में कहा जाता है कि इसने 15,000 करोड़ रुपये जमा किये थे। शारदा समूह से जुड़े सुदिप्तो सेन और रोज वैली से जुड़े गौतम कुंडु पर आरोप है कि वह पहले पश्चिम बंगाल की वाम मोर्च सरकार के करीब थे लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य में तृणमूल कांग्रेस की जमीन मजबूत हुई, ये दोनों समूह इस पार्टी के नजदीक आ गये। हालांकि, इन दोनों समूहों की संपत्ति 2012 के अंत में चरमरानी शुरू हो गई और भुगतान में खामियों की शिकायतें भी मिलने लगीं। शारदा समूह अप्रैल’13 में डूब गया और सुदिप्तो सेन अपने विश्वसनीय सहयोगी देबजानी मुखर्जी के साथ पश्चिम बंगाल छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद शारदा समूह के हजारों कलेक्शन एजेंट तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय के बाहर जमा हुए और सेन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शारदा समूह के खिलाफ पहले मामला विधान नगर पुलिस आयुक्तालय में दायर किया गया जिसका नेतृत्व राजीव कुमार कर रहे थे। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर तब सेन को 18 अप्रैल’13 को देबजानी के साथ कश्मीर से गिरμतार किया। इसके बाद राज्य सरकार ने कुमार के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की। एसआईटी ने तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा के तत्कालीन सांसद और पत्रकार कुणाल घोष को सारदा चिटफंड घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में गिरफ्तार किया।

कांग्रेस नेता अब्दुल मनान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद अदालत ने मई’14 में इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश दे दिया। तृणमूल कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं और श्रीनजॉय बोस जैसे सांसदों को सीबीआई ने गिरμतार किया। सीबीआई ने रजत मजूमदार और तत्कालीन परिवहन मंत्री मदन मित्रा को भी गिरμतार किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय जो कि तब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव थे, उनसे भी सीबीआई ने 2015 में इस भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ की। इसके बाद 2015 के मध्य में रोज वैली समूह के कुंडु को भी प्रवर्तन निदेशालय ने गिरμतार कर लिया। इसके अलावा दिसंबर’16 और जनवरी’17 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल और सुदीप बंधोपाध्याय को भी रोज वैली मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

पिछले कुछ महीनों में सीबीआई ने कुछ पेंटिग जब्त किया। उसके बारे में बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बनायी गयी हैं और चिटफंड मालिकों ने इन सभी को बड़ी कीमत देकर खरीदा था। इस साल जनवरी में सीबीआई ने फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत मोहता को भी रोजवैली चिटफंड मामले में शामिल होने के आरोप में गिरμतार किया। दो फरवरी को सीबीआई ने दावा किया कि कुमार फरार चल रहे हैं और सारदा और रोजवैली पोंजी भ्रष्टाचार मामले में उनसे पूछताछ के लिए उनकी तलाश की जा रही है। सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दावा किया है कि चिटफंड घोटाले में घिरे शारदा समूह की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले। इसी मामले में कांग्रेस नेता मतंग सिंह और उनकी पूर्व पत्नी मनोरंजना सिंह को भी गिरμतार किया गया था। इसी मामले में साल 2015 में मोदी सरकार अनिल गोस्वामी को गृह सचिव के पद से हटा चुकी है। उन पर आरोप था कि गोस्वामी ने सीबीआई की उस टीम को फोन कर जानकारी मांगी थी।

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