दिल्ली में ‘तैमूरी ताकत’

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तैमूर नगर की ‘तैमूरी ताकत’ के संरक्षण में चल रहे गैर कानूनी कारनामे ने सिर्फ वहां रहने वाले उमेश कुमार को ही मजबूर नहीं बनाया है, बल्कि इसके सामने दिल्ली पुलिस ने भी घुटने टेक दिए हैं । इसने वोट की राजनीतिक व्यवस्था के साथ गठजोड़ कर लिया है। इसके चलते दिल्ली सरकार के कुछ विभाग व दिल्ली पुलिस के बीच दस्तावेजी फुटबॉल का खेल भी अरसे से खेला जा रहा है।

बॉलीवुड के सितारों के लिए अपने बच्चे का नाम समरकंद के लुटेरे तैमूर लंग के नाम पर तैमूर रखना एक फैशन हो सकता है लेकिन दिल्ली के महारानी बाग इलाके के पास स्थित मोहल्ले का नाम तैमूर नगर रखना वहां निवास करने वाले लोगों के लिए कम से कम अमन का मुलाहजा नहीं कर रहा है। दिल्ली में मृतप्राय: यमुना के किनारे बसा तैमूर नगर अपनी ‘तैमूरी ताकत’ का प्रदर्शन यदा-कदा करता रहता है। स्मैक, हेरोइन, गांजा व अन्य जहरीले नशे के आपूर्ति केंद्र में तब्दील हो रहा तैमूर नगर विगत दो दशकों से सरकार के गले की हड्डी बना हुआ है जिसे वह न तो निगल सकती है और न ही थूक सकती है क्योंकि ऐसा करने के लिए उसकी राह में एक तरफ गड्ढा है तो एक तरफ खाई। अगर पुलिस इन तैमूरी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो उसे एक तरफ नशे की आपूर्ति करने वाले बिगड़ैल बांग्लादेशियों का सामना करना पड़ेगा तो दूसरी तरफ इसे शुचिता का जाल बुनकर अपने को दिल्ली की राजनीति दिल्ली में ‘तैमूरी ताकत’ में स्थापित पार्टी ‘आप’ से भी दुश्मनी मोल लेनी होगी।

इस तैमूरी ताकत की तपिश को झेलने वाले तैमूर नगर के निवासी उमेश कुमार कहते हैं कि उनके घर के पास स्थित स्लम में रहने वाले अधिकांश लोग बांग्लादेशी हैं जो अवैध रूप से वहां रह रहे हैं। उन्होंने यहां के लचर प्रशासन व वोट की राजनीति करने राजनेताओं से मिलिभगत कर दिल्ली का राशन कार्ड, आधार कार्ड आदि बनवाकर यहां की नागरिकता ले ली है और आज ये एक खास पार्टी के लिए मतदान करते हैं। उमेश कहते हैं कि स्लम में लगभग 1,600 परिवार मौजूद हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 5,000 है और इतने मत से कम से कम विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत आसानी से हो सकती है। हालांकि उमेश की उक्ति निराधार नहीं है। उन्होंने तो तैमूरी ताकत के हाथों अपने कलाकार भाई रुपेश को खोया है।

तैमूर नगर स्लम इलाके के लोगों के बांग्लादेशी होने के तथ्य को पूर्व राज्यसभा सांसद परवेज हाशमी ने भी स्वीकारा था। हाशमी ने तो 29 मई 2017 को तैमूरी ताकत के बांग्लादेशी होने की सूचना दिल्ली पुलिस आयुक्त को एक पत्र लिखकर भी दी थी। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि तैमूर नगर में रहने वाले लोगों ने मिलकर उनसे कहा है कि स्लम में रहने वाले लोगों जिनमें अधिकांश बांग्लादेशी हैं, ने वातावरण को बदतर बना दिया है।

पिछले साल 30 सितंबर तैमूर नगर की तैमूरी ताकत ने हिंसा का खेल खेला। आकाश, आकाश त्यागी व अजय राठी ने रुपेश की हत्या गोली मारकर इसलिए कर दी कि वह उनकी राह का रोड़ा बन रहे थे। ये तीनों युवक तैमूर नगर स्लम से ड्रग्स खरीदने आए थे और रुपेश के घर के सामने से जा रहे रास्ते से आपस में लड़ाई झगड़ा करते जा रहे थे कि उन्होंने अपने घर के सामने खड़े रुपेश पर गोली चला दी। अभी तीनों युवक रुपेश की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं। दूसरी तरफ तरफ तैमूरी ताकत का तपिश झेल रहा रुपेश का परिवार है। हालांकि इस तपिश को चौथी कक्षा में पढ़ने वाली रुपेश की बेटी सहज भी झेल रही है। रुपेश के परिवार में अब उनकी पत्नी मोनू, 13 वर्षीय पुत्र आदित्य व 8 वर्षीय पुत्री सहज तैमूरी ताप से जूझ रही है। उल्लेखनीय है कि रुपेश पेंटिंग का काम करते थे। हालांकि तैमूर नगर स्लम इलाके के लोगों के बांग्लादेशी होने के तथ्य को पूर्व राज्यसभा सांसद परवेज हाशमी ने भी स्वीकारा था। हाशमी ने तो 29 मई 2017 को तैमूरी ताकत के बांग्लादेशी होने की सूचना दिल्ली पुलिस आयुक्त को एक पत्र लिखकर भी दी थी। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि तैमूर नगर में रहने वाले लोगों ने मिलकर उनसे कहा है कि स्लम में रहने वाले लोगों जिनमें अधिकांश बांग्लादेशी हैं, ने वहां के वातावरण को बदतर बना दिया है।

दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का भी तैमूर नगर स्लम में रहने वाले लोगों के बांग्लादेशी होने के तथ्य से सामना होता रहा है लेकिन पुलिस महकमे की कथित अकर्मण्यता व वोट की राजनीति ने इसके हाथ को बांध रखा है और ‘तैमूरी ताकत’ के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पा रही है। एक मामले में तो दिल्ली पुलिस के कर्मी खुद ही लिखते हैं कि तैमूर नगर स्लम में बांग्लादेशी रहते हैं। लूट, हत्या जैसे अपराधों को अंजाम देते रहते हैं। पिछले नवंबर के दौरान दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुद ही पांच बांग्लादेशियों को गिरμतार करने की बात की थी। पुलिस ने यह भी कहा था कि वे डाका डालने को लेकर तैमूर नगर में योजना बना रहे थे कि पुलिस ने उन्हें गिरμतार कर लिया। यहां तक कि अपराधियों ने धड़ पकड़ के दौरान पुलिस टीम पर गोली भी चलाई थी। मामले के अभियुक्तों के बारे में इस बाबत दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि वे सभी तैमूर नगर स्लम में रहते थे और दिल्ली-एनसीआर में संगीन अपराधों को अंजाम देते थे।

लेकिन तैमूर नगर की ‘तैमूरी ताकत’ के संरक्षण में चल रहे गैरकानूनी कारनामे ने सिर्फ वहां रहने वाले उमेश कुमार को ही मजबूर नहीं बनाया है बल्कि इस तैमूरी ताकत के सामने दिल्ली पुलिस ने भी घुटने टेक दिए हैं क्योंकि इसने वोट की राजनीति करने वाली राजनीतिक व्यवस्था के साथ गठजोड़ कर लिया है। इसके चलते दिल्ली सरकार के कुछ विभाग व दिल्ली पुलिस के बीच दस्तावेजी फुटबॉल का खेल भी अरसे से खेला जा रहा है। इस खेल की शुरुआत लगभग 17 साल पहले हुई थी जब दिल्ली विकास प्राधिकरण के उप निदेशक ने दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (भूमि व भवन) को पत्र लिखकर कहा था कि प्राधिकरण के विकसित नजुल भूमि नियम-1981 के मुताबिक दिल्ली विकास प्राधिकरण ने तैमूर नगर में पुलिस स्टेशन व पुलिस कर्मियों के आवास निर्माण के लिए 31,600 वर्ग मीटर भूमि पट्टे पर आवंटित की थी। इसके लिए प्राधिकरण ने दिल्ली पुलिस से उस वक्त तीन करोड़, 43 लाख, 56 हजार 468 रुपये की राशि भी पट्टा मूल्य के रूप में वसूली थी। लेकिन अभी तक इस बाबत कागजी खानापूर्ति नहीं हो पाई है और बांग्लादेशियों ने इस भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। कालक्रम में इन बांग्लादेशियों के द्वारा वहां स्थाई निर्माण भी कर लिए गए।

हालांकि इस स्लम को खाली करवाने के लिए दिल्ली पुलिस के द्वारा कागजी घोड़े जरूर दौड़ाए जाते रहे हैं। दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (भूमि व भवन) की ओर से 28 अप्रैल 2018 को लिखे पत्र में उक्त भूमि पर अवैध झुग्गियों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की गई थी। कहा गया था कि दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा उक्त भूमि को दिल्ली पुलिस को सुपुर्द करते वक्त (30 दिसंबर 2008) दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड के द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक उक्त भूमि पर 952 झुग्गियां मौजूद थीं लेकिन अब बोर्ड की ओर से वहां 1,484 झुग्गियों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। इन बढ़ती झुग्गियों की संख्या को लेकर पुलिस की ओर से एक जांच भी करवाई गई थी। जांच में शामिल पुलिस कर्मियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अभी तक कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध निर्माण करवाया जा रहा है। यह कार्य पुलिस की टीम के समक्ष भी किया जा रहा था। न्यू फ्रैंड्स कालनी पुलिस स्टेशन में प्रवृष्टि संख्या-32 ए, 04 अक्टूबर 2017 को दर्ज करवाई गई थी। दिल्ली पुलिस की लिखे उक्त पत्र के लगभग पांच महीने बाद ही उमेश कुमार के भाई रुपेश कुमार ‘तैमूरी ताकत’ के शिकार बने। उनकी हत्या में शामिल अपराधियों ने स्वीकार किया था कि वे तैमूर नगर स्लम में ड्रग्स लेने आए थे। दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार इलाके के एक हत्या मामले में आरोपियों ने कहा था कि उसने पहले तैमूर नगर के स्लम इलाके से ड्रग्स लेकर खाने के बाद कत्ल को अंजाम दिया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में ड्रग्स का कारोबार करने वाले लोग का जुड़ाव कहीं न कहीं से तैमूर नगर से है। लेकिन इन सभी कागजी कार्यवाहियों के बीच तैमूर नगर की ‘तैमूरी ताकत’ ने दिल्ली सरकार व केंद्र सरकरा को झुकाते हुए यहां स्लम में रहने वाले लोगों के आवास के लिए स्थाई इंतजाम भी कर दिया है। हालांकि इस व्यवस्था को करने वक्त पूर्व सांसद परवेज हाशमी की अर्जी को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया जिन्होंने कहा था कि तैमूर नगर स्लम इलाके बांग्लादेशी बसे हुए हैं। इसकी जांच दिल्ली पुलिस ने नहीं की। हालांकि दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड ने इनके लिए 2014-15 के दौरान ही दिल्ली स्थित द्वारका में μलैटों का निर्माण कर दिया है। लेकिन अधूरी कागजी खानापूर्ति व दिल्ली पुलिस की लोलुपता के चलते तैमूर नगर से तैमूरी ताकत खिसकने का नाम ही नहीं ले रही।
इन लोगों को तैमूर नगर से द्वारका स्थानांतरित करने के लिए पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने 2012 के दौरान दिल्ली पुलिस के आयुक्त को भी लिखा था। दिल्ली पुलिस ने इसके जवाब में कहा था कि इस मामले में सभी समस्याओं का निवारण कर लिया गया है लेकिन अभी तक उन्हें आवास आवंटित क्यों नहीं किया गया, इसका जवाब कोई भी देने के लिए तैयार नहीं है। दिल्ली पुलिस के उपायुक्त चिनमय बिश्वाल न तो किसी से मिलना चाहते न ही दूरभाष पर उपलब्ध होते हैं। दिल्ली सरकार के अधिकारियों का तो क्या कहना, उनके सचिवालय में अधिकारियों से मिलने के लिए पत्रकारों को गेट पर कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। लेकिन उमेश कुमार तो नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का बाट जोह रही है जो ‘तैमूरी ताकत’ से उन्हें और उनके पड़ोस में रहने वाले लोगों को निजात दिला सके। तैमूर नगर के कई लोगों ने इस संवाददाता को बताया कि अगले लोकसभा चुनाव में उनका चुनावी मुद्दा तैमूरी ताकत को यहां से हटाने का ही होगा। जो राजनीतिक पार्टी तैमूर नगर स्लम को खाली करवाने में उनकी मदद करेगी, वे उसी पार्टी के लिए आगामी चुनाव में मतदान करेंगे।
इससे पूर्व भी तैमूर नगर कपासिया मोहल्ला विकास समिति के पदाधिकारियों ने स्लम में चल रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ दिल्ली के उप राज्यपाल को पत्र लिखा था। इस पत्र में भी स्लम में बंग्लादेसियों के मौजू होने की बात की गई थी। समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने भी इस संवाददाता से कहा कि उनके लिए अब चुनाव में स्लम को खाली करवाना ही मुद्दा होगा।

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