दिल्ली में अयोध्या-दर्शन

भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रांगण में साकार कर दिया गया। जिन लोगों ने अयोध्या को नहीं देखा था वह यहां आकर इस पुण्य धाम के आभाषी दर्शन कर रहे थे ।

जो रोम-रोम में बसी है वही अयोध्या है। अयोध्या की तरह हमारी देह भी है। जिसके रोम-रोम में प्रभु श्रीराम विद्यमान हैं। अयोध्या का जब विचार करते हैं तो राम का विचार स्वयं मन में आ जाता है। जब राम का विचार आता है तो भारत का विचार आता है क्योंकि भारत का पहला शब्द राम है। अयोध्या की रीति आज एक दो दिनों की नहीं है ये रीति राजा रघु से चली आ रही है। ये राजा रघु की अयोध्या है। अयोध्या ऐसी है जो आवश्यकता पड़ने पर देवताओं की भी रक्षा करती रही है। बिना अयोध्या को जाने भारत को जाना नहीं जा सकता। राम खुद में एक संस्कृति हैं। अयोध्या धर्म की रक्षा करती है। वह व्यवस्था मूलक है। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में तीन दिनों तक चले अयोध्या पर्व में यही कहा।
पहले दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा ‘जिसे जीता न जा सके वो अयोध्या है। लेकिन कुछ दु:साहसी अभी भी उससे लड़ रहे हैं जिसमें उनको विजय नहीं मिलेगी। हमारा दुर्भाग्य है कि जिससे लड़ा नहीं जा सकता आज उसी से पूरी लड़ाई हो रही है। अयोध्या के इर्द गिर्द 151 ऐसे स्थल हैं जो बेहद पवित्र हैं लेकिन लोगों को इनकी जानकारी नहीं है। इन स्थानों के विषय में देश और दिल्ली के लोगों को जानने की जरूरत है।’
कलाकेंद्र के प्रांगण में भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या को साकार कर दिया गया। जिन लोगों ने अयोध्या को नहीं देखा था वह यहां आकर इस पुण्य धाम के आभाषी दर्शन कर रहे थे। आईजीएनसीए पौराणिक स्थलों का गवाह बन रहा था। अयोध्या पर्व का मुख्य आकर्षण 275 किलोमीटर परिधि में फैली रामनगरी की शास्त्रीय सीमा 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र की प्रमुख धरोहरें रहीं। इस परिधि में अयोध्या, गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी आदि जिले आते हैं। यहां रामगाथा की प्रमुख स्मृतियां अब भी जीवंत हैं। सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व की धरोहरों को प्रदर्शनी के माध्यम से दिल्लीवासी जान रहे थे।
प्रदर्शनी में ऐसे कई मंदिर और पौराणिक स्थलों के चित्र लगाए गये जिनके विषय में पुराणों में जिक्र जरूर मिलता है लेकिन वह स्थल अयोध्या में अवस्थित हैं ये कम ही लोग जानते हैं जैसे , शौनर ऋषि आश्रम, पारशर ऋषि आश्रम कपिल मुनि आश्रम, नरहरि दास आश्रम, गहना आश्रम,सूर्य कुंड,आस्तिक मुनि आश्रम, राम रेखा और वाराह मंदिर जैसे सैंकड़ों धार्मिक स्थल यहां स्थित है।

पर्व में क्या रहा खास
■ बड़ी अयोध्या को दर्शाने के लिए 84 कोसी परिक्रमा पर खास प्रदर्शनी लगाई।
■ अयोध्या की 84 कोसी परिधि में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की स्थलों को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
■ इन स्थलों में मखमौड़ा धाम जो पुत्र कामेश यज्ञ स्थल के नाम से मशहूर है, श्रृंगी ऋषि आश्रम, जंबू द्वीप प्रमुख हैं।
■ 84 कोसी परिक्रमा अयोध्या के आसपास के चार जिलों को जोड़ता है, इसमें अंबेडकर नगर, बाराबंकी, गौंडा व बस्ती शामिल है।
■ अयोध्या पर्व में खासतौर पर सीता रसोई की व्यवस्था की गई थी। जिसमें अयोध्या नगरी के जायके रखें गए ।
■ तीन दिवसीय इस पर्व में लोग अयोध्या नगरी के जायकों का लुत्फ उठाया।

पर्व के आयोजक अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह ने कहा ‘जिस मकसद के लिए दिल्ली में यह पर्व आयोजित किया गया, उसमें हम सफल हुए हैं। इसका मकसद दिल्ली वासियों को अयोध्या व 84 कोसी के उस बृहद आकार में बसे 151 धार्मिक स्थानों से परिचित कराना था, जो अभी तक अंजान बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस पर्व का आयोजन आगे भी कराने के साथ अयोध्या की संस्कृति, समाज, खान-पान, अध्यात्म व ऐतिहासिकता से देशवासियों को परिचित कराने के लिए यह पर्व अन्य राज्यों के राजधानियों में भी आयोजित करने की तैयारी है।’
अयोध्या से कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा ‘एक तरफ मोदी एक तरफ योगी अब मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब होगा? हम न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन राम सबके ऊपर हैं। सबपर राम तपस्वी राजा। अयोध्या विश्व की सबसे प्राचीन नगरी है। मेरा अनुरोध है कि दिल्ली में ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित किया जाए जिससे अयोध्या को लेकर युवाओं के मन मे विस्तार मिले।’
विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय सचिव चंपत राय ने कहा ‘राम का मतलब अयोध्या और अयोध्या का मतलब भारत। भारत और राम को अलग नहीं किया जा सकता। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भी यही है कि अयोध्या के महात्म्य को देश भर के सामने लाया जाए।’
अयोध्या पर्व के दूसरे दिन की शुरूआत रामचरित मानस के पाठ के साथ हुई। इस मौके पर राम के विभिन्न आयाम और रामराज्य पर विशेष रूप से विचार विमर्श किया गया। गांधी के रामराज्य पर आयोजित संवाद की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार बनवारी जी ने की व संवाद में आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय, वरिष्ठ पत्रकार जवाहरलाल कौल, वरिष्ठ सांसद लल्लू सिंह ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि ‘आज गांधी के राम राज्य की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। गांधी ने जिस रामराज्य की परिकल्पना की थी वो अब तक साकार नहीं हुआ है। उनकी परिकल्पना को उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी जवाहरलाल नेहरू ने न ही साकार होने दिया और न ही जनमानस की भावनाओं की कद्र की। उलटे अंग्रेजी कानून को ही लागू कर दिया। इससे कलेक्टरी व्यवस्था आज इतनी हावी हो गई है कि लोग परेशान हैं। न्यायलय में 5 से 6 करोड़ मामले लंबित हैं। मौजूदा शासन को देखते हुए रामराज्य की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है।’
इस मौके पर अध्यक्ष बनवारीजी ने कहा कि ‘रामराज्य बहुत विस्तृत है। निति के रूप में और पराक्रम के रूप में अयोध्या समृति के रूप में हमेशा हमारे जहन में रही है। गांधी जी ने हमेशा सुखी भारत का सपना देखा और समाजवाद की तरफ झुकाव रहा। इस दिशा में सभी देश काम कर रहे हैं फिर चाहे रूस हो या फिर चीन सब अपने सीमित साधनों में तरक्की कर रहे हैं तो हमारा देश क्यों नही? इसलिए रामराज्य का सपना अब सभी को देखना चाहिए और इस दिशा में काम करना चाहिए।’
कार्यक्रम में इस बात का ध्यान रखा गया था कि यहां आने वाले लोग इस बात को भूल जाएं कि वह दिल्ली में मौजूद हैं। यही वजह थी कि कालाकेंद्र में लोक संस्कृति से जुड़े गायन, खावज वादन, शास्त्रीय गायन, के साथ प्रख्यात कलाकार शेखर सुमन का तुलसी पर एकल मंचन रामचरित्र मानस पाठ, अयोध्या शैली में राम की स्तुति, फरवाही नृत्य की प्रस्तुति, गांधी का रामराज्य विषयक गोष्ठी, कालूराम बामनिया की सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘कबीर के राम’ समेत कई कार्यक्रम इस पर्व में आकर्षण का केंद्र रहे।
तीसरे और अंतिम दिन भव्य यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे रेल राज्य मंत्री और वरिष्ठ सांसद मनोज सिन्हा ने कहा ‘लल्लू सिंह के इस प्रयास की जितनी सराहना की जाए वह कम है। हरि अनंत हरि कथा अनंता प्रभु के बारे में मैं बोलूं ये कम है। आने वाले दिनों में ये आयोजन मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम के आयोजक लल्लू सिंह सच्चे राम भक्त हैं जिसको वह समय-समय पर साबित करते रहे हैं।’

 

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