दिल्ली देहात वालों से छल

किसानों को ठगना कोई केजरीवाल सरकार से सीखे। इस सरकार ने किसानों को मूर्ख बनाने का ताना-बाना बुन रखा है। वह इतना पुख्ता है कि पूरा दिल्ली देहात उसमें फंसा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता मीना डबास कहती हैं, ‘चुनाव के समय आम आदमी पार्टी ने दिल्ली देहात के लोगों से वादा किया था कि उन्हें धारा 81 से आजाद कर देंगे’। यह धारा दिल्ली देहात की भारी समस्या है। इसके तहत अगर कोई किसान खेती वाली जमीन पर खेती-बाड़ी के अलावा कुछ और काम करता है तो सरकार उसकी जमीन पर कब्जा कर लेती है। फिर उसे ग्रामसभा के हवाले कर देती है। दिल्ली देहात के लोग चाहते हैं कि इस धारा को खत्म किया जाए। आम आदमी पार्टी ने जनता की इस मांग को 2015 के विधान सभा चुनाव में भुनाया। उनके वादों में दिल्ली देहात की जनता फंस गई।

उसने आम आदमी पार्टी को सत्ता तश्तरी में सजा कर दे दी। सत्ता मिलते ही अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली देहात के लोगों को ठगने का काम शुरू कर दिया। धारा से 81 से आजादी की बात तो दूर, केजरीवाल सरकार ने इस संदर्भ में बात करना बंद कर दिया। वह ऐसा व्यवहार करनी लगी जैसे धारा 81 को जानती ही नहीं। दिल्ली देहात के लोग इससे हतप्रभ हंै। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि जो सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता की बात करती है वो किसानों को कैसे ठग सकती है? पर यह हो रहा है। किसानों को लूटा जा रहा है। उनकी जमीन पर केजरीवाल सरकार जबरन कब्जा कर रही है। इसके लिए सरकार धारा 81 का सहारा ले रही है।

उसी का बहाना लेकर, सरकार कह देती है कि फलां जमीन पर खेती से इतर काम हो रहा है। इस वजह वह जमीन ग्रामसभा के पास चली जाती है। उस पर सरकारी गिरोह भूमाफिया कब्जा कर लेते हैं। फिर वहां किसी सरकारी योजना का बोर्ड लटका देते हैं। यह सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए होता है ताकि लोगों को यकीन हो जाए कि जमीन सरकार ने ली है। जो लोग सरकार प्रायोजित इस गिरोह के फेरे में नहीं पड़ते हैं, वे कोर्ट जाते हैं। कोर्ट में इस तरह के लाखों मामले पड़े हैं जहां किसान अपनी जमीन के लिए सरकार से लड़ रहा है। और ‘सरकार बहादुर’ उसे भूमाफिया के हवाले कर रही है। दिल्ली देहात में यह खेल दशकों से चल रहा है। इसी वजह से कांग्रेस सरकार से ऊब गए थे। उन्हें आम आदमी पार्टी में आशा की किरण दिखी थी। उन्हें लगा था कि धारा 81 से मुक्ति यह पार्टी दिला देगी। कारण, आम आदमी पार्टी खुद को ईमानदारी का प्रतीक बताती है। उस झांसे में दिल्ली देहात के लोग फंस गए। उन्होंने आम आदमी पार्टी को वोट, धारा 81 से मुक्ति के लिए दिया था। पर हो उलटा रहा है, मुक्ति के बजाए फंदा कसता जा रहा है।

“चुनाव के समय आम आदमी पार्टी ने दिल्ली देहात के लोगों से वादा किया था कि उन्हें धारा 81 से आजाद कर देंगे’। यह धारा दिल्ली देहात की भारी समस्या है। इसके तहत अगर कोई किसान खेती वाली जमीन पर खेती-बाड़ी के अलावा कुछ और काम करता है तो सरकार उसकी जमीन पर कब्जा कर लेती है। फिर उसे ग्रामसभा के हवाले कर देती है।”

उससे किसान परेशान है। लेकिन केजरीवाल सरकार कंबल ओढ़कर सो रही है। उसे दिल्ली देहात से कोई मतलब नहीं रह गया है। चुनाव आने पर वह एक बार फिर धारा 81 को उछालेगी। लोगों की भावनाओं से खेलेगी। लोकसभा चुनाव को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने खेल शुरू कर दिया है। सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहना शुरू कर दिया है कि आप हमें वोट दीजिए, हम आपको धारा 81 से मुक्ति दिलाएगा। मीना कहती हैं कि दिल्ली देहात की भोली भाली जनता को ठगने के लिए केजरीवाल सरकार ने फिर से कवायद शुरू कर दी है। धारा 81 तो महज एक मिसाल है। असल खेल तो दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड में हुआ है। शहरी गांवों के विकास के नाम पर 2017 में केजरीवाल सरकार ने इसका गठन किया था। बजट 600 करोड़ रुपये तय हुआ। इससे दिल्ली देहात के लोगों को लगा कि केजरीवाल सरकार उनका काया पलट कर देगी। उनकी काया तो नहीं पलटी, पर 600 करोड़ रुपये कहां गए? उसका किस्सा दिलचस्प है। उससे पता चलता है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली देहात को लेकर कितनी लापरवाह है।

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