… ताकि अंधेरा कायम रहे

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के दूरस्थ गांव लेइसांग में पिछले साल बिजली पहुंच गई। लेइसांगवासियों के साथ पूरा देश खुशी से झूम उठा। कारण, इस गांव में बल्ब जलने के साथ ही देश के सभी गांवों में बिजली पहुंच गयी। केंद्र सरकार की इतनी बड़ी उपलब्धि को उसकी नाक के नीचे दिल्ली की केजरीवाल सरकार पलीता लगाने में जुटी है। दिल्ली सरकार राजधानी को अनइलेक्ट्रीफाइड एरिया (अविद्युतीकृत क्षेत्र) घोषित कर रही है।
केजरीवाल सरकार ने पिछले दो सालों में एक-दो कॉलोनियों को नहीं बल्कि सैकड़ों कॉलोनी को अविद्युतीकृत घोषित कर दिया। इससे पूरे देश को विद्युतीकृत करने की केंद्र सरकार की मुहिम को झटका लगा है। मुुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आंदोलन से चुनावी मैदान में उतरते ही वादों का अंबार लगा दिया था। उन्हें अपने पहले चुनाव में ही ‘बिजली हाफ, पानी माफ’ जैसे कई नारे गढ़े। पहली बार कांग्रेस के समर्थन से 49 दिन की सरकार बनाई और अपने वादों में संशोधन करना शुरू कर दिया। बिजली हाफ के नाम पर केवल 200 और 400 यूनिट बिजली खपत करने वालों के बिल आधे हुए। चार सौ से एक यूनिट भी ज्यादा होते ही उक्त उपभोक्ता को महंगे दर पर पूरा बिल देना पड़ता है।

दिल्ली के सैकड़ों इलाकों को अविद्युतीकृत क्षेत्र घोषित करने के पीछे दिल्ली सरकार और टाटा पावर-डीडीएल कंपनी का तर्क है कि वैसे क्षेत्रों को ही अविद्युतीकृत घोषित किया गया है, जहां बिजली नहीं पहुंची है। उन क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए लाइन, पोल, तार और ट्रांसफार्मर आदि लगाने होंगे। लिहाजा उन क्षेत्रों के नए उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसा लिया जा रहा है। उधर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार तक में सरकार अपने पैसों से कॉलोनियों और गांवों में बिजली पहुंचा रही है।…

दूसरे चुनाव में एतिहासिक जीत के बाद केजरीवाल ने अंदरखाने उपभोक्ताओं के पॉकेट को खाली करना शुरू कर दिया। इसमें सबसे पहला काम केजरीवाल सरकार ने उत्तरी और उत्तर पश्चिमी दिल्ली के सौ से ज्यादा कॉलोनी को अविद्युतीकृत घोषित कर दिया। उत्तरी और उत्तर पश्चिमी दिल्ली को बिजली वितरण करने वाली टाटा पावर-डीडीएल कपंनी ने यह कदम केजरीवाल सरकार से मंजूरी के बाद उठाया है। टाटा पावर-डीडीएल दिल्ली के केवल 30 फीसद क्षेत्रों में बिजली वितरण करती है। दिल्ली के शेष क्षेत्रों में बीएसईएस (यमुना) और बीएसईएस (राजधानी) को बिजली वितरण का काम मिला हुआ है।

अरविंद केजरीवाल को ‘पलटी मारने’ की पुरानी आदत है। कसम खाकर भी वे मुकर जाते हैं। दिल्ली के आम उपभोक्ता को सरकार परेशान कर रही है। बिजली हाफ के बहाने कंपनी को दूसरे रास्ते से लाभ पहुंचा रही है।

विजेंद्र गुप्ता, प्रतिपक्ष नेता दिल्ली विधानसभा

केजरीवाल ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है। दिल्ली में अविद्युतीकृत क्षेत्र कलंक से कम नहीं है। हर घर में बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है।

अरविंदर सिंह लवली, कार्यकारी अध्यक्ष दिल्ली कांग्रेस

. . . हमने इस मसले को विधानसभा में उठाया है। सरकार इस पर काम कर रही है। ऐसा साजिश के तहत किया गया लगता है।

संजीव झा, विधायक आम आदमी पार्टी

सूत्र बताते हैं कि इन दोनों कंपनियों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में कई कॉलोनी को अविद्युतीकृत घोषित किया हुआ है। ऐसा भी नहीं है कि जिन कॉलोनियों को सरकार ने अविद्युतीकृत घोषित किया, वहां बिजली नहीं है। विद्युतीकृत कॉलोनियों को भी केजरीवाल सरकार ने अविद्युतीकृत बना दिया। इसके लिए कॉलोनी को अलग-अलग क्षेत्रों में बांट दिया गया। केवल उत्तरी और उत्तर पश्चिमी दिल्ली के एक सौ से ज्यादा कॉलानियों में 855 क्षेत्रों को अविद्युतीकृत घोषित किया गया है। इनमें से ज्यादातर कॉलोनियों में बिजली की लाइन पहले से मौजूद है। इसके बावजूद केजरीवाल सरकार ने ऐसा किया है।

‘सौभाग्य’ से भी वंचित
पंडित दीनदलाय उपाध्याय के 101वें जन्मदिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नया लक्ष्य ‘सहज बिजली हर घर योजना’ (सौभाग्य) तय किया है। इस लक्ष्य के तहत देश के करीब 4 करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाना है। इसमें शहरी और ग्रामीण घर भी शामिल हैं।
सौभाग्य योजना पर कुल 16,320 करोड़ खर्च होने की उम्मीद है। इसमें केंद्र सरकार 12,320 करोड़ की सहायता देगी। ग्रामीण परिवारों के लिए 14,025 करोड़ के बजट का प्रावधान है, जिसमें 10,587 करोड़ केंद्र देगी। शहरी क्षेत्र के परिवारों के लिए 2,296 करोड़ खर्च होने की उम्मीद है। इसमें से 1,732 करोड़ सरकार देगी।
इतना ही नहीं, इस योजना के तहत लोगों को मुμत में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। यह लाभ 2011 की जनगणना के आधार पर आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े परिवारों को मिलेगा। जो परिवार पिछड़े नहीं हैं और उनके यहां बिजली कनेक्शन नहीं है। उन्हें भी मात्र 500 रुपये में बिजली का कनेक्शन दिया जाएगा। यह रकम भी यदि उपभोक्ता चाहे तो बिल के साथ 10 किस्तों में दे सकता है। सौभाग्य योजना अरविंद केजरीवाल सरकार के लिए आईना है। मगर केजरीवाल इस आईने को देख नहीं रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल सत्ता में आने के पहले बिजली कपंनियों का आॅडिट कराने की बात करते थे। क्योंकि दिल्ली की बिजली कंपनियां अपने को नुकसान में बताकर बिजली की दरें बढ़ाने की बात करते थे। सत्ता में आते ही केजरीवाल पलटी मार गए। जिस कंपनी का वे आॅडिट कराने की बात करते थे, उसका आॅडिट कराने के बजाए कॉलानियों को अविद्युतीकृत घोषित कर आम लोगों से मोटा पैसा वसूलने की छूट कंपनी को दे दी। अविद्युतीकृत घोषित वाले क्षेत्र के उपभोक्ताओं से नए कनेक्शन के लिए मोटा पैसा वसूला जा रहा है। पहले नए कनेक्शन के लिए एक केवी के लिए 3600 रुपये और दो केवी के लिए 4200 रुपये लिये जाते थे। वहीं अविद्युतीकृत घोषित क्षेत्र में एक केवी के लिए 8600 रुपये तो 2 केवी के लिए 20,000 हजार रुपये जमा करवाए जा रहे हैं।

अविद्युतीकृत क्षेत्र घोषित करने के पीछे सरकार और कंपनी का तर्क है कि वैसे क्षेत्रों को ही अविद्युतीकृत घोषित किया गया है, जहां बिजली नहीं पहुंच पायी है। उन क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए लाइन, पोल, तार और ट्रांसफार्मर आदि लगाने होंगे। इसलिए उन क्षेत्रों के नए उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई बार चुनावी सभा में ऐलान किया है कि दिल्ली में बिजली सबसे सस्ती है। यह कितनी सस्ती है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि जहां दूसरे प्रदेशों में नए कनेक्शन लगभग मुμत दिया जाता है, वहीं दिल्ली में लोगों को बीस हजार रुपये तक जमा कराने पड़ रहे हैं। एनसीआर के अंतर्गत आने वाला बुलंदशहर की अवैध कॉलोनियों में उत्तर प्रदेश सरकार अपने पैसे से बिजली पहुंचाती है। सिर्फ बुलंदशहर ही नहीं लगभग सभी शहरों के कॉलोनियों में बिजली पहुंचाने के लिए पोल, तार, ट्रांसफार्मर आदि का पैसा लोगों से नहीं लिया जाता। उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार तक में सरकार अपने पैसों से कॉलोनियों और गांवों में बिजली पहुंचा रही है। इन राज्य सरकारों के उलट अपने को आम आदमी कहने वाले अरविंद केजरीवाल इन सबका पैसा आम लोगों के पॉकेट से ही निकाल रहा है। उत्तराखण्ड एन्कलेव निवासी अमित कहते हैं, ‘हमने दो साल पहले ही कनैक्शन के लिए आवेदन किया था। एक साल तक इंतजार करना पड़ा। हमसे 17,200 रुपये जमा करवाए। मीटर लगाने के बाद फिर कंपनी ने जीएसटी के नाम पर 2800 रुपये और लिये हैं। इस तरह मुझसे 2 केवी के लिए बीस हजार रुपये कंपनी ने जमा करवाए।’

उत्तराखण्ड एन्कलेव आरडब्लूए के महासचिव कमलेश्वर पटेल बताते हैं कि दिल्ली सरकार और बिजली कंपनी मिलीभगत कर आमजन के पॉकेट पर डाका डाल रही है। हमारे कॉलोनी में नए कनेक्शन नहीं दिए जा रहे थे। हमने कई बार मुख्यमंत्री, उर्जा मंत्री से लेकर कंपनी तक को शिकायत की। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रांसफार्मर, तार और पोल के लिए ज्यादा पैसा लिया जा रहा है। जबकि हमारे कॉलोनी में कई वर्षों से बिजली है। जिन गलियों में पोल-तार हंै, वहां के लोगों से भी इतनी ही रकम ली गई। इसको लेकर कई सामाजिक संगठनों ने बुराड़ी क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन भी किया। इसके फलस्वरूप बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया। फिर भी दिल्ली सरकार इस पर रोलबैक नहीें कर रही है।

केजरीवाल को केंद्र की मोदी सरकार का विरोध करना है, इसलिए वह उनकी कई योजनाओं को दिल्ली में लागू नहीं कर रही है। यदि केजरीवाल राजनीति से ऊपर उठकर आम लोगों के हित में काम करते तो दिल्ली की जनता को इतना पैसा नहीं देना पड़ता। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को 1,000 दिनों में 18,452 अविद्युतीकृत गांवों में बिजली पहुंचाने का ऐलान किया था। इसके लिए उन्होंने ‘दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना’ शुरू की। 28 अप्रैल 2018 को उनका यह संकल्प पूरा हुआ। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 75,893 करोड़ रुपये आवंटित किये थे। वहीं राजधानी दिल्ली में आम लोगों को केजरीवाल सरकार बिजली नहीं दे पा रही है। बुराड़ी क्षेत्र के निवासी राकेश झा से पूछते हैं तो वह कहते हैं, ‘केजरीवाल ने दिल्ली को लूटने का अड्डा बना दिया है। मेरे घर में आठ साल से बिजली का कनेक्शन है। वर्ष 2016 में एक और कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो बिजली कंपनी ने दो साल तक कनेक्शन नहीं दिया। पिछले साल हमसे दस हजार रुपये लेकर 1 केवी का कनेक्शन दिया। एक ओर जहां केंद्र की योजना 500 रुपये में कनेक्शन दे रही है वहीं दिल्ली सरकार 10-20 हजार रुपये ले रही है। यह लूट नहीं तो क्या है।’

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