स्वच्छ भारत अभियान बना जनांदोलन

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दो अक्टूबर 2019 को मनाये जाने वाले महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष में प्रवेश के साथ ही स्वच्छ भारत अभियान अपने कार्यान्वयन के पांचवें और अंतिम वर्ष में पहुंच गया है। यह अभियान जमीनी स्तर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार का उपयोग करके विशाल जन आंदोलन में बदल गया है जिससे यह एक व्यवहार परिवर्तन का अभियान बन सका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती पर दुनिया के सामने स्वच्छ और स्वस्थ भारत की मजबूत छवि पेश करना है। उनका स्पष्ट मानना है कि तभी भारत को विकसित राष्ट्र माना जाएगा। भारत के लिए स्वच्छता कार्यक्रम कोई नई घटना नहीं है। यह कार्यक्रम 1981 से चलाया जा रहा है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत दावों के साथ स्वच्छ भारत अभियान के जमीनी स्तर पर प्रगति के दावों को कमजोर किया गया है। लेकिन इस अभियान के बारे में केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय का दावा कुछ और ही है।

यही मंत्रालय स्वच्छ भारत अभियान की नोडल एजेंसी है। स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत दो अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालने के कुछ महीनों के भीतर ही की थी। इसका लक्ष्य पूरे देश को पांच वर्ष के भीतर खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त करना था। चार वर्ष बाद जमीनी स्तर पर लोगों के अभियान के नेतृत्व में जबर्दस्त प्रगति देखी गई है। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान की शुरुआत के बाद, भारत का ग्रामीण स्वच्छता कवरेज अक्टूबर 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर अब 95 प्रतिशत हो गया है। इस मिशन के तहत लगभग 8.7 करोड़ घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसके परिणामस्वरूप 25 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों, 529 जिले और 5,09,067 गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है। इस साल की शुरुआत में विश्व बैंक समर्थित परियोजना के तहत राष्ट्रीय वार्षिक ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण (एनएआरएसएस) में पाया गया कि ग्रामीण भारत के घरों में 93.4 प्रतिशत लोग शौचालय का इस्तेमाल करते हैं और इससे पता चलता है कि जमीनी स्तर पर बदलाव हो रहा है। इस सर्वेक्षण में भारत के राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के 6136 गांवों के 92040 परिवारों को शामिल किया गया था। स्वच्छ भारत अभियान दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक वित्त पोषित स्वच्छता कार्यक्रम है। केंद्र और राज्य सरकारों ने इसके लिए एक लाख करोड़ से ज्यादा की रकम आवंटित किए हैं।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत जमीनी स्तर पर व्यवहार परिवर्तन का संचार किया जाता है और राष्ट्रीय स्तर पर मास मीडिया सहायक की भूमिका निभा रहा है। मिसाल के तौर पर अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर और अनुष्का अभिनीत दरवाजा बंद जैसे मास मीडिया अभियान, महिला सशक्तिकरण के संदेश, दो पिट वाले शौचालय और शौचालयों के उपयोग का प्रचार करना। जबकि स्वच्छ भारत अभियान के जमीनी सिपाही स्वच्छग्राही इंटर-पर्सनल कम्युनिकेशन के माध्यम से व्यवहार में बदलाव और बेहतर व्यवहार को बनाए रखने के लिए समुदायों को प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए गांवों में पाइप वाली जलापूर्ति (पीडब्ल्यूएस) के प्रावधान को प्राथमिकता देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत एक नीतिगत निर्णय लिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के हालिया अध्ययन में बताया गया है कि स्वच्छ भारत अभियान 2019 तक 3,00,000 लोगों की जान बचाएगा और इसके बाद भी 1,50,000 लोगों को सालाना बचाया जा सकेगा।

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