मिशेल के बाद अब माल्या, मेहुल…

भारत में विभिन्न मामलों में आरोपित कई लोग लंदन में रह रहे हैं। इनमें बाल व्याभिचार और बलात्कार का दोषी रेमंड वर्ली, मुंबई बमकांड का गुनहगार दाऊद इब्राहिम का साथी टाइगर हनीफ, कैसेट किंग और टी सिरीज के संस्थापक गुलशन कुमार का हत्यारोपित नदीम सैफी, नेवी वार रूम लीक में संलिप्त पूर्व नौसेना अधिकारी रवी शंकरन और आईपीएल घोटाले में शामिल ललित मोदी शामिल है।

गस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले में शामिल क्रिश्चियन मिशेल के बाद अब किंगफिशर एयरलाइन के संस्थापक विजय माल्या को भी जल्द ही भारत लाया जा सकता है। हाल ही में लंदन स्थित वेस्टमिनीस्टर कोर्ट ने माल्या को भारत भेजने की अनुमति दे दी है। प्रिवेंशन आॅफ बनी लांड्रिंग एक्ट के तहत न्यायालय उसे आर्थिक भगोड़ा करार दे चुकी है। इसी के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने माल्या की 1,200 करोड़ की परिसंपत्ति और 11,000 करोड़ रुपये के शेयर को जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है। ईडी विदेशों में भी जहां माल्या की जहां संपत्ति है उसे भी अब जब्त कर सकता है। भारत की 47 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन प्रत्यर्पण का प्रतिशत अभी तक काफी कम है। मोदी सरकार आने के इसमें पहले से ज्यादा तेजी आई है। अभी तक कई दुर्दांत और वांछित अपराधियों को मोदी सरकार भारत वापस लाने में कामयाब रही है। उनमें प्रमुख हैं 2015 में हत्यारोपी जगतार सिंह तारा को थाईलैंड से, हत्यारोपी राजेन्द्र बानाजे मोरक्को से, डॉन छोटा राजन इंडोनेशिया से, भारत के खिलाफ विदेशी भूमि से युद्ध लड़ने के आरोपी अनुप चेतिया बांग्ला देश से, थाई नागरिक विल्ली नारूनारवानिच थाईलैंड से, 2016 में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले अब्दुल वाहिद सिद्दीबावा यूएई से, हत्या करने के आरोपी कुमार कृष्णा पिल्लई सिंगापुर से, हत्या, हत्या की साजिश और दंगे के आरोपी समीर भाई विनुभाई पटेल को यूके से, हत्यारोपी अब्दुल रउफ मर्चेंट को बांग्लादेश से, 2017 में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले सुल्तान अब्बुबकर सिंगापुर से, 2018 में बैंक घोटाले का दोषी रोमानियन नागरिक लोनुट एक्सेंलडर मैरिनोलु निकारगुआ से, आंतकवादी मोहम्मद फारूक यासीन मंसूर उर्फ फारूक टकला यूईए से, धोखाधड़ी , आपराधिक साजिश के आरोपी विनय मित्तल इंडोनेशिया से और मोहम्मद याह्या बहरिन से तथा दो महीने पहले क्रिश्चयन मिशेल यूईए से।
देर-सबेर नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और माल्या मिशेल की तरह भारत लाये जाने वाले हैं। अगस्त 2018 में ही सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी अलग अलग इंग्लैंड के सक्षम अधिकारियों के समक्ष नीरव मोदी के प्रत्यर्पण कानूनी रूप से अनुरोध कर चुके हैं। ब्रिटेन के अधिकारियों ने ही भारत सरकार को यह सूचना दी है कि नीरव मोदी उनके यहां रह रहा है। अब जबकि नीरव मोदी का पता चल चुका है तो ईडी जल्दी ही विदेश मंत्रालय के जरिये लेटर्स आफ रोगेट्रीज जारी करने वाला है। इसके बाद नीरव मोदी की विदेश में स्थित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

हेडली की भी बारी!
पाकिस्तान में जन्मे अमरीकी आतंकवादी डेविड कोलमेन हेडली को भारत लाने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। विदेश राज्यमंत्री जेनरल वीके सिंह ने हाल ही में यह जानकारी दी है कि हेडली को भारत लाने के लिए अमरीकी प्रशासन से अंतिम दौर की बात चल रही है। हेडली का यह प्रत्यर्पण भारत-अमरीका के बीच 1997 में हुई प्रत्यर्पण संधि के अनुरूप होगा। भारतीय जांच एजेंसियों की एक टीम हाल ही में अमरीका प्रत्यर्पण की तैयारी के लिए गई थी।
कोलमेन हेडली 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले का प्रमुख साजिशकर्ता अभियुक्त हंै। पाकिस्तान प्रायोजित इस हमले में देश-विदेश के 168 लोग मारे गए थे। इस समय वह अमरीका की जेल में है। कहा जाता है कि उसने मुंबई में हमले की तैयरी के लिए अमरीका से पाकिस्तान की लगातार यात्रा की और वहां लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से ट्रेनिंग ली। वह लश्कर के कहने पर मुंबई हमले की तैयारी के लिए पांच बार भारत और मुंबई आया। उसे अमरीकी पुलिस ने शिकागो एयरपोर्ट से अक्टूबर 2009 में पाकिस्तान जाते समय गिरμतार किया। हेडली इस समय सरकारी गवाह बना हुआ है और वह अमरीका की जेल में में 35 साल की सजा काट रहा है। 

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के भारत के अनुरोध को ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार नहीं किया है। मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर भी सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। 13,000 करोड़ रुपये का पीएनबी घोटाला कर देश से भागने वाले मेहुल चोकसी और नीरव मोदी भी भारत आने को मजबूर होंगे। भारत के कहने पर इंटरपोल ने पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है। चौकसी अपने बचाव के लिए भारी पैसा देकर एंटिगुआ की नागरिकता ले चुका है। लेकिन उसके भी प्रत्यर्पण के लिए विधिवत अनुरोध विदेश मंत्रालय कर चुका है।

जाकिर नाईक का भी है इंतजार

मुस्लिम धर्म प्रचारक जाकिर नाईक को भारत लाने की पूरी कोशिश की जा रही है। जाकिर नाईक इस समय मलेशिया में रह रहा है और उसने वहां की नागरिकता भी ले ही है। जाकिर नाईक पर मनी लॉड्रिग और आतंकवाद को प्रोत्साहित करने का आरोप है। उसे बांग्लादेश में जुलाई 2016 में हुए गुलशन कैफे पर आतंकवादी हमले के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है। इस हमले के आरोप में गिरμतार आतंकियों में से कम से दो ने यह कहा है कि उन्होंने जाकिर नाईक की तकरीर से प्रभावित होकर आंतक का रास्ता चुना। भारतीय अधिकारी लगातार मलेशिया से जाकिर नाईक को भारत लाने के लिए प्रयासरत हैं। भारत और मलेशिया के बीच भी प्रत्यर्पण संधि है। 

सरकार ने न सिर्फ माल्या को भारत लाने की सफल कोशिश की है, बल्कि कई और ऐसे अपराधी या आरोपी हैं जिनकी तलाश पुलिस या जांच एजेंसियों को थी, उन्हें भी भारत लाने में सरकार सफल रही है। उनमें से ही एक बड़ा नाम क्रिश्चेन मिशेल का है। इस ब्रिटिश नागरिक पर अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद में गांधी परिवार के साथ साठगांठ कर घोटाला करने का आरोप है। अगस्ता वेस्टलैंड समेत कई हथियार सौदे में दलाली खाने और भारतीय राजनैतिक शख्सियतों को मोटी रिश्वत देकर ‘डील’ फाइनल करने वाला नवंबर मिशेल में ही दुबई से भारत लाया गया। वह सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों को यह तोते की तरह बताने लगा है कि उसने कथित ‘इटालियन लेडी और आरजी’ को भरोसे में लेकर वे जानकारियां भी हासिल कर लेता था जिसे आम तौर पर कैबिनेट में मंत्री भी नहीं जानते थे। क्रिश्चियन मिशेल नाम के इस व्यक्ति ने न सिर्फ हेलीकॉप्टर डील में भ्रष्टाचार का सूत्रधार बना, बल्कि उसके अलावा भी कई डील कराने में वह मुख्य सौदेबाज रहा। अगस्ता खरीदने की यह डील 2010 में हुई थी।
विजय माल्या पर भारतीय बैंकों से 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। लंदन कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताते हुए सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा- हमें माल्या के प्रत्यर्पण की पूरी आशा थी, क्योंकि इस मामले में हमारी तैयारी बहुत अच्छी थी। कानूनी रूप से हम ज्यादा मजबूत थे। इसलिए हमें पूरा विश्वास था कि वेस्टमिनिस्टर कोर्ट विजय माल्या के प्रत्यर्पण की इजाजत दे देगी। दरअसल सीबीआई के लिए यह मामला उनकी साख बचाने का मामला था। सीबीआई पर ही यह आरोप लगा था कि लुकआउट नोटिस के बावजूद विजय माल्या को भारत से भागने का अवसर दिया गया। सीबीआई के बड़े अधिकारियों पर लापारवाही बरतने का इल्जाम लगा था।
विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण का यह मामला केंद्र सरकार के लिए भी नाक का सवाल बना हुआ है। विपक्ष यह आरोप चस्पा करने की कोशिश कर रहा था कि माल्या, नीरव मोदी और ललित मोदी को भगाने में केंद्र सरकार का हाथ है। खासकर कांग्रेस इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी पर यह कह कर निशाना साध रही थी कि करोड़ों के घोटाले कर देश छोड़ने वाले मोदी के दोस्त हैं। लेकिन अब उसी कांग्रेस की बोलती बंद हो गई है।
अब विजय माल्या मिन्नतें कर रहा है कि बैंक उससे पैसे ले ले। लेकिन एजेंसियों का कहना है कि अब सिर्फ बात पैसों की नहीं है। उसने कई आपराधिक काम किये हैं इसलिए उसे लाकर मुकदमा तो चलाया ही जाएगा। लंदन से उसे भारत लाने का प्रयास पिछले साल फरवरी से हो रहा है जब दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाईकमीशन को औपचारिक निवेदन पत्र दिया गया था। यह पत्र 1992 में भारत और ब्रिटेन के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत दिया गया था। माल्या के प्रत्यर्पण का यह मामला केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि इसलिए भी है कि संधि के 26 साल के समय में ब्रिटेन से भारत लाया जाने वाला विजय माल्या सिर्फ दूसरा आरोपी होगा। इसके पहले इंग्लैड से समीरभाई वीणू भाई पटेल नाम के व्यक्ति को भारत लाया जा सका है। पटेल 2002 के गुजरात दंगे का अभियुक्त था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here