पृथ्वी प्लेनेट नहीं, हमारी मां है: सिन्हा

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‘‘हमारे प्रधानमंत्री स्वयं क्लाइमेट चेंज नहीं,
बल्कि क्लाइमेट जस्टिस की बात करते हैं।
हमारी परंपरा और तीर्थ भी इस बात को
इंगित करते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि प्रकृति
को लेकर युगांधर ने जो चेतना दिखाई है,
वह संदेश प्रदेश और फिर देश भर में फैले।’’
पर्यावरण संरक्षण के एक कार्यक्रम में हिस्सा
लेते हुए केंद्रीय संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा
ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने
पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। अगर
विचारशील लोगों का समूह इस दिशा में
प्रयास करेगा तो निश्चय ही उसका फल अच्छा
आएगा। सिन्हा पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में
रखकर मथुरा में आयोजित ‘‘युगांधर गौरव
समारोह’’ में बोल रहे थे। युगांधर संस्था ने
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संयुक्त
राष्ट्र की ओर से हाल ही में प्रदान किए गए
‘‘चैम्पियन आॅफ द अर्थ’’ पुरस्कार के संदर्भ
में आयोजित किया था। कार्यक्रम में मथुरा के
गणमान्य नागरिक और युवा उपस्थित थे।
पर्यावरण से मानव संबंध को स्पष्ट करते
हुए मनोज सिन्हा ने कहा, ‘‘पृथ्वी को प्लेनेट
मानने वाले दूसरे लोग हैं। हम तो उसे मां
मानते हैं। हमारे सभी कार्यक्रम भूमि पूजन
के साथ शुरू होते हैं। हमारी सरकार भूमि
से लेकर आसमान तक पर्यावरण को ध्यान
में रखकर कार्य कर रही है।’’ कार्यक्रम की
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर
राय ने कहा कि ‘युगांधर की कोशिश ब्रज
भूमि से एक नई शुरूआत होगी। प्रधानमंत्री
को मिले पुरस्कार को निमित्त बनाकर यह
कार्यक्रम किया जा रहा है। हम काम निमित्त
बनाकर ही करते हैं। कृष्ण भी निमित्त बनकर
आए और पूरा महाभारत रचा।’ अपनी बात को
विस्तार देते हुए राय ने कहा, ‘‘2014 के बाद
मोदी भी कई चीजों के निमित्त बनकर उभरे।
वे नेहरू के समान नहीं हैं, जिन्हें भारत को
खोजने की जरूरत पड़े। मोदी तो भारतीय
संस्कृति, समाज और इसके इतिहास से
पूरी तरह से जुड़े हुए हैं।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी को धरतीपुत्र की संज्ञा दी। साथ
ही युगांधर को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में
लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी शुभकामना
भी दी।
इस अवसर पर ‘‘उत्तर प्रदेश तीर्थ ब्रज
विकास परिषद’’ के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र
ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि
पर्यावरण बचाने के लिए यह सभा आयोजित
हुई। अक्सर बड़ी चर्चा होती है- पृथ्वी बचाओ,
पर्यावरण बचाओ। लेकिन मैं समझता हूं कि
हम पृथ्वी को बचाने की गलतफहमी में हैं। सच
यह है कि हम खुद को बचाने निकले हैं। यह
ध्यान रहे कि हमें स्वयं को बचाना है।
इस अवसर पर पर्यावरण के क्षेत्र में अपना
योगदान देने के लिए 20 छात्र-छात्राओं को
बीसी राय स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया
गया। इन छात्रों ने एक दिन पहले गोवर्धन में
आयोजित पर्यावरण हितैषी रैली में भाग लिया
था। कार्यक्रम स्थल पर प्रकृति को ध्यान मे
रखकर एक प्रदर्शनी भी लगी थी। स्वागत
कार्यक्रम में लोक कलाकार ओमप्रकाश
डांगुर ने नाक से शहनाई बजाई, जिससे लोग
प्रभावित हुए।

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