पंजाब में दहशतगर्दी आईएसआई की शह

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पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन पंजाब में फिर से पैर पसारने के लिए सक्रिय हो गए हैं। अमृतसर जिले के अदलीवाल गांव के निरंकारी भवन पर हुए हमले में तीन की मौत हो गयी। बीस लोग जख्मी हुए हैं। हमले के समय निरंकारी भवन में 250 से ज्यादा लोग प्रवचन सुन रहे थे। निरंकारी भवन पर ग्रेनेड हमला करने के आरोपी बिक्रमजीत सिंह और अवतार सिंह को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अमृतसर में निरंकारी भवन में सत्संगियों पर बम धमाकों की घटना को पंजाब में क्या फिर से आतंकवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए? ऐसे सवाल इसीलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि 1978 में पंजाब में आतंक की शुरुआत निरंकारियों पर हमले से ही की गई थी। 40 साल बाद हुए आतंकी हमले में एक बार फिर से निरंकारी ही निशाने पर थे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घटना को आतंकवादी हमला तो माना है, इसमें पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होना भी स्वीकार किया है, लेकिन इस घटना को 40 साल पहले हुए निरंकारियों पर हमले से जोड़ कर देखे जाने पर उन्होंने असहमति जताई है। यह भी मान लिया गया है कि इस हमले के मास्टर माइंड खालिस्तानी आतंकी पाकिस्तान में आईएसआई की शरण में बैठे हैं। इस बात को स्वीकार करने में भी पंजाब सरकार को कोई ऐतराज नहीं है कि आईएसआई के इशारे पर ग्रेनेड हमले का मकसद पंजाब में दहशत फैलाना था।

लेकिन इसका जवाब अमरिंदर सरकार के पास नहीं है कि पंजाब में बार-बार के अलर्ट के बावजूद आतंकवादी हमला करने में कामयाब कैसे हो गए? कैप्टन की आतंकियों को बख्शे नहीं जाने की चेतावनी के बीच हमले के दोनों आरोपियों बिक्रमजीत सिंह और अवतार सिंह को गिरμतार भी कर लिया गया है। पुलिस जांच-पड़ताल से इतना तो साफ हो ही गया है कि आतंकवाद के दौर में भी खालिस्तानी संगठन पंजाब में इसी तरह के ग्रेनेड का इस्तेमाल करते थे। अब एक बार फिर वही तौर-तरीके अपनाते हुए सक्रिय हो गए हैं। हां, आईएसआई ने इतना बदलाव जरूर किया है कि अब किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए रेकी कोई करता है, जबकि हमले के लिए इस्तेमाल किसी दूसरे को किया जाता है। रेकी करने वाले और हमला करने वाले एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं।

इसके लिए बेरोजगार युवकों को बरगलाया जाता जाता है। पैसे का लालच दे कर उन्हें हमले के लिए तैयार किया जाता है। दहशत फैलाने के लिए मौजूदा दौर में हथियारों के बजाय हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल ज्यादा किया जाने लगा है। दो महीने पहले पंजाब में जालंधर जिले के मकसूदां थाना क्षेत्र में भी इसी तरह एक के बाद एक चार धमाके हुए थे। धमाके में मोटर साइकिल पर आये आतंकी सवारों का ही हाथ था। निरंकारी भवन पर ग्रेनेड हमले से इस आशंका की भी पुष्टि हो गई है कि पिछले कुछ वर्षों से पकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन पंजाब में पैर पसारने के लिए जोर-शोर से सक्रिय हो गए हैं। कश्मीर में फौज पर हमले के लिए भी इन दिनों ऐसे ही ग्रेनेड इस्तेमाल किये जा रहे हैं। यह हैंड ग्रेनेड पकिस्तान की ही आर्डिनेंस फैक्टरी में तैयार किया गया था। इंटेलीजेंस के पास भी इस तरह की खबर थी कि सीमा पार से हैंड ग्रेनेड की खेप आई थी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा था कि पंजाब में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से सचेत किये जाने के बाद पंजाब लगातार हाई अलर्ट पर रहा है। कश्मीर के कुख्यात आतंकी जाकिर मूसा के पंजाब में छिपे होने को भी इस हमले से जोड़ कर देखा जा रहा है। जैसा कि अक्सर होता है, हमले के बाद देशभर में निरंकारी भवनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

मास्टरमाइंड पाकिस्तान में अदलीवाल

गांव में निरंकारी भवन पर हमले का मास्टरमाइंड हरमीत सिह पीएचडी उर्फ हैप्पी पकिस्तान में बैठा है। आईएसआई की मदद से हैप्पी ने ही ग्रेनेड हमला करवाया था। हैप्पी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) का चीफ है। ग्रेनेड फेंकने के आरोप में गिरफ्तार बिक्रमजीत सिंह (26 साल) ने पूछताछ के दौरान यह खुलासा किया है। पेड़ के पास ग्रेनेड दबाये जाने की लोकेशन उसी ने बिक्रमजीत सिंह को भेजी थी। बिक्रम का दूसरा साथी अवतार सिंह (32 साल) है, जो पकिस्तान में रह रहे हैप्पी के संपर्क में था। बिक्रमजीत ने खुलासा किया है कि आईएसआई की मदद से पंजाब में आरएसएस सहित कुछ संगठनों के नेताओं और पादरी के कत्ल की साजिशें भी रची जा रही थी। उसके मुताबिक निरंकारी भवन पर हमले से पहले वहां भीड़ बढ़ने का इंतजार किया जा रहा था। उधर, जानकारी मिली है कि अवतार सिंह के पिता ने आॅपरेशन ब्ल्यू स्टार के बाद सेना की नौकरी छोड़ दी थी। इन दोनों हमलावरों की गिरμतारी के लिए जांच एजेंसियों ने अदलीवाल गांव के आसपास के मोबाईल टॉवरों का एक महीने का डंप उठाया था। इससे ही बिक्रमजीत सिंह और अवतार सिंह संदेह के दायरे में आ गए। जांच के दौरान शक के घेरे में आने के बाद पाया गया कि उनके मोबाइल की लोकेशन तीन बार इस क्षेत्र के साथ-साथ पाई गई। पूछताछ के दौरान बिक्रमजीत ने बताया कि 3 नवम्बर को वे ग्रेनेड लेने गए। 13 नवंबर को निरंकारी भवन की रेकी की और फिर 18 नवंबर को सत्संग भवन पर ग्रेनेड फेंक कर हमला किया। सत्संग भवन में घुसते समय दोनों आतंकियों ने पूछा था कि यहां क्या चल रहा है? फिर एक ने सुरक्षा गार्ड को गनपॉइंट पर ले लिया और दूसरे ने प्रवचन हाल में ग्रेनेड फेंक दिया। इस हमले में दो अन्य लोगों के साथ प्रवचन दे रहे प्रचारक सुखदेव कुमार की भी मौत हो गई। ग्रेनेड उन्हीं को निशाना बना कर फेंका गया था। 

इसके साथ ही पंजाब में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। सार्वजनिक स्थानों, जहां लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है, वहां भी विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पंजाब पुलिस से उन जगहों पर सीसीटीवी लगाने के लिए कहा गया है, जहां आरएसएस की शाखाएं चलती हैं। अमृतसर जिले के अदलीवाल गांव में बम धमाके की घटना से आठ महीने पहले आतंकी हमले की रिपोर्ट मिल गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट में बताया गया था कि पंजाब में आतंकवाद को फिर से पुनर्जीवित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आतंकी संगठन इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये सिख युवकों से संपर्क करने में लगे बताये गए थे। केंद्रीय सशस्त्र बल और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के दस्तावेजों में दर्ज है कि लंबे समय से पाकिस्तान में सिख आतंकी संगठनों की सक्रियता देखी जा रही है। यह रिपोर्ट 19 मार्च को संसद में पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आतंकी संगठन कट्टरता का प्रचार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। रिपोर्ट में हमले के मकसद से आईएसआई की तरफ से सिख युवकों को अपने ठिकानों पर आतंकी ट्रेनिंग देने का भी जिक्र किया गया था।

इन सब के बावजूद आतंकी हमला कर पंजाब में लोगों के बीच दहशत पैदा करने के अपने मंसूबों में सफल हो गए। बम ब्लास्ट की जांच एनआईए की तरफ से भी शुरू कर दी गई है। इस सब के बावजूद पंजाब पुलिस के लिए यह हमला एक चुनौती है। अगर इंटेलीजेंस की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो ऐसे और हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट कहती है कि पंजाब के बॉर्डर से लगते जिलों में आतंकियों ने पिछले कुछ समय में अपने स्लीपर सेल को फिर से सक्रिय किया है। यह भी साफ हो चुका है कि पंजाब में सक्रिय आतंकवादियों ने अपने संबंध कश्मीरी आतंकियों के साथ बढ़ा लिए हैं। इसलिए पाक सीमा से सटे इस राज्य के विकास के लिए शान्ति का बना रहना बेहद जरूरी है और इसका सारा दारोमदार पंजाब पुलिस पर है।

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