नौकरी के बदले मिल रही गोली

हमारे ऊपर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया था। इस लाठीचार्ज में मुझ जैसी कई छात्राएं घायल हुईं । मेरी स्कूल ड्रेस फट गई थी। मैं खुद को बचाने के लिए वहां से भागी। भागकर मैं बाहर मेन रोड पर आई तो देखा कि मेरे दादा(बड़े भाई) को गोली लग चुकी थी। गोली पुलिस जीप से चलाई जा रही थी। उस जीप में स्कूल के कुछ शिक्षक भी बैठे हुए थे।ह्ण ये कहना है बंगाल में पुलिस की गोली से मारे गये छात्र राजेश सरकार की बहन मोउ सरकार का। मोउ दिनाजपुर के डारीभीट हायर सेंकेडरी स्कूल की छात्रा हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का आरोप है कि बंगाल में उर्दू शिक्षको को भर्ती की रा रही है। जबकि वहां की राज भाषा बांग्ला के शिक्षको को भर्ती नहीं किया जा रहा है। परिषद् ने जब इसके विरोध में आवाज उठाने लगी तो पुलिस का कहर बरपा। बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में भी प्रदर्शन किया जा रहा था जिसमें एबीवीपी के दो कार्यकतार्ओं तपन व राजेश की पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी ।

धरती पर कोई सबसे बड़ा दुख है तो वह, जवान लड़के का शव पिता के कंधे पर हो। लेकिन बंगाल में हुए इस कांड ने गम और दुख के तमाम पहलुओं को बदल कर रख दिया है। दोनों मृत छात्रों का अंतिम संस्कार अभी भी घर वालों ने नहीं किया है। मृत छात्र राजेश सरकार के पिता की आंखों के आंसू अभी भी सूखे नहीं हैं। उनके बुढ़ापे की लाठी उनसे छिन चुकी है। एक ही तो लड़का था । राजेश के पिता नम आंखो के साथ बात करते-करते कई बार रो पड़ते हैं। वह कहते हैं ह्यहमारी पूरी दुनिया उजड़ गई है। अब कुछ भी नहीं बचा ।

बेटे के जाने का गम वही जान सकता है जिसके साथ ये घटना घटी हो। हम इस घटना की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। इसके अलावा कुछ नहीं। जब तक हत्या की जांच किसी विश्वसनीय संस्था के द्वारा नहीं की जाती तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।ह्ण इस घटना के विरोध में एबीवीपी ने 30 नवंबर को कोलकाता में एक रैली का आयोजन किया। जिसमें भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से छात्र कोलकाता पहुंचे हुए थे। सुबह से ही बड़ी संख्या में हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना समेत बंगाल के प्रत्येक हिस्सों से छात्र कोलकाता पहुंचे । यहां से दो स्थानों, एमजी रोड और हावड़ा स्टेशन पर हजारो के हूजूम में निकली रैली ने देखते ही देखते पूरे शहर को अलग- अलग नारों से गुंजायमान कर दिया। हांथों में बैनर और पोस्टर के साथ भगवा झंडे थामे एबीवीपी के छात्रों में उत्साह साफ देखा जा रहा था ।


पश्चिम बंगाल के युवाओ ने भी अब तय कर लिया है कि वो ममता बनर्जी
के तुष्टिकरण को उखाड़ कर ही दम लेंगे। राजेश और तापस के न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
श्रीनिवास (राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के)

उत्तर से लेकर दक्षिण, पूर्व से लेकर पश्चिम कोलकाता का प्रत्येक क्षेत्र एबीवीपी समर्थकों की रैली से पटा पड़ा था। जिस जन भावना को जागृत करने के लिए एबीवीपी की तरफ से रैली आयोजित की गई थी उसमें रैली लगभग सफल मानी गई। एबीवीपी छात्रों का आक्रोशित समूह ह्यबंगाल की गलियां सूनी हैं, ममता बनर्जी खूनी हैह्ण के नारों के साथ आगे बढ़ रहा था। इसके अलावा ह्यबांग्लादेशी वापस जाओह्ण का नारे भी जोर शोर से लगाये जा रहे थे। डॉ. रमन त्रिवेदी एबीवीपी के राज्य अध्यक्ष हैं। रमन कहते हैं ह्ल हम इस मसले पर राज्यपाल से भी मिलेगे। क्योंकि राज्य सरकार से हमको अब कम ही उम्मीद है। जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक हम ये लड़ाई जारी रखेगें। इस मामले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उदासीनता आप इसी से समझ सकते हैं कि हत्या के मुख्य आरोपी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं ।

किसी का नौजवान बेटा अगर गुजर जाए तो इस दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस घटना का कोई दुख नहीं है। ममता बनर्जी का झंडा अब वामपंथी ढो रहे हैं। सुनील आंबेकर (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद)

20 हजार से ज्यादा की भीड़ कोलकाता पहुंची । जिसमें महिला कार्यकतार्ओं की बड़ी संख्या है। ये हमारे लिए बड़ी कामयाबी है। जिस मां मानुष और माटी की बात करके ममता सत्ता में आईं थी वह अब उन्हीं चीजों तो भूल चुकी हैं। लोगों में रैली को देखने का आकर्षण थ। जनसभा स्थल की ओर बढ़ती भीड़ से हर कोई जुड़ता चला गया । एक समय ऐसा भी आया कि सड़क पर चल रही रैली के लिए एक स्थान पर ट्राम को रोकना भी पड़ा। ट्राम के चालक अरूम घोष ट्राम से निकलर बाहर आ गए। उनका पहला वाक्य था ह्यबीजेपी जरूर सत्ता में आएगी।ह्ण वह खुद एबीवीपी के विद्याथीर्यों के साथ भारत माता की जय का नारा लगाने लगे।

हालांकि पुलिस प्रशासन की तरफ से इस रैली को काफी सहयोग मिला। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने छात्रों की रैली को सड़क से रैली स्थल पर पहुंचने में मदद की। पूरे शहर भर में होते हुए दोनो रैलीयां धर्मतल्ला नामक स्थान पर एक हो गयीं । जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। यहां एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ता और पदाधिकारीयों ने इस विषय पर अपने विचार रखे और भविष्य की योजनाएं भी बताईं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने कहा ह्यये लड़ाई न्याय मिलने तक जारी रहेगी, जो सिर्फ कोलकाता ही नहीं पूरे भारत के लोगों की है। किसी का नौजवान बेटा अगर गुजर जाए तो इस दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस घटना का कोई दुख नहीं है। ममता बनर्जी का झंडा अब वामपंथी ढो रहे हैं। राज्य की सत्ता भले बदल गई हो लेकिन उसको चलाने वाले नहीं बदले। यही वजह है कि पूरा देश आगे जा रहा है लेकिन बंगाल पीछे जा रहा है। ये दुख सिर्फ राजेश के परिवार का नहीं है। हम सब का दुख है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री आशीष चौहान कहते हैं ह्यएनआरसी(राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) अब एक राज्य का मुद्दा नहीं है अब ये अंतराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। यहां लेह से लेकर केरल तक के विद्यार्थी हैं। देश मे एनआरसी का मुद्दा चरम पर है।ह्ण अलग-अलग मुद्दों और समस्याओं जैसे पश्चिम बंगाल में बांग्ला की जगह उर्दू शिक्षक की नियुक्ति का विरोध करने पर पुलिस फायरिंग में राजेश सरकार और तापस बर्मन की हत्या की सीबीआई जांच, प्रदेश में एनआरसी लागू करने, सिटीजनशिप संशोधन बिल 2016 को संसद में शीघ्र पास करने समेत कई मांगों को लेकर आयोजित की गई रैली को सफल कहा जा सकता है। लेकिन राजनीतिक पंडितो का कहना है कि रैली की सफलता और असफल एक अलग विषय है। बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते जनाधार में ये रैली जरूर मील का पत्थर साबित होगी।

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