दो साल चलेगा स्मरण का सिलसिला

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1969 में गांधी जन्म शताब्दी के अवसर पर सरकार एवं गांधीवादी संस्थाएं एक साथ थीं। गांधी जन्म शताब्दी के अवसर पर गांधीवादियों की योजना को ही सरकार ने स्वीकार कर लिया था और इसके लिए उन्हें मदद मुहैया की थी। पर गांधी जी की 150वीं जयंती पर सरकार और गांधीवादी संस्थाओं के बीच दूरी देखी जा रही है। इस बार गांधीवादियों ने बगैर सरकारी सहयोग के लोक आधारित अभियान के रूप में डेढ़ सौवीं जयंती मनाने का फैसला किया है।

दो अक्टूबर को देश-विदेश में गांधी जयंती मनायी गयी। सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों ने परंपरा के मुताबिक गांधी जी को याद किया। लेकिन इस बार गांधी जयंती साल दर साल होने वाले आयोजनों से अलग थी। दो अक्टूबर से गांधी की150वीं जयंती की शुरुआत हो गई। केंद्र सरकार ने इसके मद्देनजर दो साल तक चलने वाले कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। आगामी दो वर्षों तक होने वाले ये आयोजन देश-समाज पर कुछ सार्थक प्रभाव डाल सकें, इसके लिए गांधी विचार एवं दर्शन के साथ ही उनके रचनात्मक कार्यों को ध्यान में रखते हुए कई कार्यक्रम बनाए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर को ‘स्वच्छता मिशन’ की शुरुआत की। देशवासियों से साफ -सफाई के प्रति जागरुक होने का आह्वान किया। ‘स्वच्छता ही सेवा’ नामक यह अभियान गांधी के रचनात्मक कार्यों की याद दिलाता है। स्वच्छता गांधी के प्रिय विषयों में में से एक था।
दो वर्षों तक कार्यक्रम सुनियोजित रूप से संचालित हो सके, इसके लिए सरकार ने दो समिति बनाई है। जिसमें प्रधानमंत्री के साथ ही कई मंत्री और विपक्षी पार्टियों के सांसद भी शामिल हैं। 2 अक्टूबर, 2018 से शुरू हुए अनेक कार्यक्रम 2 अक्टूबर, 2020 तक चलेंगे। इस दौरान देश-विदेश में गांधी के जीवन, विचार एवं दर्शन के विभिन्न पहलुओं के अलावा कई छोटे संगठनों एवं व्यक्तिगत स्तर पर भी ढेर सारे कार्यक्रम गांधी जयंती पर आयोजित हुए। ‘द पीस गांग’ नामक संगठन ने इस अवसर पर साइबर फास्टिंग किया। संगठन से जुड़े सदस्यों ने सुबह 6 बजे से शाम के 6 बजे तक मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर और लैपटॉप को आॅफ रखा। ‘द पीस गांग’ से जुड़े प्रो. टीके थॉमस कहते हैं कि आज के समय में हर मनुष्य मोबाइल और टीवी में इतना व्यस्त है कि वह पड़ोसी तो क्या अपने को भी भूल गया है। इसलिए अपने से मिलने और आसपास की चीजों का अनुभव करने के लिए हम लोगों ने साइबर फास्टिंग करने का निर्णय किया। गांधी जी ने मशीनों पर आश्रित होने का विरोध किया था। लेकिन आज हम देखें तो लोग मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर आश्रित हो गए हैं। इसलिए हम लोगों ने एक दिन इससे दूर रहने का व्रत लिया।’’
केंद्र सरकार ने देश-विदेश में ‘गांधी कथा’ कराने का निर्णय लिया है। आर्ट आॅफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर और सद्गुरु जग्गी वासुदेव गांधी कथा का वाचन करेंगे। इस कथा के प्रणेता नारायण भाई देसाई थे। नारायण भाई देसाई इस कथा से यह संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि, ‘‘गांधी कोई भगवान नहीं थे। उन्होंने अनेक बार स्वयं अपने ही बनाए नियमों को तोड़ा था। सामान्य मानव की भांति उनमें भी अनेक कमजोरियां थीं। सार रूप में कथा का सन्देश यह है कि समय-समय पर आत्मशोधन के ज़रिए उन्होंने अपनी कमजोरियों पर विजय पाई थी… यह ‘मोहनदास’ से ‘महात्मा’ बनने की कथा है, जिसे मैंने ‘गांधी-कथा’ की संज्ञा दी है।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर को ‘स्वच्छता मिशन’ की शुरुआत की। देशवासियों से साफ -सफाई के प्रति जागरुक होने का आह्वान किया। ‘स्वच्छता ही सेवा’ नामक यह अभियान पूरे देश भर में गांधी के रचनात्मक कार्यों की याद दिलाता है। स्वच्छता गांधी के प्रिय विषयों में से एक था। “

’’ गांधी के जीवनकाल में ही उनके जन्मदिन को सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत हो गयी थी। चंपारण सत्याग्रह के बाद जब गांधी काफी चर्चित हो गए थे, तब दो अक्टूबर,1919 में उनकी पचासवीं सालगिरह मनाई गई। इसके बाद उनके पचहत्तर साल के होने पर भी उनकी जयंती भारत सहित विभिन्न देशों में मनायी गयी। 1969 में गांधी शताब्दी वर्ष पर सरकार और गांधीवादी संस्थाओं ने मिलकर जन्मदिन को उल्लास एवं उत्सवपूर्ण ढंग से मनाया था।
गांधी जन्म शताब्दी वर्ष में दिल्ली, वर्धा और बड़े महानगरों-शहरों को छोड़ दें तो छोटे-छोटे शहरों में गांधी को याद किया गया था। उत्तर प्रदेश के हरदोई जैसे जिले में गांधी शताब्दी मनायी गयी थी। दरअसल 1929 में गांधी जी ने हरदोई के टाउन हाल में 4000 से अधिक व्यक्तियों की जनसभा को संबोधित किया था। सभा के समापन पर खद्दर के कुछ कपड़े 296 रुपये में नीलाम किये गये और यह धनराशि गांधी जी को भेंट की गयी थी। स्वतंत्रता के बाद देश भर में महात्मा गांधी के भ्रमण स्थलों पर स्मारकों का निर्माण किया गया जिसमें हरदोई में भी गांधी भवन का निर्माण हुआ।
1969 में गांधी जन्म शताब्दी के अवसर पर गांधीवादियों की योजना को ही सरकार ने मंजूर कर लिया था और इसके लिए उन्हें मदद मुहैया की थी। पर गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती पर सरकार और गांधीवादियों में दूरी देखी जा रही है। इस बार गांधीवादियों ने बगैर सरकारी सहयोग से लोक आधारित अभियान के रूप में गांधीजी की डेढ़ सौवीं जयंती मनाने का फैसला किया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती को सरकार और गांधीवादी संगठन अलग-अलग मनाएंगे। कुछ गांधीवादियों का कहना है कि, ‘‘गांधीजी की जन्म शताब्दी को तो उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने की भावना से मनाया गया था लेकिन इस बार उनके विचारों को औजार और हथियार के रूप में प्रयोग करने के मिजाज से मनाने की योजना है।’’
इसलिए गांधीवादी संस्थाओं ने ‘गांधी 150’ के नाम से गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती मनाने का निर्णय किया है। गांधी शांति प्रतिष्ठान, गांधी स्मारक निधि, राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय और कस्तूरबा गांधी स्मृति ट्रस्ट की पहल पर लोकशक्ति को जगाने के मकसद से अन्य संस्थाओं और लोगों को जोड़कर गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की योजना बन रही है। इसके लिए राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक कार्यक्रम करने की योजना है। गांधीवादी संस्थाएं लोकशाही को जगाने और उसको प्रभावी बनाने के लिए गांधी के विचार एवं दर्शन के व्यापक प्रचार की योजना बना रहे हैं। इस दृष्टि से लोगों तक पहुंचने के लिए सालभर में कई यात्राएं शुरू होंगी।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों में गांधी पर केंद्रित प्रदर्शनी और चलचित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। शांति, अहिंसा, सामाजिक, न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े विषयों पर गोष्ठियां कार्यशाला और सम्मेलनों का आयोजन होगा। छात्रों, युवाओं और कार्यकर्ताओं पर प्रशिक्षण शिविर होंगे। इसी के साथ महिलाओं, किसानों और मजदूरों के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे जिसमें एक यात्रा केवल महिलाओं द्वारा महिलाओं के ही नेतृत्व में निकाली जाएगी।
सरकार ने अंतरराष्टÑीय स्तर पर गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती मनाने की कड़ी में गांधी जी से जुड़े संस्थाओं के आधुनिकीकरण की योजना बनाई है। सरकार ने महाराष्टÑ के वर्धा जिले में स्थित सेवाग्राम आश्रम के आसपास विकास के लिए 122 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस राशि से आश्रम के आसपास एक म्युजियम, एम्फीथिएटर, पार्किंग एरिया, सार्वजनिक शौचालय, लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर बनाए जा रहे हैं। कच्ची झोपडि़यों वाले सेवाग्राम आश्रम के ठीक सामने पक्के निर्माण हो रहे हैं। यह सब आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए हो रहा है लेकिन कच्ची झोपड़ी में रहने वाले गांधी के कुछ अनुयायियों के लिए यह गांधी के सिद्धांतों के खिलाफ लगता है। इसलिए इस निर्माण का विरोध शुरू हो गया है।

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