चुनावी समर के लिए तैयार

‘सीना तानकर लोगों के बीच जाइए, आपकी सरकार ने ढेरों ऐसे काम किए हैं जिन पर आपको गर्व होगा। ऐसा एक भी काम नहीं किया जिससे आपका सर नीचा हो।’ दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह बात पूरी हनक से कही। भाजपा कार्यकर्ताओं में यह जोश और जुनून पैदा करने वाला आह्वान है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को सावधान भी किया और एक चेतावनी भी दी। बता दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव को सिर्फ ‘आम चुनाव’ न समझें। यह तो पानीपत के युद्ध जैसा निर्णायक होगा। इससे पहले चाहे जितनी बार और जहां भी जीते हों, यह चुनाव हारे तो वर्षों पछताना पड़ सकता है। जरा सी चूक से देश एक कर्मठ और निर्णायक प्रधान सेवक की बजाय कमजोर और निखट्टू शासक के हाथों में जा सकता है। पानीपत के युद्ध का प्रसंग प्रतीकात्मक है। इससे भारतीय जनता पार्टी ने जता दिया कि लोकसभा चुनावों को लेकर उसकी सोच और रणनीति क्या है?
हालांकि 2014 में बुरी तरह मुंह की खा चुके विपक्षी दलों के लिए भी यह करो या मरो जैसी स्थिति है। पर विपक्षी दल अभी गठबंधन और नेता तय करने की कवायद में ही लगे हैं। वहीं भाजपा ने देश भर के प्रमुख कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाकर चुनाव का शंखनाद कर दिया। रामलीला मैदान में 11 व 12 जनवरी को भाजपा का अब तक का सबसे बड़ा दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। इससे पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संकल्प पत्र समिति, प्रचार समिति, संपर्क समिति आदि 17 समितियों का भी गठन कर दिया था। हाल ही में सत्ता गंवा चुके तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी अपनी टीम में उपाध्यक्ष बनाकर निराशा से उबार दिया।

तो इसलिए फिर रामलीला मैदान
 इससे पहले 2014 में रामलीला मैदान में ही हुई राष्ट्रीय कार्य परिषद् की बैठक से नरेन्द्र मोदी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की थी और ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की थी।
 अब तक के सबसे बड़े राष्ट्रीय अधिवेशन में लोकसभा, राज्यसभा के साथ सभी विधानसभाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ ही जिला कार्यकारिणी के प्रमुख पदाधिकारियों, जिला स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों व मोर्चों के प्रमुख पदाधिकारियों को बुलाया गया था। करीब 12 हजार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
 मोदी दोनों दिन राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मौजूद रहे। उनके लिए रामलीला मैदान में अलग से अस्थाई ‘पीएमओ’ बनाया गया था।
 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी दμतर और निवास तैयार किया गया।
 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए यहां सीएम लाउंज भी बनाया गया।

भाजपा का यह राष्ट्रीय अधिवेशन उस समय हुआ जब लोकसभा चुनावों के दरवाजे पर आकर पार्टी को तीन प्रमुख राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवाने के बाद 2019 के आम चुनाव को लेकर तमाम आशंकाओं के बादल छाने लगे थे। इन चुनावों में मिली हार के कुछ कारणों में एक यह भी बताया जा रहा है कि पार्टी से कार्यकर्ता निराश हैं। उनके अंदर नेतृत्व को लेकर विश्वास कम हो रहा है। अपने कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने और उन्हें फिर से मैदान में कमर कस तैयार करने के लिए राष्ट्रीय अधिवेशन से अच्छा अवसर कुछ और नहीं हो सकता था। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। शाह ने जोश भरा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके अंदर विश्वास भरने का काम किया। राष्ट्रीय अधिवेशन से निकलने वाला हर कार्यकर्ता एक ही बात बोल रहा था- ‘फिर एक बार, मोदी सरकार’।
कार्यकर्ताओं को तैयार करने के लिए केवल भाषणों का ही सहारा नहीं लिया गया बल्कि पार्टी में उनकी अहमियत जताने के लिए राजनीतिक प्रस्ताव में भी कार्यकर्ताओं की भूमिका को खूब सराहा गया। अपने भाषण में भाजपा अध्यक्ष ने तो कार्यकर्ताओं को ‘पार्टी का मालिक’ कहकर संबोधित किया। यही नहीं, अधिवेशन में ‘ब्रांड नरेन्द्र मोदी’ को कार्यकर्ताओं के बीच और मजबूती से रखा गया। विश्वास भरा गया कि प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व के सामने भारत का कोई भी राजनेता ठहरने वाला नहीं है। शाह ने मोदी को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ नेता बताया तो राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया, ‘नरेन्द्र मोदी जैसे एक प्रतिष्ठित नेता का विरोध ऐसे अवसरवादी गठबंधन द्वारा किया जा रहा है, जिसके नेता के बारे में अभी पता नहीं है। हमें यकीन है कि भारत के लोग नरेन्द्र मोदी के प्रेरक नेतृत्व में भाजपा और राजग में अपना भरोसा बनाये रखेंगे।’
अधिवेशन का प्रमुख उद्देश्य जहां कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने का रहा, वहीं उन्हें जनता के बीच जाने और मोदी के लिए वोट मांगने के लिए तर्कों और उपलब्धियों की पूरी जानकारी भी दी गई। राम मंदिर, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसान और गरीबी को लेकर उठ रहे सवालों का ठीक से जवाब सुझाया गया। साथ ही मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का मंत्र भी दिया गया। प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष ने स्वयं राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। बताया कि वे सर्वोच्च न्यायालय से जल्द फैसले की उम्मीद कर रहे हैं। पर कांग्रेस बाधक बन रही है।

उपलब्धियों पर फोकस
 पहली बार देश में सभी फसलों का लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया है। मनमोहन सरकार की तुलना में पांच साल में 1,21,042 करोड़ का बजटीय आवंटन किया गया है, जो पिछली सरकार के कृषि बजट से दोगुना है।
 जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना और आयुष्मान योजना से गरीबों को बहुत लाभ पहुंचा है।
 राजनैतिक प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पेश किया और उसका अनुमोदन वित्तमंत्री अरुण जेटली आदि नेताओं ने किया।
 प्रस्ताव में भाजपा ने कहा कि मतदाताओं के सामने नरेन्द्र मोदी का प्रभावी सुशासन और उसके विकल्प में विपक्ष का हताशा भरा कुशासन है। भाजपा को विश्वास है कि मतदाता प्रभावी सुशासन और मोदी के प्रेरक नेतृत्व पर ही मुहर लगाएंगे।

कार्यकर्ताओं को राफेल, चौकीदार और देश की सुरक्षा पर भी पूरी तरह से तैयार किया गया। बताया गया कि संसद में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण को अच्छे से सुनें और लोगों तक पहुंचाएं। बताएं कि भष्टाचार के मामले में जमानत पर चल रहे मां-बेटा (सोनिया और राहुल गांधी) कैसे एक साफ सुथरी और देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक डील पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में क्लीन चिट दे चुका है। हथियारों की डील में ‘मिशेल मामा’ और ‘क्वात्रोच्ची अंकल’ का नाम लेकर साफ कहा गया है कि लोगों को बताएं कि गांधी परिवार को सौदेबाजी की रकम न मिलने से यह दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसी तरह बताया गया कि नीरज, मेहुल और माल्या तभी भागे जब सत्ता बदली। उससे पहले उन्हें मालूम था कि शाही परिवार का उन्हें संरक्षण प्राप्त हो जाएगा।


विपक्ष मोदी के शासनकाल में कथित रूप से बढ़ती बेरोजगारी को मुद्दा बनाना चाहता है। वह कहता है कि मोदी-राज में रोजगार के अवसर सृजित नहीं हुए और युवा दर -दर भटक रहे हैं। भाजपा ने इस मामले में पूरा आंकड़ा प्रस्तुत किया। स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुद्रा ऋण, छोटे और लघु व्यापारियों के लिए आसान शर्तों पर ऋण और लगातार आसान हो रही जीएसटी की प्रकिया को लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। इसके साथ ही भाजपा ने अधिवेशन में गरीबी पर अलग से एक प्रस्ताव भी पारित किया। प्रस्ताव में कहा गया कि आजादी के बाद से ही दशकों तक कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा तो दिया, लेकिन गरीबी हटाने में विफल रही। कांग्रेस के लिए गरीब सिर्फ चुनावी नारे तक सीमित थे। कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी कहते थे कि मैं 100 रुपये दिल्ली से भेजता हूं तो सिर्फ 15 रुपये ही गरीबों तक पहुंचते हैं। मोदी के कार्यकाल में यह चित्र पूरी तरह बदल चुका है। गरीबों का हक सीधे उसके खाते में पहुंचाने को के लिए तमाम योजनाओं में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (डीबीटी) को लागू किया गया। उसका परिणाम यह कि आज इसके माध्यम से 431 योजनाओं के 4 लाख करोड़ रुपये गरीबों के खाते में बिना किसी बिचौलिए के सीधे पहुंच रहे हैं।

अधिवेशन में पार्टी ने उन सभी मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण और उपलब्धियों को कार्यकर्ताओं के सामने प्रस्तुत किया जिनको लेकर चुनाव में जाया जा सके। यह बताया गया कि पिछले साढ़ चार वर्षों में भाजपा सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और निर्णयकारी नेतृत्व का परिणाम है कि हम देश के गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सफल हुए हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गरीबों एवं कमजोर तबकों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। भाजपा की केंद्र सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में दलित, शोषित, पीड़ित एवं वंचित वर्गों के कल्याण के लिए जो करके दिखाया, वह आज तक के इतिहास में किसी सरकार ने नहीं किया।
अधिवेशन में बताया गया कि ‘जन धन योजना’ के जरिए 32 करोड़ गरीबों के जन धन खाते खोले गये। इस माध्यम से देश के गरीबों ने 80 हजार करोड़ रुपये की बचत की है। गरीबों को बिचौलियों से मुक्ति मिल गयी और उनके हक का पैसा उनके खातों में सीधे मिलने लगा। इससे भ्रष्टाचार पर पूरी तरंह अंकुश लग गया। पोस्ट पेमेंट बैंक जिसे कुछ महीने पहले ही शुरू किया गया, उसका परिणाम भी शानदार रहा। इस व्यवस्था के माध्यम से गरीबों के द्वार तक बैंक पहुंच गये।

आर्थिक लेन-देन के लिए डेढ़ लाख नए केंद्र खुल गए और इससे बैंकिंग व्यवस्था सामान्य जनता के पास सुगमता से पहुंच गई। अब डाकिया भी पैसे का लेन-देन करने लगा है। यही नहीं, गरीबों के आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के द्वारा 14 करोड़ लोगों ने मात्र 12 रुपये प्रतिवर्ष भरकर 2 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा योजना का लाभ लिया है। इसमें अब तक करीब 29 हजार लोगों को कुल 580 करोड़ रुपये की रकम दुर्घटना की परिस्थितियों में मिली है। चुनाव के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण ‘आयुष्मान योजना’ को भी गरीबों तक पहुंचाने के लिए भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को जागरूक रहने और इसका प्रचार करने के लिए प्रेरित किया गया। इस योजना को मोदी सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’ बताया जा रहा है। इसमें देश के 10 करोड़ परिवार एवं 50 करोड़ जनता को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के इलाज की नि:शुल्क व्यवस्था की है। अभी तक छह लाख से ज्यादा बीमार गरीब व्यक्तियों को सरकारी एवं निजी अस्पतालों में मुμत इलाज मिल चुका है। यह भी बताया गया कि आजादी के 70 साल बाद आयुष्मान भारत योजना ने गरीब को एक नई जिंदगी दी है। इसके साथ साथ ‘वेलनेस सेंटर’ शुरू हो रहे हैं, जहां गरीब के स्वास्थ्य की हर साल विभिन्न प्रकार के परीक्षण और समुचित सलाह की मुμत व्यवस्था होगी।
जब वर्ष 2014 में भाजपा सत्ता में आई थी तब लगभग 18,000 गांव थे, जो बिजली की पहुंच से दूर थे। मोदी सरकार ने 1000 दिन से पहले ही हर गांव तक बिजली पहुंचाने का संकल्प पूरा कर दिया। जिन लाखों लोगों ने कभी बिजली नहीं देखी थी, उनको घर में अब बिजली मिलने लगी है। ‘सौभाग्य योजना’ के तहत घर-घर तक मुμत बिजली पहुंचाने का संकल्प भी सरकार ने लिया है और 4 करोड़ घरों को नि:शुल्क बिजली देने का लक्ष्य रखा है। अभी तक ढाई करोड़ लोंगों के घर में बिजली कनेक्शन पहुंचा भी दिया गया है। देश की 6 करोड़ गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत गैस का कनेक्शन, गैस चूल्हा तथा पहला सिलेंडर मुμत दिया जा चुका है। इसी तरह प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत अब तक एक करोड़ से ज्यादा गरीबों को खुद के मकान मिल चुके हैं।
अधिवेशन से साफ हो गया कि भाजपा अपने करिश्माई नेता नरेन्द्र मोदी के नाम और उनके काम को लेकर ही जनता के बीच जाएगी। पिछले साढ़े चार सालों में किए गए ढेरों कामों की सूची उसके हाथ है। जीएसटी का दायर बढ़ाकर उसने कुछ खिन्न दिख रहे व्यापारी वर्ग को भी साधने का काम कर दिया है। कुल मिलाकर इस समय विपक्ष मुद्दाविहीन है। मोदी और शाह की चुनावी रणनीति की यही खास विशेषता है। वे एजेंडा खुद तय करते हैं और विपक्ष को उसी पर आने के लिए मजबूर करते हैं। अभी तक तो विपक्ष निहत्था ही दिख रहा है। ऐसे में आरक्षण के मैदान पर मारा गया ‘छक्का’ उसके लिए रामबाण भी साबित हो सकता है।

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