कुंभ का महा उत्सव

‘मैं पिछले पचास साल से यहां नाव चला रहा हूं। लेकिन आज से पहले मेले को लेकर प्रशासन की इतनी सजगता कभी देखने को नहीं मिली। हमको एक अच्छे मेले की उम्मीद है।’ ये कहना है संगम नोज पर अपनी नाव की मरम्मत कर रहे जेठू का। जेठू कई माघ मेला, अर्ध कुंभ और कुंभ के साक्षी रह चुके हैं। वह कहते हैं ‘योगी आदित्यनाथ और मोदी ने अर्धकुंभी को पूर्णकुंभ करके अच्छा निर्णय लिया है। इससे पूरे शहर को फायदा होगा। खासतौर से हम जैसे गरीबों की आय में वृद्धि होना तो तय है।’ इस समय प्रयागराज शहर में ऐसे न जाने कितने जेठू एक भव्य कुंभ मेले के आयोजन की बाट जोह रहे हैं। इसका सीधा कारण उनको होने वाला व्यवसायिक लाभ है।

प्रयागराज में कुंभ मेला 2019 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 45 दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में लाखों भक्त इस विश्वास के साथ आते हैं कि पवित्र नदी में डुबकी लगाकर उन्हें पापों से मुक्ति मिल जाएगी। कुंभ की शुरुआत मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी को होगी और कुंभ का समापन महाशिवरात्रि पर होगा। कुंभ में देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु प्रयागराज, स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। शहर में दाखिल होने वाले सभी राजमार्गों से ये अहसास होने लगता है कि शहर में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। विद्युत से लेकर सड़क और जल से लेकर नभ तक हर क्षेत्र में राज्य और केंद्र सरकार के साझा प्रयास से एक आधुनिक शहर विकसित किया जा रहा है।

विभागों पर समय के भीतर काम को पूरा करने का दबाव साफ देखा जा सकता है। मेले के पहले काम को पूरा करने के लिए प्रशासन युद्ध स्तर पर जुटा हुआ है। शहर के तमाम चौराहों को तोड़कर नये ढ़ंग से निर्मित किया जा रहा है। संगम की तरफ जाती हुई सड़क के बीच स्थित बालसन चौराहे पर निर्माण कार्य में लगे लोक निर्माण विभाग के कांट्रेक्टर मनीष सिंह कहते हैं कि हम शहर भर के चौराहों के पुननिर्माण के काम में लगे हुए हैं। कुंभ मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक सूचनाएं अब सोशल मीडिया पर भी मिल सकेगी। इससे श्रद्धालु यह जान सकेंगे कि किस स्टेशन से कहां के लिए और किस समय ट्रेनें मिलेंगी। यही नहीं, वह इसके माध्यम से एयरपोर्ट से μलाइट और बस अड्डे से बसों के गंतव्य स्थल और उसके समय की जानकारी भी ले सकेंगे। इतना ही नहीं, यहां कोई भी व्यक्ति पॉर्किग स्थल और संगम कुंभ मेला क्षेत्र पहुंचने वाले रास्तों की जानकारी भी मात्र मोबाइल के एक क्लिक से प्राप्त कर सकेगा।

प्रयागराज के जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने यथावत से बातचीत में कहा कि ‘‘सोशल मीडिया के उचित प्रयोग के लिए हमने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की कमेटी गठित की है। श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है।’’ सुहास एलवाई कहते हैं ‘‘श्रद्धालुओं की सकुशल वापसी का मेगा प्लान बनाया जा रहा है। इसके लिए सूचना पुस्तिका भी प्रकाशित कराई जाएगी, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक जानकारियां होंगी। इस पुस्तिका की सूचनाएं सोशल मीडिया ग्रुपों पर भी शेयर की जाएंगी।’’ प्रयागराज में हो रहे निर्माण कार्यों को देखकर हर कोई यही कह रहा है कि यह काम मेला के शुरू होने के साथ पूरा नहीं किया जा सकेगा। हांलाकि कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते उनका कहना है कि, रेलवे और जिला प्रशासन के साझा सहयोग से रेल ओवरब्रिज का निर्माण् अब आखिरी चरण में है। इसे 30 नवंबर तक चालू करने का लक्ष्य है। शहर के अंदर व बाहरी इलाकों में जितने भी μलाईओवर और आरओबी बन रहे हैं, 30 नवंबर तक हर हाल में पूर्ण होने के साथ ही यहां यातायात शुरू करने की बात कही जा रही है। अभी तक प्रयाग में नियमित हवाई सेवा उपलब्ध नहीं थी।

जिस कारण यहां सिविल एयरपोर्ट की होना था। इलाहाबाद में सिविल एयरपोर्ट नही था। सेना के एयरपोर्ट पर विमान उतारे जाते थे। अब यहां अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सिविल एयरपोर्ट बन कर लगभग तैयार है। नया सिविल एंक्लेव 6599 स्क्वायर मीटर में बनाया जा रहा है। जहां 150 यात्रियों के आने तथा इतने ही यात्रियों के जाने के लिये सारी व्यवस्था होगी। नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयन्त सिन्हा कहते हैं ‘‘हमने प्रयागराज में बहुत सारी हवाई सुविधाएं शुरू कर दी हैं। हमारे लिए ये खुशी की बात है कि कुंभ के पहले प्रयागराज में इतनी अधिक उड़ाने शुरू हो चुकी हैं। कुंभ के लिए हम बेहतर सुविधा देने के लिए तैयार हो चुके हैं जिससे मेला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच सकेगा।’’ एयरपोर्ट पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सारी सुविधाएं होंगी। यह लखनऊ एवं वाराणसी के एयरपोर्ट से बेहतर होगा। एयरर्पोट पर रात्रि में या खराब मौसम में लैंडिग की सुविधा के लिये इंस्ट्रोमेंट लैंडिग सिस्टम भी लगाया जा रहा है। इस एयरपोर्ट से नवम्बर से 13 शहरों के लिये हवाई यात्रा सुलभ होगी। हर वर्ष माघ मेले का आयोजन गंगा की रेत पर होता है। लेकिन कुंभ और महाकुंभ का आयोजन 12 वर्ष और 6 वर्ष में ही किये जाते हैं।

इस अर्धकुंभ से अर्ध शब्द हटाकर कुंभ की तरह प्रोजेक्ट किया जा रहा है। इतने बड़े आयोजन में टेंट महत्वपूर्ण जिम्मा माना जाता है। हर बार की तरह इस बार भी मेले में टेंट लगाने की जिम्मेदारी लल्लू जी एंड संस ने ली है। लल्लू जी एंड संस के प्रबंधक नीरज कुमार बताते हैं ‘‘इस वर्ष सरकारी अनुमान के अनुसार मेले में लगभग 14 करोड़ लोग पहुंच सकते हैं। खुद सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है। सरकार की इच्छा है कि देश के सभी गांवों से कम से कम एक दो श्रद्धालु यहां अवश्य पहुंचे। जिसके कारण हमारी जिम्मेदारी और बढ़ा जाती है। कुंभ का क्षेत्र साफ सुथरा दिखे, इसके लिये 1 लाख 22 हजार से अधिक शौचालय बनाये जा रहें है जबकि पूर्ण कुंभ 2013 में मात्र 34 हजार शौचालय बनाये गये थे।’’

 

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