उच्च शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन पर ज्ञान-कुंभ

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वगत 3-4 नवम्बर को हरिद्वार में पहली बार ‘उच्च शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन’ विषय पर गहन विचार-विमर्श के लिए ज्ञान कुम्भ का आयोजन किया गया। यह विशद आयोजन उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग एवं पतंजलि योग विश्वविद्यालय, हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें उच्च शिक्षा से जुड़े करीब दो हजार लोगों ने भाग लिया। इनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष, 200 कुलपति, 500 महाविद्यालयों के प्राचार्य, 300 शोधार्थी एवं विभिन्न कक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 250 विद्यार्थी शामिल हुए। पांच तकनीकी सत्रों में विषय पर विचार मंथन हुआ।

राष्ट्रपति ने उद्घाटन सत्र के अपने संक्षिप्त भाषण में देश के समग्र विकास के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कार देती है और अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों में अंतर्निहित प्रतिभा की पहचान कर उसे विकसित करने में अपना योगदान देता है। बाबा रामदेव ने कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए शिक्षा को संस्कारक्षम एवं उच्च गुणवत्ता सम्पन्न बनाना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस तरह देश में योग क्रांति आई है, वैसे ही अब ज्ञान क्रांति का सूत्रपात होगा और भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में स्थापित होगी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने ज्ञान कुम्भ के आयोजन को सकारात्मक पहल बताया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश में 930 विश्वविद्यालय तथा 39000 से अधिक महाविद्यालय होने के बाद भी शिक्षा का स्तर चिंतनीय है। सम्भव है ज्ञान कुम्भ से कोई रास्ता निकले जो शिक्षा की इस दशा में बदलाव लाये। समापन सत्र में योगी आदित्यनाथ ने भारतीय शिक्षा की गौरवमयी परम्परा का उल्लेख किया और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में देश के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।

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