इस साल विकास को मिलेगी नई उड़ान

0
54

विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में भारत के विकास की प्रशंसा की गई है। उसमें कहा गया है जीएसटी और नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक सेक्टर की ओर ले जाने में मदद की है। यानी काले धन का इस्तेमाल घट रहा है। देश में बढ़ रही खपत और निवेश से यह संभव हो रहा है जिसमें आने वाले समय में और भी बढ़ोतरी होगी।

साल 2019 में वित्त मंत्रालय और देश के लिए बड़ी खबर है। विश्व बैंक ने भविष्यवाणी की है कि भारतीय अर्थव्यस्था के विकास की दर 2018-19 में 7.3 प्रतिशत रहेगी जबकि हमारे प्रतिद्वंद्वी चीन की 6.3 प्रतिशत रहेगी। यह खबर उसी क्रम में है जिसमें रिजर्व बैंक ने भी लगभग इतनी ही विकास दर की उम्मीद जताई थी।
इतना ही नहीं, बैंक ने यह भी कहा है कि अगले दो वर्षों में यह दर 7.5 प्रतिशत रहेगी। इसका मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर आगे भी तेज रहेगी। यानी देश आर्थिक दृष्टि से मजबूत रहेगा। बैंक का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के बाद लगे झटके से अर्थव्यवस्था पूरी तरह से उबर चुकी है। इसका कारण बड़े पैमाने पर निवेश तथा उत्पादित सामानों की खपत में वृद्धि है। यह प्रवृत्ति अभी भी जारी है और उसके अच्छे परिणाम सामने हैं। इसके अलावा कर्ज के उठाव में भी बढ़ोतरी हुई है जो बैंकों के लिए अच्छी खबर है।
विश्व बैंक की यह भविष्यवाणी इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि उसने जो रिपोर्ट दी है उसमें भारत, चीन और दक्षिण एशिया के कुछ देशों को छोड़कर तमाम दुनिया के देशों के बारे में निराशाजनक बातें हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं उसके मुताबिक 2 प्रतिशत तक गिर जाएंगी। इसकी वजह यह बताई गई है कि वहां मांग धीमी हो जाएगी और कर्ज की लागत बढ़ जाएगी। इन देशों की नीतियों में अनश्चितता रहेगी जिसका असर उनकी विकास दर पर पड़ेगा। यह उन देशों के लिए भारी चिंता का विषय होगा।
विश्व बैंक की नई रिपोर्ट ग्लोबल इकॉनिमिक प्रॉसपेक्ट्स: डार्केनिंग स्काइज में भारत के विकास की प्रशंसा की गई है और कहा है जीएसटी और नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक सेक्टर की ओर ले जाने में मदद की है। यानी काले धन का इस्तेमाल घट रहा है। देश में बढ़ रही खपत और निवेश से यह संभव हो रहा है जिसमें आने वाले समय में और भी बढ़ोतरी होगी। इसके विपरीत चीन की अर्थव्यवस्था के विकास की दर में गिरावट आएगी और यह 2019 तथा 2020 में गिरकर 6.2 प्रतिशत हो जाएगी। 2021 में यह गिरकर 6 प्रतिशत रह जाएगी। इसके बाद ही इसमें बढोतरी हो सकती है।
साथ ही साथ बैंक ने आगाह भी किया है कि भारत में बढ़ती हुई ब्याज दर और मुद्रा की दरों में उतार-चढ़ाव का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके लिए सरकार को कुछ कदम उठाने ही होंगे। इस समय देश में नए सिरे से उत्पादन बढ़ाने के लिए कोशिश की जा रही है। सरकार ने कई कदम उठाए हैं जिनसे उत्पादन बढ़ेगा। जाहिर है कि इससे खपत भी बढ़ेगी जिसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। दरअसल इस समय देश को बढ़ी हुई खपत की जरूरत है ताकि उद्योगों के पहिये तेजी से चले और न केवल आर्थिक विकास की दर बढ़े बल्कि रोजगार भी बढ़े।
यह भी जानना जरूरी है कि चीन के अलावा हमारे पड़ोसी देशों की स्थिति क्या है? उग्रवाद और धार्मिक कट्टरता से जूझ रहे पाकिस्तान में विकास की दर बेहद धीमी होती जा रही है और अब यह गिरकर 3.7 प्रतिशत हो गई है। वहां मुदास्फीति की दर तेजी से बढ़ती जा रही है जिससे आम जनता को तकलीफ हो रही है। लेकिन हमारे पड़ोसी बांग्लादेश की विकास दर दुनिया में सबसे ज्यादा होने जा रही है। 2018-19 में यह बढ़कर 7 प्रतिशत हो सकती है। वहां औद्योगिक विकास हो रहा है और विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है। श्रीलंका की विकास दर बढ़कर 4 प्रतिशत होने की संभावना है जबकि नेपाल की घटकर 5.9 प्रतिशत हो जाने की संभावना है। वहां के राजनीतिक हालात पर ही आर्थिक विकास निर्भर करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here