कुंभ से पहले युवा कुंभ

प्रयागराज में इसी माह से कुंभ जैसा बड़ा धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन होने जा रहा है। पूरे विश्व से करीब 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है। पहला स्नान 15 जनवरी को है। प्रयागराज कुंभ में ही 31 जनवरी और एक फरवरी को विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद का आयोजन होगा जहां राम मंदिर पर निर्णायक फैसला होने का अनुमान है। इस बड़े आयोजन से पहले लखनऊ में देशभर से जुटे युवाओं का बड़ा कुंभ हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन में कई हजार युवा जुटे। थीम थी ‘विचार नये भारत का’। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबले दिनभर उपस्थित रहे। बोले भी। दोनों ने देश की सांस्कृतिक विरासत को पुष्पित और पल्लवित करने के लिए युवाओं का आह्वान किया। नये भारत के निर्माण में युवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री डाक्टर दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का भाषण हुआ। इन सबके भाषणों के बीच देशभर से जुटे युवाओं ने जो संकेत दिया, वह साफ था। जो मंदिर बनवाएगा, वोट उसी को जाएगा- कुंभ की धर्म संसद से पहले संघ के दो वरिष्ठ प्रचारकों की उपस्थिति में लगा यह नारा बहुत कुछ कहता है। योगी आदित्यनाथ पहले सत्र के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने उद्घाटन किया। उनके मंच पर पहुंचते ही युवाओं की पूरी की पूरी जमात राममंदिर पर उनसे आश्वासन चाहती थी। इसीलिए लगातार नारा लगता रहा- जो मंदिर बनवाएगा, वोट उसी को जाएगा।

योगी ने बोलना शुरू किया तो अपनी सरकार की ओर से प्रयागराज कुंभ के बारे में बेहतरीन सरकारी प्रयासों को विस्तार से बताने के साथ ही राम मंदिर पर भी खुलकर बोले। जो बोले, वह आश्वस्तकारी था। आशय था राम मंदिर पर कोई भी सकारात्मक काम भाजपा-राज में ही होगा। उन्होंने कहा,‘जनता को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। राममंदिर जब भी बनेगा, हम ही बनवाएंगे। जो लोग भगवान राम को मिथक प्रवासी मानते थे, वे अब अपना गोत्र बता रहे हैं, जनेऊ दिखा रहे हैं।  उनका तंज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर था। आगे उन्होंने कहा, ‘वो कौन लोग हैं जो राष्ट्रमाता के प्रति षड्यंत्र कर रहे हैं, जो विखंडन का प्रयास कर रहे हैं, हमको उनकी साजिश को समझना होगा। हर स्तर पर साजिश रची जाएगी, इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। हमें नारों में उलझने की जरूरत नहीं है। आपको निश्चिंत कर दें कि मंदिर का निर्माण जो कोई भी करेगा,जब भी करेगा, हम ही करेंगे।’

भारतीय जाएंगे कुंभ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2019 के प्रवासी भारतीय दिवस को संस्कृति, अध्यात्म और गणतंत्र की त्रिवेणी बनाने की पहल की है। आगामी प्रवासी भारतीय दिवस की जो रूपरेखा तैयार की गई है, उसमें दुनिया भर के सहबन्धु मेहमान काशी, प्रयागराज और राजधानी दिल्ली के कार्यक्रमों में भाग लेंगें। इस छह दिवसीय आयोजन का मुख्य समारोह वाराणसी (काशी) में 21, 22 और 23 जनवरी को होगा। 24 जनवरी को मेहमान प्रयागराज के लिए रवाना होंगे जहां वे लाखों श्रद्धालुओं के साथ गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगाएंगे। 25 और 26 को प्रतिनिधि राजधानी दिल्ली पहुंचेंगे जहां वे राजपथ पर निकलने वाली भव्य परेड के साक्षी बनेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह चौथे और अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि थे। लखनऊ उनका संसदीय क्षेत्र भी है। विशाल पंडाल में उनके प्रवेश करते ही फिर नारा गूजां, जो मंदिर…, वोट उसी को…। बहरहाल जब स्मृति ईरानी के बाद बोलने खड़े हुए तो राममंदिर पर देर तक नारा गूंजता रहा और वह सुनते रहे। जब कहा कि मंदिर बनेगा, तभी लोग चुप हुए। बीते दिनों संसद सत्र से ठीक पहले भाजपा संसदीय दल की बैठक में कई सासंदों ने राजनाथ सिंह से पूछा था कि राम मंदिर कब बनेगा तो उन्होंने कहा था कि धैर्य रखिये। उनका यह बयान दूर तक असर कर गया। उसी की अभिव्यक्ति युवा कुंभ में देखी गयी। इसी सत्र में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बोले। राजनाति में आने से पहले विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय थे। मौका देख उन्होंने बोलने से पहले जय श्रीराम का नारा बुलंद करवाया। पूरा भाषण राममंदिर के ईर्द-गिर्द सिमट गया। इस युवा कुंभ में देशभर से विविध क्षेत्रों की नामचीन हस्तियां भी पहुंचीं। पतंजलि योग पीठ से आचार्य बाल कृष्ण, मुक्केबाज विजेंदर कुमार, पहलवान सुशील कुमार, फिल्मकार मधुर भंडारकर, रवि किशन और सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा ने भी हिस्सा लिया। सभी ने सांस्कृतिक भारत की परिकल्पना पर अपने विचार रखे।

हिंदू चिंतन कुंभ प्रयागराज में
देश में चार स्थानों पर चार कुंभों का आयोजन किया गया। पांचवें और अंतिम कुभ का आयोजन प्रयागराज कुंभ में होगा। उसे सर्व समावेशी हिंदू चिंतन कुंभ नाम दिया गया है। सभी कुंभों के संयोजन का जिम्मा संभाल रहे जय प्रकाश चतुर्वेदी बताते हैं कि हर कुंभ की अलग थीम थी। उनके आयोजन का जिम्मा अलग-अलग विश्वविद्यालयों को दिया गया था। फैजाबाद में आयोजित समरसता कुंभ का जिम्मा राम मनोहर लोहिया अवध विवि को सौंपा गया था। इसका उद्देश्य सामजिक बिखराव पर चिंतन-मनन और उसे रोकने पर केंद्रित था। काशी में हुए पर्यारवण कुंभ का जिम्मा काशी विद्यापीठ के पास था। पर्यावरण संरक्षण की भारत की स्वाभाविक चिंता पर केंद्रित था। युवा कुंभ युवाओं की दिशा और दशा पर केद्रित था। वृंदावन में हुए नारी कुंभ में देशभर से आयीं महिलाओं को प्रमुख रूप से विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने संबोधित किया। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह बताती हैं कि उसमें भारतीय परिवेश में स्त्रियां कैसे मजबूत हों, इस पर विचार किया गया। करीब पांच हजार स्त्रियों ने हिस्सा लिया। 

क्या था युवा कुंभ का विचार? क्यों किया गया इसका आयोजन? राष्ट्रीय संयोजक शतरुद्र प्रताप कहते हैं कि देश में कुल आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है। उनको सही दिशा मिले, इसके लिए 22 और 23 दिसंबर को लखनऊ में बड़ा आयोजन हुआ। मैंने पूरे देश का दौरा किया। करीब 100 बैठकें कीं और 40 से अधिक कार्यक्रम कर युवाओं को युवा कुंभ के उद्देश्यों के बारे में बताया गया। शिक्षा, उद्यमी, प्रोफेशनल, सामाजिक,आध्यात्मिक, कला-संस्कृति, प्रबुद्ध वर्ग, और अन्य आयाम के तहत खेल, युवा और जनजातीय विषयों पर 22 को विस्तार से विचार मंथन हुआ। पूरा देश, यहां तक कि अंडमान निकोबार तथा लद्दाख से युवा आये। सभी अपने खर्चे पर लखनऊ आये। सभी का पंजीकरण किया गया। जितने लोग आये, उससे अधिक लोगों को आने से मना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दोनों दिन युवा कुंभ ट्वीटर पर टाप ट्रेंड करता रहा।

 

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