अगस्ता की मिसेज गांधी कौन?

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मिसेज गांधी कौन है? इसे लेकर रहस्य बना हुआ है। जांच एजेंसियां इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है। बिना इसके सुलझे हेलीकॉप्टर कांड का सच सामने नहीं आएगा। क्रिश्चिन मिशेल ही इसका राजदार है। उसे ही ‘मिसेज गांधी’ को मनाने का काम अगस्ता वेस्टलैंड ने सौंपा था। इसकी वजह थी। मिशेल का उनसे पुराना रिश्ता है। वह इस कदर मधुर है कि जब वे लंदन जाया करती थीं तो उसके घर रूका करती थीं। यह बात अगस्ता वेस्टलैंड की जानकारी में थी। इसलिए जब वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदने की बात चली तो अगस्ता ने मिशेल को ‘मिसेज गांधी’ के लिए लगाया। उसका काम अगस्ता के लिए मिसेज गांधी को तैयार करना था। लेकिन इस बात से हश्के अनभिज्ञ था। यह अगस्ता का दूसरा एजेन्ट था। अगस्ता वेस्टलैंड ने सौदा अपने पक्ष में कराने के लिए दो एजेन्ट लगाए थे। दोनों को अलग-अलग काम सौंपा गया था। मिशेल का काम तय था। हश्के को सेना के अधिकारियों और अन्य लोगों को अगस्ता के पक्ष में करना था। मगर काम को लेकर दोनों के बीच कंपनी ने जो विभाजन किया था, उससे दोनों अनजान थे। इसी वजह से हश्के और लोगों के साथ मिसेज गांधी को भी राजी करने में लग गया।

उसे कंपनी ने रिश्वत देने के लिए 42 मिलियन यूरो दिए थे। वहीं मिशेल को 28 मिलियन यूरो दिया गया था। जब मिसेज गांधी को पता चला कि मिशेल के अलावा हश्के भी लगा हुआ है, तब उन्होंने दोनों एजेन्टों से रिश्वत की मांग की। कहा 21 मिलियन यूरो हश्के दे और 14 मिलियन यूरो मिशेल दे। अगस्ता वेस्टलैंड इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उसने कहा कि 15 मिलियन यूरो हश्के देगा और 14 मिलियन यूरो मिशेल। बात इस पर तय हुई। मिशेल का पैसा मॉरीशस पहुंचा। यहां 9 मिलियन यूरो निकाला गया। वह भी किसी और करेंसी में। फिर उसे मिसेज गांधी के खाते में भेजा गया। इस सौदे में सबसे बड़ा हिस्सा मिसेज गांधी का था। उन्हें 29 मिलियन यूरो मिले थे। इससे जाहिर होता है कि सौदे के लिए इस व्यक्ति की सहमति जरूरी थी। वह जबतक हां नहीं करता तबतक सौदा होना संभव नहीं था। यदि ऐसा है तो निश्चित ही वह बहुत ताकतवर है। उसकी पहुंच सत्ता के उन गलियारों में है जहां रक्षा सौदे जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। तभी अगस्ता ने मिशेल को उसके पीछे लगाया था। लिहाजा मिशेल ही बता सकता है कि मिसेज गांधी कौन है? एजेंसियां उससे यह जानने की कोशिश कर रही है। वह इस सवाल से काफी परेशान भी है। उसने अपने वकील एके जोसेफ से इसका जिक्र भी किया था। वह जोसेफ से पूछता है कि मिसेज गांधी के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। उसका क्या जवाब दिया जाए? यह सवाल उसने तब पूछा था, जब प्रवर्तन निदेशालय, उसे चिकित्सा जांच के लिए ले गया था। वहां एक कागज के टुकड़े पर उसने यह लिखा और जोसेफ की जेब में डाल दिया।

मिशेल ही इसका राजदार है। उसे ही मिसेज गांधी को मनाने का काम अगस्ता वेस्टलैंड ने सौंपा था। इसकी वजह थी। मिशेल का उनसे पुराना रिश्ता है। वह इस कदर मधुर है कि जब वे लंदन जाया करती थी तो उसके घर रूका करती थी।

निदेशालय के लोगों ने यह देख लिया और वह कागज का टुकड़ा जब्त कर लिया। उसमें मिसेज गांधी की चर्चा थी। पूछताछ में मिशेल किसी इतालवी महिला का जिक्र करता है और कहता है कि उसका बेटा प्रधानमंत्री बनने वाला है। इससे दो बातें साफ है- एक, मिसेज गांधी और इतालवी महिला जो भी है, वह राजनीतिक रूप से बहुत ताकतवर है और दूसरा मिशेल उससे परिचित है। तभी तो उसे यह जानकारी रहती थी कि कौन सी फाइल कहां तक पहुंची है। वहां से कब तक आगे बढ़ेगी और उसके लिए किससे कहना होगा। इसका खुलासा उस पत्र में हुआ जो उसने अगस्ता वेस्टलैंड के मुख्यकार्य अधिकार को लिखा। वह पत्र 31 जुलाई 2009 को लिखा था। मिशेल लिखता है कि अगस्ता वेस्टलैंड की फाइल आगे बढ़ रही है। रास्ते में आने वाली सभी रूकावटों को दूर कर दिया गया है। बस मेरी एक गुजारिश है। जब तक सौदा फाइनल नहीं हो जाता तबतक किसी का बयान न जारी किया जाए। सौदे के लिए यही बेहतर होगा। वह आगे लिखता है कि फाइल अभी प्रधानमंत्री कार्यालय में है। पिछली रात कैबिनेट की बैठक हुई थी, पर उसमें रक्षा से जुड़े मुद्दे पर बात नहीं हुई। हालांकि प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को एक कैबिनेट नोट दिया जो अगस्ता सौदे से जुड़ा था। उन्होंने सब से कहा कि यदि किसी को कुछ कहना हो तो वह तुरंत कैबिनेट सचिव को सूचित करें ताकि अगली कैबिनेट बैठक में उसे निपटाया जा सके। कारण, प्रधानमंत्री अगस्ता सौदे को लेकर देरी नहीं चाहते थे। वे जल्द से जल्द इसे निपटाना चाहते थे। बस वित्तमंत्री की तरह से अड़चन है। यह बात मिशेल ने 29 जुलाई 2009 के पत्र में लिखी। उसने अगस्ता वेस्टलैंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को बताया कि वित्तमंत्री को शायद कुछ आपत्ति है। वे संभवत इस सौदे को लेकर खुश नहीं है। उन्हें हेलीकॉप्टर की कीमत पर एतराज है। उनका कहना है कि इससे सस्ता हेलीकॉप्टर भी खरीदा जा सकता है। हमें सस्ते विकल्प पर ध्यान देना चाहिए। इससे सौदा खतरे में पड़ सकता था। इसलिए मैंने उनके एक निकट सहयोगी को उनसे बात करने के लिए कहा। वित्तमंत्री ने उस सहयोगी को नाराजगी की असल वजह बताई।

उन्होंने कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदने का निर्णय कैबिनेट ने बिना मुझ से पूछे लिया। मुझे निर्णय प्रक्रिया में शामिल तक नहीं किया गया। यह तो मेरा अपमान है। इस वजह से फाइल वित्त मंत्रालय में अटकी हुई थी। लेकिन 31 जुलाई के पत्र से साफ है कि वह दो दिन के भीतर प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच गई। वहां प्रधानमंत्री ने तय किया कि 10 अगस्त 2009 को जो सीसीएस (कैबिनेट कमिटी फॉर सिक्युरिटी) की बैठक होगी, उसमें अगस्ता वेस्टलैंड सौदे पर मुहर लगा दी जाएगी। अगर उस समय वित्तमंत्री ने कोई रूकावट पैदा की तो उन्हें मनाने का दूसरा रास्ता निकाल लिया जाएगा। जाहिर इतनी गोपनीय जानकारी उसे मिसेज गांधी के रसूख की वजह से ही मिल रही थी। यह सौदा भी उनकी वजह से ही हुआ। इसकी चर्चा इटालियन कोर्ट के निर्णय में भी है। उसमें मिसेज गांधी का जिक्र चार बार आया है। किसी अहमद पटेल नाम के एक व्यक्ति की भी चर्चा निर्णय में है। उसी में मनमोहन सिंह नाम के व्यक्ति का भी जिक्र है। निर्णय के मुताबिक दोनों व्यक्ति मिसेज गांधी के वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार हैं। उसके मुताबिक जो मिसेज गांधी नाम की महिला है, वह टक8 में उड़ान नहीं भरना चाहती है। वही ‘डाइविंग फोर्स’ है। इसका सीधा मतलब है कि हेलीकॉप्टर सौदा के लिए मिसेज गांधी का राजी होना बेहद जरूरी था। उनकी रजामंदी के बाद ही सौदा हुआ। पर यह सवाल यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि मिसेज गांधी कौन है? मिशेल ही शिनाख्त कर सकता है। मगर मिशेल शातिर अपराधी की तरह खामोश है। वह महज संकेतों में बात कर रहा है और मिसेज गांधी की पहचान करने से कतरा रहा है।

 

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