राम मंदिर का सवाल सबसे ऊपर

राम मंदिर का सवाल इस समय सबसे ज्वलंत मुद्दा बन गया है। पक्ष और विपक्ष दोनों मुखर हैं। 25 नवंबर को जब अयोध्या और नागपुर में संत समाज के नेतृत्व में रैली हो रही थी, उसी समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी मंदिर के सवाल पर कांग्रेस को घेरे में लिया। नागपुर में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विधि सम्मत रास्ता निकालने की बात की। उधर अयोध्या में संतों ने मंदिर के सवाल को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

अयोध्या में 25 नवंबर 2018 को 6 दिसंबर 1992 जैसा दृश्य था। लाखों राम मंदिर समर्थक जुटे थे। उत्साह भी वैसा ही था। राम मंदिर के निर्माण की व्यग्रता थी। मंच से लेकर भीड़ तक आक्रोश का भाव कांग्रेस और उच्चतम न्यायालय के खिलाफ देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस बात का आग्रह किया गया कि मंदिर निर्माण की बाधाओं को अतिशीघ्र दूर करें। उधर नागपुर में भी कुछ वैसा ही दृश्य था। वहां तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंदिर के लिए विधिसम्मत रास्ता तलाशे जाने की बात कही। साध्वी ऋतंभरा के बोल भी कांग्रेस के प्रति आक्रोश से भरे थे।

उन्होंने कहा कि अब और इंतजार नहीं। अयोध्या में 127 संप्रदायों के संत जुटे थे। विश्व हिंदू परिषद के अंतराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने साफ किया कि संपूर्ण राम जन्मभूमि रामलला की है। उसका बंटवारा स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने मुस्लिम वक्फ बोर्ड को उसका वादा याद दिलाया। कहा, ‘उसने वचन दिया है कि अगर अयोध्या में मंदिर सिद्ध हो गया तो हम दावा छोड़ देंगे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी माना है कि मस्जिद से पहले उस स्थान पर हिंदू मंदिर था। मेरा यही कहना है कि मुस्लिम वक्फ बोर्ड मुकदमा वापस ले और स्वेच्छा से उस स्थान से अपना दावा छोड़ दे।’ उनके इस वक्तव्य को मंच का पूरा समर्थन मिला और भीड़ ने हाथ उठाकर अपनी सहमति जतायी। अयोध्या से लेकर नागपुर तक राम मंदिर के लिए कानून की बात करते समय सभी संतों ने उच्चतम न्यायालय में सुनवाई में हो रही देरी की तरफ इशारा किया। रामानुजाचार्य राघवाचार्य ने अयोध्या की सभा में कहा कि हम न्यायालय में राम मंदिर की लड़ाई लड़ रहे हैं। मामला न हल हुआ तो देशभर के 40 हजार मंदिरों की लड़ाई शुरू होगी।

उन्होंने कहा कि आतंकियों के लिए अपना दरवाजा खोलने वाला सुप्रीम कोर्ट अयोध्या पर सुनवाई पर क्यों विलंब कर रहा है? स्वामी हंसदेवाचार्य ने कपिल सिब्बल और राजीव धवन का नाम लेकर कहा कि कांग्रेस के इन दोनों एजेंटों ने न्यायालय में सुनवाई टालने की बात कहकर आस्था से खिलवाड़ किया है। यह हिंदू समाज का अपमान है। स्वामी राम भद्राचार्य ने तो एक केंद्रीय मंत्री से वार्ता का हवाला देकर यहां तक दावा किया कि मोदी सरकार 11 दिसंबर के बाद राम मंदिर पर सकारात्मक कदम उठायेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मामले को लेकर न्यायालय में विलंब हो सकता है लेकिन जनता की अदालत में अब विलंब नहीं होगा। जनता की अदालत न विलंब करती है और न ही धोखा देती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने साफ कहा कि राममंदिर मामले में संतों का निर्णय हमें स्वीकार है।

यह आस्था का विषय है। उन्होंने कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए कहा कि हिंदू समाज के ही लोगों ने न्यायालय में खड़े होकर कहा कि मंदिर मामले पर सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हो। उनका इशारा कांग्रेस सांसद और वकील कपिल सिब्बल की ओर था। यह भी कहा कि देश के हिंदुओं को सोचना होगा कि जो लोग मंदिर निर्माण में अड़ंगा डाल रहे हैं, कौन लोग हैं, उन्हें चिन्हित करना होगा। उन्होंने संघ की भूमिका भी बोला। कहा कि राममंदिर पर संघ न चैन से बैठा है और न किसी को चैन से बैठने देगा। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपालदास को मोदी और योगी से मंदिर की बाधा दूर किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें मंदिर निर्माण का रास्ता तैयार करें ताकि उसका शीघ्र ही निर्माण शुरू हो सके।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में 221 मीटर ऊंची राम की प्रतिमा स्थापित करवाने का फैसला किया है। इसमें राम की 151 मीटर ऊंची मूर्ति, मूर्ति के ऊपर 20 मीटर ऊंचा छत्र और 50 मीटर का बेस (आधार) होगा।

अयोध्या में स्थापित होगी 221 मीटर ऊंची राम की प्रतिमा

अयोध्या में भगवान राम की विशालकाय मूर्ति
की स्थापना की जायेगी। यह निर्णय उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है। यह
मूर्ति 221 मीटर ऊंची होगी। इसमें राम की 151
मीटर ऊंची मूर्ति, मूर्ति के ऊपर 20 मीटर ऊंचा
छत्र और 50 मीटर का बेस (आधार) होगा।
इस 50 मीटर ऊंचे बेस के अन्दर ही भव्य एवं
अत्याधुनिक संग्रहालय भी बनाया जायेगा।
इसमें सप्तपुरियों में अयोध्या का इतिहास,
इक्ष्वाकु वंश के इतिहास में राजा मनु से लेकर
वर्तमान राम जन्मभूमि तक का इतिहास,
भगवान विष्णु के समस्त अवतारों का विवरण
होगा। इसके अतिरिक्त सनातन धर्म के विषय
में आधुनिक तकनीक पर प्रदर्शन की व्यवस्था
होगी। इस निर्माण में लगभग 200 एकड़ भूमि
की आवश्यकता पड़ेगी। इसे बनाने में लगभग
4 वर्ष का समय लगेगा।
योगी ने 25 नवम्बर की पूर्व संध्या पर इस
मूर्ति निर्माण की घोषणा की। सूत्र बताते हैं कि
गुजरात में नर्मदा नदी पर देश के उप प्रधानमंत्री
एवं गृहमंत्री सरदार बल्लभाई पटेल की मूर्ति
स्टैच्यू आॅफ यूनिटी बनाने वाले मूर्तिकार राम
सुतार की सलाह ले ली गयी है। दुनिया भर के
हिन्दुओं को उनकी जड़ों से मजबूती से जोड़नें
की मंशा के तहत इस मूर्ति का निर्माण कराया
जा रहा है। यहां प्रस्तावित निर्माण कार्याें में राम
की भव्य मूर्ति एवं रामलीला मैदान, वनवास का
दृश्य, रामकुटिया, गुरुकुल, संग्रहालय, वैदिक
पुस्तकालय, रिवर फ्रन्ट एवं घाटों के जरिए
सरयू नदी का सुंदरीकरण आदि के निर्माण के
लिए विश्व भर के हिन्दुओं से दान की अपील
करेगी। अपर मुख्य सचिव सूचना, पर्यटन
एवं धर्मार्थ कार्य अवनीश कुमार अवस्थी के
अनुसार दान से मिले पैसे से ही यह निर्माण
कार्य कराया जायेगा। विशेष परिस्थितियों में
आवश्यकता पड़ने पर ही सरकारी खजाने
का इस्तेमाल किया जायेगा। संत तुलसीदास
कृत श्रीराम चरित मानस में राम के मर्यादा
पुरुषोत्तम स्वरूप का ही वर्णन है। कहीं-कहीं
इनके पराक्रमी स्वरूप का भी वर्णन है। इसी
के अनुरूप इस मूर्ति में श्रीराम के इन दोनों
स्वरूपों का दर्शन होगा।

 

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