आस्था का संगम

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संत-महात्मा और नागा संन्यासी संगम की रेत पर अपनी धुनी रमा चुके हैं। श्रद्धालुओंं का आगमन शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुये कुंभ क्षेत्र में पहुंच रहा है। श्रद्धालुओं में कौतूहल इस बात को लेकर है कि वे इससे पहले जब-जब संगम आये तो न ऐसी सड़कें थीं और न ऐसे चौराहे थे? दरअसल कुंभ के साथ-साथ प्रयागराज शहर की भी शक्ल बदल गयी है।

 

प्रयागराज में ‘भव्य कुंभ, दिव्य कुंभ’ महज एक नारा नहीं है। वहां जाने और नजदीक से देखने पर वास्तव में यह भव्य और दिव्य है। इसे भव्यता दी है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। छह साल पहले अखिलेश की सरकार में संगम की रेत पर लगा कुंभ रेतीले भू-भाग पर ही सिमट गया था, अब यह संगम के बडे भू-भाग के साथ-साथ पूरे शहर में अपनी भव्यता बिखेर रहा है। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि योगी ने विश्व के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए सरकारी खजाना खोल दिया। अखिलेश सरकार ने मुट्ठी बांधकर मात्र परम्पराओं का निर्वाह किया था। योगी सरकार ने ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि केवल कुंभ कार्यों के लिए खर्च किये हैं। अखिलेश सरकार द्वारा मात्र 200 करोड़ में कुंभ निपटा दिया था।
कहा तो यहां तक जाता है कि निर्धारित बजट में भी तमाम विभागों के बजट उस समय खर्च होने से रह गये थे। यह भी गौरतलब है कि योगी सरकार लगभग 13 करोड़ श्रद्धालुओं को कुंभ दर्शन व संगम में डुबकियां लगवाने के लिए प्रयासरत है। पिछले कुंभ में यह आंकड़ा महज 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आस-पास सिमट कर रहा गया था। योगी ने जब सत्ता संभाली तो उन्होंने कई क्षेत्रों में कदम उठाये, लेकिन उनके महत्वपूर्ण कार्यों में एक कार्य कुंभ के आयोजन को अपने हाथ में लेना था। योगी सरकार के पहले तक कुंभ मेला के आयोजन के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की जाती थी, लेकिन इस बार सरकार ने प्रयागराज कुंभ मेला प्राधिकरण 2018 का गठन करते हुये अर्धकुंभ को कुंभ और कुंभ को महाकुंभ की राजकीय मान्यता दी। कुंभ का आयोजन इसी प्राधिकरण के तहत किया जा रहा है।
सरकारी एजेंडे में प्रयाग कुंभ को शामिल करने के बाद इसके लिए तैयार हुई योजना को समयबद्व ढंग से पूरा कराना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने चुनौती स्वीकार की और निर्धारित योजनाओं की समीक्षा का कार्य स्वयं किया। कुंभ के प्रति उनका लगाव इसी से पता चलता है कि वह समीक्षा के लिए अब तक आधे दर्जन से अधिक बार आये और इसी क्रम में कुंभ को दिव्य बनाने के लिए जिले के प्राचीन नाम प्रयागराज को गौरव प्रदान किया। यह कुंभ इलाहाबाद कुंभ के बजाय प्रयागराज कुंभ के नाम से जाना जाएगा।
प्रयागराज कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद खासी रुचि ले रहे हैं। मोदी 16 दिसम्बर को भी प्रयाग आकर कुंभ के निर्विघ्न आयोजन के लिए पूजा-पाठ करने के साथ ही 360 परियोजनाओं, जिन पर 4048 करोड़ का खर्च आएगा, का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी कर चुके हैं। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने अक्षयवट एवं सरस्वती कूप को आम श्रद्वालुओं के दर्शनार्थ खोले जाने की घोषणा की थी। मोदी से पहले पिछले 5 दशकों में किसी भी प्रधानमंत्री ने कुंभ में आना तो दूर, व्यवस्था में भी रुचि नहीं दिखाई थी।
योगी सरकार ने कुंभ को निर्विघ्न सम्पन्न कराने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। पूरे मेला क्षेत्र में 22 पांटून पुल बनाये गये हैं ताकि विश्व के इस सबसे बड़े मेले में उमड़ने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के समक्ष कोई संकट कोई न आने पाये। पिछले कुंभ में परिवहन व्यवस्था इतनी लचर थी कि रेलवे जैसे विभागों से भी सरकार का बेहतर ताल-मेल नहीं था। परिणाम यह हुआ था कि तब इलाहाबाद जंक्शन पर भीड़ के दबाव से एक ओवरब्रिज टूट गया था, जिसमें तीन दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गयी थी। श्रद्धालुओं की सुगमता के दृष्टिगत योगी सरकार ने इस बार सडक, रेलवे और हवाई यात्रा के लिए बेहतर प्रयास किये हैं। केवल सरकार की ओर से 8 हजार मेला स्पेशल बसों की व्यवस्था की गयी है, जो प्रदेश ही नहीं, सीमावर्ती राज्यों से श्रद्धालुओं को संगम तक ले आएंगी। सबसे खास बात यह है कि इससे अलग 500 शटल बसें प्रयागराज में चलाई जा रही हैं, जो बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट तथा सरकार द्वारा बनाये गये पार्किंग स्थलों से श्रद्धालुओं को कुंभ क्षेत्र तक सेवा देंगी। मुख्य स्नान पर्वों के समय इन शटल बसों से श्रद्धालु मुμत में कुंभ क्षेत्र तक पहुंचेगे। रेलवे कुंभ पर्व तक 800 स्पेशल रेलगाड़ियां को चलाने के लिए अपनी तैयारी कर चुका है। इसमें 350 से अधिक की समय सारिणी भी जारी की जा चुकी है। सरकार के उल्लेखनीय प्रयासों में एक है प्रयागराज को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ना। मात्र एक वर्ष में प्रयागराज में एक नया आधुनिक एयरपोर्ट तैयार हो गया है।
कुंभ पर मंडराते आतंकी खतरे से श्रद्धालुओं की सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य बनाये रखने के लिए कुंभ क्षेत्र में ही इन्ट्रीग्रेटेड कंन्ट्रोल कमाण्ड सेन्टर बनाया गया है जो कुंभ क्षेत्र एवं शहरों में लगे 10 हजार से अधिक आधुनिक सीसीटीवी कैमरों से जुड़ा हुआ है। इस कमाण्ड में सारी सुरक्षा एजेन्सियों के साथ-साथ पुलिस, फायर ब्रिगेड एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के प्रतिनिधि शहर एवं मेले की हर गतिविधि पर नजर रखे हुये हैं।
संत-महात्मा और नागा संन्यासी संगम की रेती पर अपनी धुनी रमा चुके हैं। श्रद्धालुओंं का आगमन शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुये कुंभ क्षेत्र में पहुंच रहा है। आने वाले श्रद्धालुओं में कौतहुल इस बात को लेकर है कि वे इससे पहले जब-जब संगम आये तो ऐसी सड़कें थीं और न ऐसे चौराहे थे? दरअसल कुंभ के साथ-साथ शहर की भी रूपरेखा बदल गयी है। सड़कें हों या दीवारें या फिर पार्क या चौराहे, सब मेट्रो शहर की तर्ज पर नई एवं अद्भुत छटा बिखेर रहे हैं। शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को धर्म नगरी में होने का अहसास कराने के लिए सड़कों के किनारे बने भवनों, दीवारों पर पेंटिंग के सहारे धर्म शास्त्रों में वर्णित कथाओं से संबंधित चित्र उकेरे गये हैं वह श्रद्धालुओं को अनोखा लग रहा है। शहर के 55 चौराहों को नया एवं भव्य रूप देते हुये उनके अंदर कहीं समुंद्र मंथन तो कहीं पर साधना में लीन संत, तो कहीं राणा प्रताप के चेतक की मूतियां बनाई गयी हैं। कुंभ क्षेत्र में सड़कें हों या थाने सबके नाम कहीं न कहीं धर्म पर आधारित हैं।

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