विश्व संचार क्षितिज तक फैला भारत

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मार्च में जब देश में कई तरह की गतिविधि और संसदीय उलझनें चल रही थीं, स्पेन के खूबसूरत शहर बार्सिलोना में भारत की तेज रफ्तार संचार क्रांति की प्रशंसा हो रही थी।

दरअसल, विश्व के अलग अलग हिस्सों में मौजूद मोबाइल कंपनियों के कर्णधारों और कई देशों के आला सरकारी दलों के साथ बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों  की जमात हर साल भविष्य के मोबाइल व संचार टेक्नोलॉजी की रूपरेखा तय करती है।

बार्सिलोना में देखने में आया कि इस तरह के विचार विमर्श में भारत की भागीदारी हाल के वर्षों में बहुत बढ़ गई है। यह स्थिति हमारी बुनियादी संचार सेवाओं की ताकत का ही प्रमाण है कि दुनिया हमसे भी कुछ जानना चाहती है।

लगता है कि उच्च तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि वाले संचार मंत्री मनोज सिन्हा की देश में संचार क्रांति की समझ भी मायने रखती है।

सम्मेलन में  उन्होंने स्वयं संसाधनों को भविष्य की पीढि़यों के लिए बचाते हुए विकास के लक्ष्य को हासिल करने का और ‘डिजिटल इनक्ल्यूजन’ का विजन प्रस्तुत किया।

 

बार्सिलोना में सम्पन्न मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस के संदर्भ में यह देखना खास है कि भारत तेज गति के ब्राडबैंड नेटवर्क को लगभग सवा लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचा चुका है।

 

‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल’और ‘डिजिटल इनक्ल्यूजन’ के एजेंडों के अनुसार वैश्विक संचार में भारत ने अपने संचार और मोबाइल टेक्नोलॉजी के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।

बार्सिलोना कांफ्रेंस तक भारत में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की चर्चा बनी रहती, यदि संचार मंत्री ने अपने देश में मोबाइल स्पेक्ट्रम के बंटवारे और इस्तेमाल के तरीकों को परखे हुए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ढालने का विस्तृत विवरण नहीं दिया होता।

उनके दावे की पुष्टि के लिए दुनिया की कुछ मशहूर मोबाइल कंपनियां वहां मौजूद थीं। दरअसल, बाहर की इन कंपनियों को भी अब अहसास हो चला है कि भारत में मोबाइल टेक्नोलॉजी पैसा कमाने का साधन भर न होकर जनता तक मोबाइल और इसकी सेवाओं को पहुँचाने का जरिया बन गया है।

इसीलिए यहां की सरकार लोगों की जिंदगी और जागरूकता की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र में खर्च करना चाहती है। यही कारण है कि 4 जी मामले में दूसरों का अनुसरण करने वाला यह देश संभावी 5 जी तथा अन्य आधुनिकतम मोबाइल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की दिशा में अग्रसर रहना चाहता है।

संचार मंत्री इस बारे में जगह-जगह उदाहरण देते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण हुआ तो अंदर के ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग मोबाइल फोन पर सीधे उनका भाषण सुन रहे थे।

 

अमेरिका सहित विश्व भर की मोबाइल और कंप्यूटर तकनीकी क्षेत्र में भारत के पेशेवरों का रूतबा कायम हो चुका है।

 

वह इसे भारत में संचार क्रांति की दिशा में एक शुभ संकेत बताते हैं। देश में संचार क्रांति का ठोस जमीनी आधार दिख रहा है।

देश की बड़ी युवा पीढ़ी एक ‘टेक्नोसेवी’ आबादी के रूप में विकसित हुई है जो हिन्दी और अन्य स्थानीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी में भी समान रूप से दक्ष है।

अमेरिका सहित विश्व भर की मोबाइल और कंप्यूटर तकनीकी क्षेत्र में भारत के पेशेवरों का रूतबा कायम हो चुका है। आर्थिक मोर्चे पर आधार और पैन के मोबाइल और बैंकों से लिंक होने के बाद साइबर और अन्य वित्तीय गड़बड़यिां सामने आ रही हैं जो कि अभी तक छिपी रही थीं।

सामाजिक रूप से निशक्त आबादी की दृष्टि से टार्गेटेड पब्लिक डिस्ट्रब्यिूशन में आधार कार्ड के जरिए राशन वितरण होने के बाद कुछ कठिनाइयों के बाद भी अन्तत: पात्र जनता को ही इसका लाभ मिल रहा है।

यही स्थिति स्कूल कॉलेज स्तर पर वजीफे के बंटवारे में भी है। आर्थिक स्रोतों के लीकेज को रोकने भर से ही सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं अपने सही अंजाम तक पहुंचती दिख रही हैं।

भारत में इस संचार क्रांति के पीछे ध्यान देना होगा कि पिछली सरकार में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के विवाद की जगह अब हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेक्ट्रम की कीमत और स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल की शर्तों पर बात कर रहे हैं। इन मुद्दों पर बार्सिलोना जैसी कांफ्रेंस में भी भारत का रवैया सतर्क दिखता है।

आज हमारा देश अपनी बुनियादी तकनीकी के ढांचे की बदौलत और एक बड़ी संभावनाशील ग्राहक आबादी के आधार पर  वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

तकनीकी के स्तर पर 5 जी तकनीकी के प्रयोग को लेकर सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा मूलभूत ढाँचे के विकास की तैयारी उत्साहित करने वाली है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत भी संचार प्रौद्योगिकी में विश्व के शीर्ष पर रहे कई देशों के साथ होड़ में शामिल है।

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