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Monday, April 22, 2019
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र

आपा पर विश्वास का संकट

आम आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कल तक जिस तीर से अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाते थे, उसी तीर से वे घायल हो गए हैं। उनके खास सिपहसालारों में शामिल रहे कपिल मिश्रा ने ही उनका राजनीतिक आखेट करलिया। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के तीर से आम आदमी पार्टी का आदर्श लहूलुहान और नैतिकता तार–तार हो गई है। कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर दो करोड़ रुपए नकद लेने का आरोप लगाया है। केजरीवाल पर चंद लोगों के इशारे पर काम करने और पार्टी के सिद्धांतों से भटकने का आरोप भी है। कपिल ने केजरीवाल के भ्रष्टाचार की शिकायत सीबीआई और एसीबी से की है।  अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में आंदोलनकारी अरविंद केजरीवाल जिस तरह राजनेताओंपर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कागज का पुलिंदा लहराते हुए जवाब मांगते थे, अब राजनेताकेजरीवाल से उसी शैली में जवाब मांगा जा रहा है।उन्हें कोर्ट में घसीटकर लाने की प्रतिज्ञा उनके पूर्वसहयोगी कर रहे हैं दूसरी तरफ केजरीवाल जवाब देने की बजाय लोगों का ध्यान भटका रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देने की जगह विधानसभा में ईवीएम पर चर्चा कर रहे हैं।    आम आदमी पार्टी का आंतरिक विरोधाभास और एक दूसरे के प्रति अविश्वास का भाव इसे एक गहरे संकट में ला खड़ा किया है। अरविंद केजरीवाल के सहयोगी रहे कपिल मिश्रा ने उनपर जो आरोप लगाए हैं, उससे पार्टी की छवि दरक गई है। बगावती तेवर अख्तियार किए कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल को पहले पत्र लिखकर और फिरएक पत्रकार वार्ता कर पार्टी के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार पर जवाब मांगा। केजरीवाल पर सत्येंद्र जैन सेदो करोड़ रुपए नकद लेने और संबंधी सुरेंद्र बंसल के पक्ष में जमीन का सौदा कराने का   आरोप लगाया है। इसके साथ ही टैंकर घोटाले की जांच रिपोर्ट छिपाने और आपा के पांच नेताओं संजय सिंह, आशीष खेतान, सत्येंद्र जैन, राघव चड्ढा और दुर्गेश पाठक की विदेश यात्राओं पर खर्च हुई धन राशि की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।    आम आदमी पार्टी का आंतरिक कलह अब सड़क पर आ गया है। कुमार विश्वास के हार के कारणोंकी समीक्षा और पार्टी के कुछ नेताओं पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के बाद शुरू हुईकलह शांत होने का नाम नहीं ले रही है। अब विवाद इतना गहरा गया है कि पार्टी नेता एक दूसरे परकीचड़ उछालने लगे हैं। राजनीतिक हलकों में पार्टी के दो फाड़ होने की अटकलें लगाईं जा रही हैं। कुछ दिनों पूर्व कुमारविश्वास ने अपने बारे में निर्णय लेने की घोषणा करके अरविंद केजरीवाल को घुटने टेकने को मजबूरकर दिया था। अब वह सिलसिला काफी आगे बढ़ गया है। तब केजरीवाल ने कुमार विश्वास की मांगको मानते हुए उन्हें राजस्थान का प्रभारी और आरोप लगाने वाले ओखला   विधायक अमानतुल्ला खानको पार्टी से निलंबित कर दिया गया। इस प्रकरण की जांच के लिए एक समिति बना दी गई है। इस जांच समिति की अध्यक्षता पार्टी सचिव पंकज गुप्ता करेंगे, जबकि आशुतोष और आतिशी मार्लेना इसके सदस्य होंगे। जो दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अंतिम फैसला करेंगे। लेकिन इसके बाद केजरीवाल अपनी राजनीतिक चाल चलते रहे। जांच कमेटी के गठन के दूसरे दिनही अमानतुल्ला खान को छह कमेटियों का सदस्य बना दिया। इसके बाद ही कपिल मिश्रा को यह आभास हुआ कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा और भ्रष्टाचारियों पर लगे आरोपों की जांच नहींकरेगी, बल्कि ऐसी मांग करने वालों को राजनीतिक रूप से ठिकाने लगा दिया जाएगा। ऐसा हुआ भी, उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया। कपिल मिश्रा ने भी अपना रास्ता तय कर लिया। कपिल मिश्रा के अचानक बगावती तेवर अख्तियार कर लेने की वजह क्या है? आम लोगों की इस बातको जानने में काफी दिलचस्पी है। राजनीतिक हलकों में इस घटना को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्वऔर कार्यशैली को चुनौती देने के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ इस विवाद को सत्ता संघर्ष केतौर पर भी देखने वालों की कमी नहीं है। यह बात तो तय है कि इस पूरे मामले में आपा का वैचारिक खोखलापन और सैद्धांतिक पतन उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में एक बात और साफ होकर उभरी है कि दूसरी पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाने वाले अपने नेताओं पर भी आरोप लगाने और उनके खिलाफ षड्यंत्र करने में भी पीछे नहीं हैं। आम आदमी पार्टी में बगावत का सुर तेज हो गया है। पार्टी के अंदर से ही अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार  के आरोप लग रहे हैं।जवाब देने के बजाय केजरीवाल मौन है। सूत्रों की माने तो पंजाब और गोवा में खराब प्रदर्शन के बाद ही पार्टी के अंदर आपसी अंतर्द्वंद्व तेज होगया था पार्टी के  अंदर यह मानने वालों की संख्या काफी अधिक है कि पंजाब में टिकट बंटवारे मेंखामी और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न घोषित करने के कारण हार हुई।चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में स्वयं अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी संजय सिंह की भूमिका रही, इसलिए कोई खुले तौर पर कुछ बोलने से हिचकता रहा। फिलहाल, दबे जुबान से पार्टी के अंदर हार के कारणों की समीक्षा और उसके जिम्मेदार पर कार्रवाई की मांग होती रही। समीक्षा की मांग करने वालों को राजनीतिक रूप से ठिकाने लगाने में जुट गए। जिसका परिणाम सामने है। अब पार्टी में बगावत और फूट पड़ गई है। आम आदमी पार्टी का एकधड़ा लंबे समय से अवसर की तलाश में था। जो मौका पाते ही कुमार विश्वास के साथ खड़ा हो गयाथा। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार के कामकाज और केजरीवाल के आस–पास की मंडली के कारनामों से ऐसे कार्यकर्ता काफी निराश हैं। उपेक्षित और आदर्शवादी कार्यकर्ता लंबे समय से मंच और माध्यम की तलाश में थे। सूत्रों के अनुसारजब कुमार विश्वास की बात को भी टाला जाने लगा तो उन्हें यह बात नागवार लगी। अब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व और कार्यशैली के साथ ही दिल्ली सरकार के कामकाज, पार्टी के आदर्श और भ्रष्टाचार से समझौता करने का सवाल प्रमुख बन गया है। सूत्रों का कहना है कि आरोप लगने पर केजरीवाल खेमा ने आमनतुल्ला खान को आगे करके कुमारविश्वास पर भाजपा से मिली भगत का आरोप लगाया। जिससे मामला और बिगड़ गया। अमानतुल्ला ने आरोप लगाया कि कुमार विश्वास भाजपा के इशारे पर पार्टी विधायकों को तीस- तीस करोड़ देने का प्रलोभन दे रहें हैं। जिससे अरविंद केजरीवाल की सरकार गिराई जा सके। वे भाजपा केवरिष्ठ नेताओं के संपर्क में है।दूसरा आरोप कुमार विश्वास के एक वीडियो को लेकर लगाया गया, जिसमें वे कश्मीर में सुरक्षाबलों पर हमला करने वालों की निंदा कर रहे हैं। इस वीडियो के आने परभी कुमार विश्वास को आलोचना झेलनी पड़ी थी। कुमार के बगावती तेवर और उन्हें बदनाम करने पर पार्टी के अंदर बवंडर खड़ा हो गया कपिल मिश्राऔर कुछ विधायक कुमार विश्वास के पक्ष में खड़े हो गए। अपने ऊपर लगे आरोपों पर कुमार विश्वासने कहा कि अमानतुल्ला तो मुखौटा हैं। इसके पीछे दूसरे लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, ”यदि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर किसी ने ऐसा आरोप लगाया होता तो उसे पांचमिनट के अंदर बाहर का रास्ता दिख दिया गया होता।” कुमार विश्वास ने इशारों–इशारों में ही पार्टी नेतृत्व को यह बता दिया कि अब पानी सर से ऊपर होगया है। वे जल्द ही कोई निर्णय करेंगे।  अरविंद केजरीवाल ने अपने सरकारी आवास पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से दोकरोड़ रुपए नकद लिए। उस समय मैं वहां मौजूद था। – कपिल मिश्रा, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री पार्टी नेतृत्व पर उन्होंने मुख्य रूप से तीन आरोप लगाए। पहला– पार्टी में व्यक्ति पूजा बंद हो। दूसरा– ईवीएम पर दोष देना बंद करके हार के कारणों पर गंभीरता से विचार किया जाए। तीसरा– बंद कमरेमें फैसला लेना बंद हो। नीतिगत निर्णय लेने से पहले उस विषय पर कार्यकर्ताओं की भी राय ली जाए। इसके अलावा उन्होंने दो महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। पहला– पार्टी के कुछ नेताओं और मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप होने के बावजूद पद बने रहना। दूसरा– पार्टी में एक व्यक्ति और एक पद का सिद्धांत लागू हो। सूत्रों के अनुसार पहली मांग में उनका इशारा संजय सिंह और सत्येंद्र जैन की तरफहै तो दूसरे में वे अप्रत्यक्ष रूप से केजरीवाल को मुख्यमंत्री या पार्टी संयोजक पद में से कोई एक छोड़ने का इशारा कर रहे थे।  मीडिया में इन आरोपों के आने के बाद केजरीवाल खेमे का होश उड़ गया। वे कुमार विश्वास कोमनाने में जुट गए। मनाने और रूठने के बीच दोनों पक्षों की तरफ से बयानबाजी जारी रही। दिल्ली केउप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि कुमार विश्वास को अपनी बात पार्टी मंच पर कहनी चाहिए थी। फिर मामले को सुलझाने के लिए आम आदमी पार्टी के राजनीतिक मामलों की शीर्ष समिति पोलिटिकल अफेयर कमेटी (पीएसी) की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में कुमार विश्वास नहीं आए।बाद में अरविंद केजरीवाल के आवास पर आयोजित पीएसी की बैठक हुई जिसमें कुमार विश्वास कीमांग से सहमति जताते हुए मामले को रफा दफा किया गया। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कुमार विश्वास प्रेस से मुखातिब हुए कुमार विश्वास नेमीडिया से जो कहा वो काबिलेगौर है। उन्होंने कहाकि, ”पार्टी में कुछ विचार–विमर्श की जरूरत थी, जो अब शुरू हो गया। मेरे साथ खड़े रहने वाले लोगों का आभारी हूं। किसी को गलतफहमी न रहे किये संवाद, पार्टी के वर्चस्व को लेकर है। पहले ही कह चुका हूं मैं कभी पार्टी चीफ या सीएम नहीं बनूंगा।” इस पूरे प्रकरण में कुमार विश्वास का कहना है कि, ‘वे पद और पार्टी में वर्चस्व के लिए ऐसा नहीं कररहे हैं। बात आदर्शों और सिद्धांतों की है।‘ लेकिन आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता उनकी बात सेसहमत नहीं दिखते हैं। भाजपा नेता शाजिया इल्मी कहती  हैं कि, ”जब मैंने पार्टी छोड़ी थी, तब भीवही मुद्दे थे, जिसे आज कुछ लोग उठा रहे हैं। लेकिन उस समय वे मौन रहे।” आगे वे कहती हैं कि असल में यह विवाद राज्यसभा सीट को लेकर है संजय सिंह और आशुतोष, अरविंद केजरीवाल के ज्यादा करीब हैं। संभवत: अब कुमार विश्वास भी राज्यसभा की सीट चाहते होंगे  कम से कम विवाद की टाइमिंग को देखकर तो ऐसा ही लगता है।” कुमार विश्वास के भाजपा मेंशामिल होने की अटकलों पर शाजिया का कहना है, ”कुमार कुछ पत्रकारों को अपने सिलेक्टिव लीककरते हैं।इसमें कोई शक नहीं कि उनकी भाजपा और अन्य पार्टियों के नेताओं से भी अच्छे संबंध हैं लेकिन वे कभी ऐसी बातों को न तो स्वीकार करते हैं न ही इनकार नहीं करते हैं।” स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव कहते हैं कि, ”यह एक तरह से उन सपनों का अंत है, खिलाड़ियोंका क्या होगा इससे फर्क नहीं पड़ता। हजारों–लाखों लोगों के लिए उस सपने का अंत हो रहा है जोचार–पांच साल पहले देखा गया था। एक बात स्पष्ट है कि यह सिद्धांत का मामला नहीं है। सत्ता काखेल है।” योगेंद्र यादव कहते हैं कि, ‘हमारा मामला सिद्धांतों का था, जबकि अब पूरा मामला भ्रष्टाचारऔर सत्ता संघर्ष का है। पार्टी पर जिस चौकड़ी का कब्जा है, वह उसी तरह का खेल खेल रही है, जैसा हमारे साथ हुआ था। आज जो लोग जिस मंडली की बात कर रहे हैं, कल तक वे खुद उसमंडली के सदस्य थे।‘ आम आदमी पार्टी में यह विवाद अचानक नहीं उभरा है। लंबे समय से पार्टी के अंदर गुटबाजी औरस्वार्थ का भाव चरम पर है। लेकिन इस विवाद में अरविंद केजरीवाल की सर्वोच्च सत्ता को चुनौतीमिली है। उनके ऊपर भ्रष्टाचार और सिद्धांतों से समझौता करने का आरोप लग रहा है अरविंद केजरीवाल आरोपों पर जवाब देने की बजाय मौन हैं आरोप लगाने वाले कपिल मिश्रा भ्रष्टाचार केखिलाफ सत्याग्रह कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि दूसरों से नैतिकता के आधार इस्तीफा मांगने वाले अरविंद केजरीवालक्या अपने मामले में भी उस नैतिकता का पालन करते हुए स्वयं इस्तीफा देंगे। जिससे पार्टी के अंदरका बवंडर थम सके।

कलयुग का गुरुकुल

एक ओर ऊपर से गुजरती मेट्रो की तेज आवाज तो दूसरी तरफ ड्डदल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर गुजरते वाहनों का शोर। इसके बीच एक ड्डवशेष...

… ताकि अंधेरा कायम रहे

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के दूरस्थ गांव लेइसांग में पिछले साल बिजली पहुंच गई। लेइसांगवासियों के साथ पूरा देश खुशी से झूम उठा। कारण, इस...

रेरा को ठेंगा दिखाते बिल्डर

नोएडा में यूनीटेक का कास्केड नाम का प्रोजेक्ट है। इसमें कुल आठ टावर हैं निवेशकोंसे वादा किया गया था कि 2012 में उन्हें घर मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। घर की जगह खरीददारों को आश्वासन मिला, जो सालों तक चलता रहा। इससे तंग आकर खरीददारों ने कोर्ट का दरवाजा खट–खटाया। उन्होंने मांग की कि कंपनी उनका पैसा वापस करे। कंपनी बहाना बनाने लगी। कहने लगी कि उसके पास रुपए नहीं हैं। कोर्ट की सख्तीके बाद वह रास्ते पर आई। पर अभी तक खरीददारों को कुछ हासिल नहीं हुआ है। कुछ इसी तरह के हालात विस्टा प्रोजेक्ट (गुरुग्राम) को लेकर भी है। यहां भी खरीददारों को मकानतय समय पर नहीं मिला है। यूनीटेक से अलग कहानी जेपी इंफ्रा की नहीं है। उनसे भी निवेशकपरेशान हैं। एक दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें घर नहीं मिला। यही नहीं, खरीददारों को मकान देने के बाद भी बिल्डर परेशान करते हैं। उनसे तरह–तरह के खर्चमांगते हैं। मसलन रख–रखाव का। खर्च न देने पर प्रोजेशन तक नहीं देते। विरोध करने पर बाउंसरोंसे मार–पिटाई कराते हैं। हद तो तब हो जाती है जब पुलिस बिल्डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहींकरती। कानून को बने तीन महीने हो चुके हैं, पर एनसीआर के खरीददारों को कोई राहत नहीं मिली है। राज्य सरकार भी...

बदल गए रोजगार के मायने

पिछले दिनों एक एजेंसी की रिपोर्ट आई, जिसमें यह कहा गया कि बेरोजगारी की दर बहुत बढ़ गई है। लोगों को उतने रोजगार नहीं...

खराब निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार?

घाटे में चल रही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को एक और झटका लगा है। पंच निर्णय न्यायाधिकरण के आदेश के तहत दिल्ली मेट्रो रेल...

भूमाफियाओं के खेल में केजरीवाल सरकार

उपलब्ध दस्तावेजों की मानें तो केजरीवाल सरकार गांव की जमीन हथियाने में लगी है। इसके लिए वह सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।...

पुनरुत्थान के लिए शिक्षा पर पहली राष्ट्रीय ‘उपनिषद’

वैसे तो भारतीय शिक्षा पर चिंतन करने के लिए इसके पूर्व भी कई महत्वपूर्ण आयोजन हुये हैं तथा कई समितियों में चर्चा हुई है, लेकिन...

मौत बांट रही है दिल्ली की हवा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सांस के रोगियों की संख्या 300 गुणा बढ़ गई है। एक अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट में बताया गया है...

दिल्ली में ‘तैमूरी ताकत’

तैमूर नगर की ‘तैमूरी ताकत’ के संरक्षण में चल रहे गैर कानूनी कारनामे ने सिर्फ वहां रहने वाले उमेश कुमार को ही मजबूर नहीं...
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