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Sunday, November 18, 2018
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र

सत्याग्रह की ओर बढ़ें गोविंदाचार्य

गोविंदाचार्य कार्यक्रम की धुरी में हों और चिंतन की नई धारा न फूटे, यह असंभव बातहोगी। बीते 20 अप्रैल को भी यही हुआ। राजधानी दिल्ली का मावलंकर हॉल के.एन.गोविंदाचार्य को जानने–मानने वालों से भरा था। देश के कोने-कोने से लोग गोविंदाचार्य को उनके 75वें साल में प्रवेश करने पर शुभकामना देने आए थे। इस अवसर पर गोविंदाचार्य ने जो बात कही, उसका सार यही था कि ‘हमें अपनी आत्म–स्मृति को ठीक से जागृत करने की जरूरत है।‘ वे बोले, ‘व्यक्ति के स्वत्व–बोध से ही स्वाभिमान पैदा होता है।स्वाभिमान से आत्म–विश्वास आता है और आत्म–विश्वास से स्वावलंबन। यही स्वावलंबन शक्ति काआधार होता है।‘ इसी शक्ति की पहचान कराने का बीड़ा ‘सनातन किष्किंधा मिशन‘ ने उठाया है। किष्किंधा मिशन नेइस योजना का नाम ‘भारत गौरव अभियान‘ रखा है। मिशन के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बसवराजपाटिल, सेडम ने कहा, ‘भारत गौरव अभियान योजना का लक्ष्य अगले एक वर्ष में समाज के नायकोंको ढूंढ़कर उन्हें आम जनता के बीच स्थापित करना है।‘ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत गौरव अभियान की पूरी रूपरेखा सामने रखी। वे बोले, ‘हमारा लक्ष्यसमाज–शक्ति को मजबूत करना है, क्योंकि कॉपी और नकल से भारत नहीं बन सकता है। वह अपनीआत्मा से बनता है।‘ अगले एक वर्ष में 11,000 प्रभावी शख्सियतों और उनके काम से देश भर केलोगों को   परिचित कराने का लक्ष्य रखा गया है। गोविंदाचार्य रचनात्मक कार्यों तक ही खुद को सीमित न रखें, बल्कि वे सत्याग्रह की ओर बढ़ें‘। देश और समाज को उनसे यही उम्मीद है। ध्यान होगा कि गोविंदाचार्य ने दो साल के अध्ययन अवकास के बाद अप्रैल 2003 में भारतीय जनतापार्टी से खुद को किनारा कर लिया था। तभी से वे सज्जन शक्ति को एकजुट करने में लगे हैं। वे मानतेहैं कि मुद्दों और मूल्यों से भटकी राजनीति की अपनी सीमा रह गई है। समाज की शक्तियों को जागृतकर ही वर्तमान संकट से उबरा जा सकता है। गोविंदाचार्य मानव केंद्रित विकास की जगह प्रकृति केंद्रित विकास पर बल देते रहे हैं। मावलंकर हॉलमें इसी बात को उन्होंने नए संदर्भों के साथ रखा। इन दिनों सार्वजनिक जीवन में जो लोग सक्रिय हैं, उनमें गोविंदाचार्य की साख शिखर के चुने कुछेक लोगों में है। यही वजह है कि उनको लेकर लोगोंकी जिज्ञासा बनी हुई है। उनसे उम्मीदें हैं। जब मंच से आवाज आई कि– ‘गोविंदजी रचनात्मक कार्यों तक ही खुद को सीमित न रखें, बल्कि वेसत्याग्रह की ओर बढ़ें‘ तो सभागार में देर तक तालियां बजती रहीं। सत्याग्रह के लिए लोगों ने उनकाआह्वान किया। समय–समय पर इस नाम ने अपनी सार्थकता दिखाई है। हालांकि, डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने उनसे राजनीति में लौटने को कहा। लेकिन, जब गोविंदाचार्य कीबारी आई तो इस पर उन्होंने कोई राय नहीं रखी। उन्हें जानने वाले भी इस बात को भली–भांति समझते हैं कि गोविंदाचार्य और दलगत राजनीति दो ऐसी धारा है, जिसका मेल अब असंभव है। वेदलगत राजनीति छोड़कर एक लंबी रेखा खींचने के लिए आगे निकल चुके हैं। यदि वे अपने लक्ष्य मेंसफल होते हैं तो भारत में समाज सत्ता फिर से स्थापित होगी। कार्यक्रम में गीता आश्रम वृंदावन के महंत स्वामी अवशेषानंद महाराज बतौर मुख्य अतिथि उपस्थितथे। उन्होंने कहा कि कतार के अंतिम व्यक्ति की चिंता करने वाला ही उसका उत्थान कर सकता है।गोविंदाचार्य इस कार्य के लिए सबसे अनुकूल हैं। बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद आर. के. सिन्हा ने कहा, ‘भारत गौरव अभियान ग्रंथ तैयार होता है तो देश, समाज के लिए एक बड़ा काम होगा।‘ वहीं राज्यसभा सांसद हरिवंश बोले, ‘गोविंदजी देश के हिसाब से भारत को बनाने की बात कर रहे हैं। हमेंइनके हाथ को मजबूत करना है।‘ कार्यक्रम में भारतीय इतिहास की जानकार कुसुमलता केडिया ने भी अपनी बात रखी। उन्होंनेगोविंदाचार्य को महामात्य की संज्ञा दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार व इंदिरा गांधी राष्ट्रीयकला केन्द्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय कर रहे थे। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग शिरकत कर रहे थे। इनमें सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकारऔर शोधार्थी शामिल थे। 
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