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Thursday, February 21, 2019

महिलाओं के लिए निराशाजनक

खेल जगत को छोड़ दें तो महिलाओं के लिए साल 2018 निराशा से भरा रहा। उनके सशक्तिकरण के दावे खोखले साबित...

स्वामी विवेकानंद ने दिया था शिकागो से सहिष्णुता का संदेश

व्यक्ति विशेष के कारण कुछ तारीखें इतनी महत्वपूर्ण हो जाती है कि आगे आने वाला समाज इससे निरंतर प्रभावित होता रहता है। साथ ही...

ताजा होती बंटवारे की स्मृति

देश ने 71वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है। अगस्त का पूरा महीना उत्सव सरीखा रहा, लेकिनइसी दौरान राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच बीकानेर हाउस में एक प्रदर्शनी लगी, जिसनेदेश बंटवारे के दर्द को ताजा कर दिया। 9 से 24 अगस्त तक चली इस प्रदर्शनी को ‘1947 आर्काइव‘ शीर्षक से लगाया गया था। प्रदर्शनी मेंकुछ वैसे सामान रखे गए थे, जिसे बंटवारे के वक्त आम लोगों ने इस्तेमाल किया था। प्रदर्शनी में एक छोटी छुरी रखी दिखी। उसके साथ एक पर्ची में जो लिखा है, उसके अनुसार छुरीभाग मल्होत्रा नामक व्यक्ति की है। बंटवारे के समय हुए साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान सुरक्षा केलिहाज से मल्होत्रा ने उस छुरी को अपने साथ रखा था। कहा जाता है कि ऐसे लोगों की संख्या काफी थी, जो हिंसा और भय के वातावरण में अपने पासयथासंभव धारदार हथियार रखने को विवश थे, ताकि मुश्किल घड़ी में परिवार और स्वयं की रक्षा करसकें। मुल्क के बंटवारे से प्रभावित लोगों से बातचीत कर बनी डॉक्यूमेंट्री भी यहां दिखाई गई। बीकानेर हाउस के एक खूबसूरत कक्ष में प्रदर्शनी लगी थी, जो कक्ष प्रवेश करते ही बंटवारे के दर्द का आभास करा रही थी। उस छुरी के साथ ही धातु से बनी यह सीटी रखी है। वह नंद किशोर निजवान की है। निजवानस्वतंत्रता से पहले ब्रिटिश सेना में शामिल थे। बंटवारे के वक्त वे इस सीटी को अपने साथ भारत लेकरआए थे। देश बंटवारे के वक्त निजवान 19 साल के थे। मुल्क के बंटवारे से प्रभावित लोगों से बातचीत कर बनी डॉक्यूमेंट्री भी यहां दिखाई गई।बीकानेरहाउस के एक खूबसूरत कक्ष में प्रदर्शनी लगी थी, जो कक्ष प्रवेश करते ही बंटवारे के दर्द का आभासकरा रही थी। 70 साल पहले जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ था तो देश का बंटवारा भी हो गया। एक नए देश बना– पाकिस्तान। भारत और पाकिस्तान की सीमाओं की घोषणा स्वतंत्रता के दो दिन बाद 17 अगस्त कोहुई। अफरातफरी और हिंसा के बीच लाखों जिंदगियां तबाह हुई। काफी कम अंतराल में करोड़ों लोगसीमा के आर–पार आए और गए। उस दौरान जो घटनाएं हुईं ‘1947 आर्काइव‘ ने प्रदर्शनी के जरिएउस स्मृति को जिंदा किया है। इसकी वजह यही है कि समय के साथ वो स्मृतियां धुंधली पड़ती जा रही थी। जिस पीढ़ी ने बंटवारे कोदेखा और भोगा है, वह तेज़ी से खत्म हो रही है। उनके साथ उनकी यादें भी, लेकिन उनकी स्मृतियोंको उनकी ही आवाज में संरक्षित करने की कोशिश सराहनीय है। प्रदर्शनी में दर्द का इतिहास तो हैही, लेकिन मानवता के भी खुश खूबसूरत पल सुनने को मिलते हैं। यहां पत्थर और लकड़ी से बना यह मूसल रखा है, जो इसर दास निजवान का है। वे इसे पाकिस्तान केशहर डेरा गाजी खान से रोहतक ले आए थे। इसर दास निजवान एक हकीम थे और इस मूसल कीमदद से दवाइयां पीसने का काम करते थे। उसी तरह इंद्र प्रकाश पोपली का रिफ्यूजी पहचान पत्र भीरखा दिखाई देता है। उस पत्र के अनुसार पोपली का जन्म मुल्तान में हुआ था। विभाजन के दौरान वेदिल्ली चले आए। ऐसी कई ऐतिहासिक महत्व की चीजें बीकानेर हाउस में प्रदर्शित थीं। वहां लगी मानचित्र को देखकरकोई भी अनुमान लगा सकता था कि बंटवारे ने देश के हर कोने को प्रभावित किया। दिल्ली औरलाहौर के बीच आने–जाने वालों का तो कोई हिसाब ही नहीं है।

कुम्भ मेला के विशेष टिकट का लोकार्पण

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कुम्भ-2019 के अवसर पर प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाग्राम परिसर का उद्घाटन किया।...

नफरत की फसल

निश्चित रूप से अभी एक बेहद खतरनाक और विषाक्त दौर चल रहा है। कुछ शक्तियां धर्म और साम्प्रदायिकता की आड़ में देश में नफरत...

यहां हो रहा गांधी के सपनों से खिलवाड़

अब बिहार विद्यापीठ का केवल नाम रह गया है। यहां न कोई शिक्षक है, न छात्र। महात्मा गांधी ने स्वावलंबन के जो सपने देखे...

गरीबों को ‘शिकार’ बना रही है ईसाई मिशनरी

झारखंड के लिट्टीपाड़ा प्रखंड (पाकुड़ जनपद) के कामोगोड़ा में दो गांव हैं। पहला छोटा कोमागोड़ा और दूसरा बड़ा कामोगोड़ा। इसमें तीन...
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