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Thursday, March 21, 2019

हिमालय परंपरा के योगी

संसार का कोई भी कार्य बिना अनुभवी गुरु के नहीं हो सकता। योग के मामले में यह बात और अहम हो जाती है, क्योंकि...

कथा क्रिया योग की

एक बंगाली बाबू ट्रांसफर होकर रानीखेत पहुंचते हैं। वहां आबादी बहुत कम थी। चारों ओर जंगल और पहाड़ थे। सैनिक छावनी के लिए वहां...

खुद से संघर्ष करता यहूदी समाज

यहूदी हजारों साल से भारत में रहते आ रहे हैं। हमें कभी यहां के लोगों के जुल्मों का सामना नहीं करना पड़ा। हम खुद...

रोजगार देता जैविक उत्पाद

पहाड़ पर बहुप्रचलित कहावत है कि पहाड़ों का पानी और जवानी दोनों ही यहां नहीं टिकते। पानी तो नीचे बहकर आता है और लोगों...

परमात्मा से मिलन का बिंदु

पहली बार श्री अरविन्द ने 1904 में योगाभ्यास का प्रारंभ किया। तब किसे पता था कि देश के सुदूर दक्षिण भारत में बसे एक...

आध्यात्मिक संस्कृति का आदर्शलोक

भारत के सांस्कृतिक मूल्यों में ‘सर्व’ को समाहित कर लेने की प्रवृत्ति मूल तत्व के रूप में विद्यमान है। दुनिया की तमाम सांस्कृतिक विविधताओं...

घटनाएं जिन्होंने बीते लम्हों को मथा

साल 2018 में जिन बड़े सामाजिक बदलावों की पीठिका तैयार हुई, उनकी पटकथा देश के संवैधानिक स्तंभों में से एक न्यायपालिका...

आस्था और अंतस

यदि किसी मंदिर की किसी परंपरा में कोई विशेष प्रावधान है, जिसे वर्षों से श्रद्धालु मानते चले आ रहे हैं तो उसमें विभिन्न तर्कों...

कुंभ में किन्नर अखाड़ा भी!

अखाड़ा परिषद अब किन्नरों को संन्यासी बनाने के लिए तैयार हो गया है। सभी अखाड़ों ने संन्यासी बनने के इच्छुक किन्नरों के प्रवेश के लिए अपना द्वार खोलते हुये कहा है कि संन्यास लेने वाले किन्नरों को सनातन धर्म की परम्परा के अनुरूप आचरण और जीवनयापन करते हुये जप-तप में लीन होना पड़ेगा। संन्यास लेने वाले किन्नर को धर्मशास्त्र की जानकारी है तो मंडलेश्वर या महामंडलेश्वर जैसे उच्च पद भी दिये जायेंगे।

आओ खेलें मन की होली

होली मुक्त व स्वछंद हास-परिहास का त्योहार है। नाचने-गाने, हंसी-ठिठोली और मौज-मस्ती की त्रिवेणी है होली। सुप्त मन की कंदराओं में पड़े ईर्ष्या-द्वेष, राग-विराग...
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