बिगड़ो ऐसे कि जोड़ी बन जाये

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बर जंगल की तरह फैली कि राहुल भइया एक बार फिर बिगड़ गये हैं। बिगड़ने के लिए उन्होने कोई और जगह नहीं बल्कि देश की संसद को चुना। राफेल रक्षा सौदे पर बहस के लाइव टेलीकास्ट के दौरान वे टीवी पर आंख मारते नजÞर आये। इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान भी उन्होने आंख मारी थी। आनंदित विरोधी उनकी इस हरकत पर सीटियां मार रहे हैं और माता सोनिया गांधी माथा ठोंक रही हैं। कांग्रेसियों का एक तबका ऐसा भी है जो यह बता रहा है कि आंख मारना एक स्वान्त: सुखाय और आध्यात्मिक कृत्य है। राहुल गांधी देश को समझाना चाहते हैं कि वे अब राजनीतिक रूप से बालिग हो चुके हैं। 2018 में नई सहस्राब्दी ही बालिग नहीं हुई बल्कि तीन राज्यों का चुनाव जीतकर राहुल जी भी बालिग हो गये। अब क्या एक व्यस्क व्यक्ति को इतना भी अधिकार नहीं है कि वह अपने बालिग होने का इजÞहार करे? सचमुच इस बात को लेकर कोई मतभेद नहीं है कि पिटने, गिरने और मुंह चिढ़ाये जाने के बावजूद राहुल को अपने पैरो पर खड़ा होना आ गया है। लेकिन देश की संसद में बार-बार आंख मारना किसी की समझ में नहीं आया। अगर सही जगह और सही उम्र में राहुल ने आंख मारी होती तो सोनिया जी के पोते भी अब तक सयाने हो रहे होते और मीडिया देश के भावी प्रधानमंत्री यानी राहुल नंदन की लोकप्रियता पर सर्वे करवा रहा होता। बहन प्रियंका राहुल के अविवाहित होने पर अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से जता चुकी हैं। एक चुनावी कैंपेन के दौरान जब खुद राहुल के सामने यह सवाल आया तो उनके गालों पर डिंपल पड़ गये। शर्माते हुए उन्होने जवाब दिया— जब समय आएगा तो शादी अपने हो जाएगी।

मोदीजी भी आखिर समझायें तो कैसे। राहुल के हर काम ही निराले हैं। अविश्वास प्रस्ताव पर जब बहस हो रही थी, तब राहुल ने पहली बार आंख मारी थी। लेकिन आंख मारने से पहले उन्होंने एक और काम किया था। पूरी दुनिया को चौंकाते हुए वे सीधे मोदीजी के गले लग गये या यूं कहिये गले पड़ गये। इसके कुछ देर बाद उन्होने अपने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर देखकर आंख मारी थी।

लेकिन प्रशंसक चिंतित हैं कि यह समय कब और कैसे आएगा? आखिर देश की जनता को यह जानने का हक है कि 2060 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा। विवाह राहुल का व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय प्रश्न पर है। राहुल गांधी तमाम मुद्धों पर गला फाड़ रहे हैं लेकिन इतने बड़े राष्ट्रीय सवाल पर चुप हैं। मीडिया भी उनसे यह नहीं पूछ रहा है कि अगर वे विवाह नहीं करेंगे तो कांग्रेस पार्टी का अगला नेता कहां से आएगा? प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहे हैं। वे अपने भाषणों में अच्छा- खासा समय कांग्रेस चिंतन में खर्च करते हैं। उन्हें भी राहुल गांधी को यह समझाना चाहिए कि कुल मर्यादा को आगे बढ़ाये और भावी नेतृत्व तैयार करने के लिए शीघ्र अति शीघ्र ब्याह रचायें। लेकिन मोदीजी भी आखिर समझायें तो कैसे। राहुल के हर काम ही निराले हैं। अविश्वास प्रस्ताव पर जब बहस हो रही थी, तब राहुल ने पहली बार आंख मारी थी। लेकिन आंख मारने से पहले उन्होंने एक और काम किया था। पूरी दुनिया को चौंकाते हुए वे सीधे मोदीजी के गले लग गये या यूं कहिये गले पड़ गये। इसके कुछ देर बाद उन्होने अपने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर देखकर आंख मारी थी। भारतीय परंपरा यही कहती है कि आंख पहले मारी जाये। अगर आंखों की गुस्ताखी सामने वाली को पसंद आये तो फिर गले मिलने का योग भी बनेगा। लेकिन यहां भी काम पूरी तरह उल्टा हुआ। आंख एक ऐसे व्यक्ति को मारी और गले एक ऐसी शख्सियत से लगे कि प्रशंसकों की उम्मीद टूट गई। क्या इस तरह तैयार हो गई कांग्रेस की अगली पीढ़ी? अब राहुल जी ने कनखियों का यह कारनामा राफेल पर चल रही बहस के दौरान भी दिखाया है। राहुल खुश हैं लेकिन शुभचिंतक आंसू बहा रहे हैं। बार-बार इस तरह संसद में ना बिगड़ो राहुल भइया। अगर बिगड़ना ही है, तो ऐसी जगह बिगड़ो कि जोड़ी बन जाये।

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