आधी आबादी का पूरा हक

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कंज्यूमर प्रोडक्ट बनाने वाली एक कंपनी के विज्ञापन का मशहूर पंच लाइन है-हक से मांगो। भारत में ट्रैफिक हवलदार से लेकर कचहरी के पेशकार तक यही करते हैं। बॉलीवुड वालों ने भी इस दर्शन को आगे बढ़ाया है ‘साडा हक इत्थे रख’ मुखड़े वाला एक सुपरहिट गीत बनाकर। इस गीत के आने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक यह चुटकुला चल पड़ा था कि अब सरकारी बाबू रिश्वत नहीं मांगते। काम करवाने आये आदमी को देखकर गुनगुनाने लगते हैं-साड्डा हक इत्थे रख। सामने खड़ा आदमी समझ जाता है कि उसे क्या करना है? मोदीजी लाख डरायें लेकिन इस देश की जनता पर कहां असर होनेवाला है।

बहुत बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जो ‘खाने’ को अपना बुनियादी नागरिक अधिकार समझते हैं। यानी ‘हक’ वसूली धड़ल्ले से जारी है। लेकिन अफसोस देश की आधी आबादी इस मोर्चे पर भी उसी तरह पीछे है, जिस तरह बाकी मामलों में है। कुश्ती के दंगल की तरह भ्रष्टाचार के अखाड़े में भी केवल मर्दों की तूती बोलती है। मर्दों की मॉनोपॉली को तोड़ने का बीड़ा उठाया आधुनिक भारत की एक नारी ने, जिनका नाम है, श्रीमती चंदा कोचर। बहुत मशहूर शख्सियत हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक के सर्वोच्च पद पर लंबे समय तक आसीन रह चुकी हैं। यूपीए से लेकर एनडीए तक देश की हर सरकार से भरपूर सम्मान पा चुकी हैं। नारी सशक्तीकरण के मामले में अक्सर चंदा कोचर की मिसाल दी जाती थी। लेकिन श्रीमती कोचर यह अच्छी तरह जानती थीं कि बिना ‘हक’ के सम्मान का कोई मतलब नहीं है।

मर्दों की मॉनोपॉली को तोड़ने का बीड़ा उठाया आधुनिक भारत की एक नारी ने, जिनका नाम है, श्रीमती चंदा कोचर। बहुत मशहूर शख्सियत हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक के सर्वोच्च पद पर लंबे समय तक आसीन रह चुकी हैं। कोचर यह अच्छी तरह जानती थीं कि बिना ‘हक’ के सम्मान का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने ‘हक’ हासिल करने का बीड़ा उठाया। नतीजे में आया एक ऐसा बैकिंग घोटाला जिस पर बड़े-बड़े मर्द घोटालेबाज भी गर्व कर सकें और नौसिखिये प्रेरणा ले सकें। चंदा कोचर किसी बड़े संस्थान के सर्वोच्च पद पर बैठी देश की पहली ऐसी महिला बनीं जिन्हें गबन के आरोप में बर्खास्त किया गया है। बेशक नौकरी चली गई हो लेकिन जाते-जाते श्रीमती कोचर बड़ी लकीर खींच गई हैं। उन्होंने यह बता दिया है कि जब आधुनिक नारी एवरेस्ट पर चढ़ सकती है, फाइटर प्लेन उड़ा सकती है तो बैंक भी लूट सकती है। अगर नटवरलाल जीवित होते तो जरूर कहते-‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के’ चंदा कोचर ने एक साथ कई मिथक तोड़े हैं। मर्द जब घोटाला करते हैं तो उनकी काली कमाई पत्नी के नाम पर पाई जाती है। चंदा कोचर ने इस ट्रेंड को उलट दिया। उन्होंने अपने बैंक को चूना लगाकर जिस उद्योगपति को फायदा पहुंचाया, उस उद्योगपति ने बदले में श्रीमान कोचर के वारे-न्यारे किये। हमारे शास्त्रों में स्त्री को लक्ष्मी कहा गया है। लेकिन पत्न ी साक्षात लक्ष्मी किस तरह हो सकती है, यह चंदा कोचर ने दुनिया को दिखा दिया है।

महिला सरपंच से अंगूठा लगवाकर पर्दे के पीछे से सारा काम खुद संभालने वाले पति इस देश ने बहुत देखे हैं। चंदा कोचर के रूप में हमने एक ऐसी पत्नी को भी देख लिया जिनकी कृपा से उनके स्वामी अरबों रुपये के स्वामी हो गये। मिथक तोड़ती भारतीय नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। हाल ही में अलीगढ़ से एक वीडियो सामने आया। 30 जनवरी यानी बलिदान दिवस के दिन एक महिला नकली पिस्तौल लिये महात्मा गांधी के सीने पर गोलियां बरसा रही थीं। वीडियो पूरे भारत में वायरल हुआ। देश के मन में कई सवाल कौंधे। पहला सवाल यह था कि मृत्यु के 71 साल बाद भी अगर गांधी को गोली मारना पड़ रहा है तो इसका मतलब यह है कि गांधी मरे नहीं थे। गांधी एक विचार हैं और विचार कभी गोलियों से नहीं मरा करते हैं। लेकिन वीडियो देखते हुए मेरे मन में एक दूसरा ख्याल आया। पति को बेलन मारने वाले चुटकुले से ऊपर उठकर भारतीय नारी अब खुलेआम अपनी हिंसक भावनाओं को अभिव्यक्त कर रही है। इस काम में उसे मवालियों और लफंगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में परहेज नहीं है। बापू की तस्वीर पर नकली पिस्तौल से ठांय-ठांय करती आधुनिक भारत की यह नारी अपने पति या बाकी परिजन के साथ क्या करती होगी, यह सवाल भी जेहन में आया। लेकिन कुल मिलाकर लगा कि नारी सशक्तीकरण अब सर्वांगीण है।

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