हम हिन्दुस्तानी- ‘अंदाजे बयां और’ की मुहिम

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डॉ. राम मनोहर लोहिया और पं. दीनदयाल उपाध्याय ने ‘भारत- पाक महासंघ’ का जो सपना देखा था, उसे प्रवासी भारतीय भी साकार करने में जुट गए हैं। इस मुहिम को पांच दशक पहले समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने डॉ. राममनोहर लोहिया के मार्गदर्शन में शुरू किया था। वे बताते है कि डॉ. लोहिया आजादी के बाद ही इस प्रयास में लग गये थे। कांगे्रस और पाकिस्तान के शासकों ने विषम स्थितियां बनायी और दो राष्ट्र एक न हो सके। वह बताते हैं कि महासंघ की शुरुआत भारत विभाजन के तत्काल बाद और पाकिस्तान से हुए प्रथम युद्ध के पहले समाजवादी पुरोधा डॉ. लोहिया ने जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ कर दी थी। डॉ. लोहिया का साफ विचार था कि पाकिस्तान के साथ संघ बने। भारत विभाजन के बाद 12 अप्रैल 1964 को डॉ. लोहिया और जनसंघ के नेता दीनदयाल उपाध्याय ने भारत-पाक महासंघ पर संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए यह ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अल्पसंख्यकों के प्रसिद्ध नेता डा. ए.जे फरीदी की बड़ी भूमिका रही। पाकिस्तान के लोग इस विचार से चौंकते रहे और भारत के नेता जिन्होंने सत्ता सुख के लिए विभाजन को स्वीकार कर लिया, वह इस विचार का मजाक उड़ाते रहे। महासंघ’ पर डॉ. लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय के प्रति उपेक्षा का यह भाव उनके समय में आम बात थी। उन्हें इस बात का दु:ख होता था कि लोग उनकी बात नहीं समझ रहे है। लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां ऐसी बनती जा रही हंै कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश का महासंघ बनना समय की जरूरत बन गया है। डॉ. लोहिया का मानना था कि ‘भारत और पाकिस्तान एक सिक्के के दो पहलू है, इनका मिलना एक अनिवार्यता है।’ इस बात को राजनाथ शर्मा ने आगे बढ़ाया। इसके लिए उन्हें ‘अंदाजे ए बयां और’ संस्था ने पिछले साल 22 नवंबर को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से नावाजा। यह पुरस्कार दुबई में दिया गया। वहां मौजूद पाकिस्तान और बांग्लादेश की जनता की आंखों में साफ तौर पर नज़र आ रहा था कि अब महासंघ की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। उन्हें यह समझना होगा कि सदियों तक एक दूसरे का खून बहाने वाले यूरोप के देश महासंघ बना सकते है तो फिर भाई-भाई की तरह रहे लोग महासंघ क्यों नहीं बना सकते हैं।’ इन्हीं विचारों पर केन्द्रित उप्र के जनपद बाराबंकी में 31 दिसम्बर 2018 को साहित्य समागम का आयोजन किया गया। उसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय थे। अध्यक्षता समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने की। राम बहादुर राय ने कहा कि राजनीति बांट रही है, ‘अंदाज ए बयां और’ लोगों को जोड़ने का काम कर रहा है क्योंकि साहित्य ही लोगों को जोड़ता है। साहित्य ही एक ऐसी विधा है जो जाति, धर्म, संस्कृति, संस्कार और भाषा को जोड़ने का काम करती है। आज राजनीति से समाज बंट रहा है ऐसे में जरूरत है कि साहित्य से समाज को जोड़ा जाए। जो काम ‘अंदाज ए बयां और’ कर रही है। समारोह के दौरान ‘अंदाज ए बयां और’ की गतिविधियों पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद एक डीवीडी का विमोचन तथा ‘भारत पाकिस्तान महासंघ’ पर आधारित डॉ. लोहिया और पं दीनदयाल उपाध्याय के संयुक्त वक्तव्य के शिलालेख और महासंघ पर आधारित पत्रिका के कवर पेज का विमोचन किया गया। इस मौके पर सामाजिक सहभागिता सम्मान के अर्न्तगत दुबई निवासी शाज़िया किदवई, रेहान सिद्दीकी, उर्फी किदवई, अमेरिका निवासी युसूफ किदवई को प्रवासी भारतीय सम्मान से विभूषित किया गया।

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