टूटते-बनते ये फिल्मी रिश्ते

ऐसी एक भी मिसाल नहीं है कि किसी हीरो ने हीरोइन पत्नी के करिअर को संवारने के लिए खुद घर बैठना मंजूर किया हो। करिअर के आखिरी मुहाने पर हीरो-हीरोइन का रिश्ता निभ जाता है क्योंकि तब दोनों के लिए खोने को कुछ नहीं होता।

सा नहीं कि फिल्मी रिश्ते टिकाऊ नहीं होते। कुछ रिश्ते आदर्श साबित हुए हैं लेकिन इतिहास बनते-बिगड़ते रिश्तों का ज्यादा गवाह रहा है। करीब डेढ़ दशक साथ रहने के बाद अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा ने अब अलग-अलग वैवाहिक रिश्ते में बंधने का फैसला कर लिया है। हिंदी समेत दक्षिण की सभी भाषाओं में करीब डेढ़ सौ फिल्में निर्देशित कर चुके प्रियदर्शन ने शादी के 26 साल बाद 2016 में अपनी अभिनेत्री पत्नी लिस्सी को तलाक दे दिया। तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी सौंदर्या 2016 में ही अपने उद्योगपति पति अश्विन राम कुमार से अलग हो गईं। 2010 में दोनों की शादी हुई थी।
पिछले कुछ साल में फिल्मी बंधन के टूटने-बिखरने का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। दक्षिण में दिलीप व मंजू और अमला व विजय ने वैवाहिक बंधन रास न आने पर अलग-अलग राह पकड़ ली। मुंबई में ऋतिक रोशन-सुजैन के बाद अरबाज खान-मलाइका अरोड़ा का अलगाव सबको चौंका गया। आए दिन किसी न किसी आदर्श फिल्म दंपत्ति का बंधन टूटने की खबर सवाल उठाती है कि आखिर फिल्मी हस्तियां कुछ बरस भी अपने जीवन साथी के साथ क्यों नहीं रह पातीं? कुछ मामलों में तो दस-बारह या पंद्रह साल साथ रहने के बाद रिश्ते का अचानक बिखर जाना अजीब लगता है। 2015 तक ‘भाग मिल्खा भाग’ में अभिनय के लिए मिले पुरस्कारों को अपनी पंद्रह साल पुरानी पत्नी अधुना को समर्पित कर अपनी सफलता का श्रेय उन्हें देते हुए फरहान अख्तर भावुक हो जाते थे। प्रेम और रिश्तों की प्रगाढ़ता के लगातार सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद अचानक रिश्तों की डोर ऐसी टूट गई कि दोनों को साझा बयान जारी कर एलान करना पड़ा कि वे अपने वैवाहिक जीवन को खत्म कर रहे हैं।
पुराने रिश्ते भी नहीं टिके
सालों साथ रहने के बाद अगर पति पत्नी को साथ चलने में कोई दिक्कत हो जाती है तो अलग हो जाना उनका निजी अधिकार है। जाहिर है फिल्मी दंपत्तियों को सिर्फ इस आधार पर ऐसे अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि वे सेलिब्रिटी हैं। वैवाहिक बंधन उनका भी निजी मामला है। किसी को उनके अलगाव की वजह तलाशने या किसी एक पर दोष मढ़ने का अधिकार हो ही नहीं सकता। फिल्मों में वैवाहिक बंधन की महत्ता बखानने वाले लोग सिर्फ आदर्श कायम करने के नाम पर तो अपने रिश्तों में उलझे नहीं रह सकते?
बहरहाल, फिल्मी लोगों को क्योंकि आम दुनिया से परे का माना जात है इसलिए उनके रिश्तों के बनने बिगड़ने की ज्यादा चर्चा हो जाती है। यह जिज्ञासा तो होती ही है कि फिल्मी बंधन टूटने का चलन अचानक क्यों बढ़ गया है? फर्क शायद बदलते समय की नई सोच का भी है और कुछ हॉलीवुड की जीवन शैली अपनाने का भी असर है। एक शब्द कम्पेटिबल वैवाहिक रिश्ते टूटने का आधार बन गया है। बरसों बाद कम्पेटिबिलिटी अचानक बिखर जाती है। कुछ मामलों में ऐसा भले ही हुआ है लेकिन हर अलगाव के पीछे किसी जोड़ीदार को बेहतर विकल्प मिलने को वजह नहीं माना जा सकता। फरहान अख्तर ने जब से निर्देशन से किनारा कर अभिनय में रुचि लेनी शुरू की, उनका नाम कुछ हीरोइनों के साथ जुड़ा है। इसे अफवाह कहें या सच्चाई लेकिन यह उनके वैवाहिक रिश्ते को तोड़ने की एक वजह हो सकता है। चर्चा तो यह भी खूब रही कि विवाहेतर संबंधों की वजह से ऋतिक रोशन और सुजैन का तेरह साल पुराना साथ बिखर गया। दोनों बचपन के दोस्त। एक दूसरे को अच्छी तरह से जाना-समझा। फिर अपने प्रतिष्ठित परिवारों की रजामंदी से शादी कर ली। दोनों में प्रेम कितना गहरा था, इसकी मिसाल दी जाती थी। कुछ साल पहले ही एक फिल्म पुरस्कार समारोह में सुजैन ने घुटने के बल बैठकर ऋतिक से प्रणय निवेदन किया था। यह संयोग ही कहा जाएगा कि फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ में जीने का नया अंदाज तलाशने वाले लगभग सभी प्रमुख कलाकारों का पारिवारिक जीवन बिखर गया। फरहान अख्तर और ऋतिक रोशन के अलावा कल्कि भी इसी स्थिति का शिकार हुई है। निर्देशक अनुराग कश्यप से उनकी शादी अल्पकालीन ही रही। अभय देओल की राह भी यही रही।
फिल्मकार और अभिनेत्री अपर्णा सेन की बेटी कोंकणा सेन और रणबीर शौरी की शादी को सबसे आदर्श माना गया था। दोनों ने साथ-साथ ‘ट्रैफिक सिग्नल’ व ‘आजा नचले’ में काम किया। फिल्मों और अभिनय को लेकर उनकी रूचि बेहद परिष्कृत है। जाहिर है कि उनके रिश्ते में ज्यादा समझदारी होनी चाहिए थी लेकिन नहीं बन पाई। चार साल के बेटे रोहन का साथ भी उनके वैवाहिक रिश्ते को स्थायित्व नहीं दे पाया। कभी-कभी दूसरी औरत का रिश्ते के बीच आ जाना बंधन टूट जाने की वजह बना है। इसकी कई मिसाल है। सैफ अली खान ने तेरह साल बाद पहली पत्नी अमृता सिंह को छोड़ दिया। निर्माता बोनी कपूर को पंद्रह साल पुरानी और लाइलाज बीमारी से ग्रस्त पत्नी से नाता तोड़ने में एक मिनट का भी समय नहीं लगा। आमिर खान करीब इतने ही समय में यह अहसास कर पाए कि कालेज के समय की दोस्त रही पत्नी सुनीता से उनकी कम्पेटिबिलिटी खत्म हो गई है।
टिकाऊ बंधन चुनौती
फिल्मी बंधन टिकाऊ भी होते हैं। लेकिन कुछेक अपवाद छोड़ कर ऐसे मामलों में यह पत्नी के त्याग और सहन शक्ति की वजह से ही संभव हो पाता है। फिल्म उद्योग में दो तरह के वैवाहिक बंधन जुड़ते हैं। एक में पत्नी का फिल्मों से कोई नाता नहीं होता। ज्यादातर मामलों में ऐसी शादियां तभी हो जाती हैं, जब हीरो का करिअर शुरू हुआ होता है। अक्सर ऐसी पत्नियां घर की चहारदीवारी तक सीमित रहती है। उनका सामाजिक दायरा कुछ मित्रों तक हीं सिमटा रहता है। फिल्मी गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगभग नहीं के बराबर होती है। वे सहेलियों के साथ क्लब जाती हैं, ताश खेलती हैं। महंगे कपड़े और आभूषण पहनने का शौक पूरा करती हैं। स्टार पति के क्रिया कलापों से वे आंख मूंदे रखती हैं। दूसरी शादी में पत्नी फिल्म से जुड़ी होती है। अक्सर ऐसे मामलों में पति अपनी होरोइन पत्नी को अभिनय जारी रखने के लिए कम ही प्रोत्साहित करते हैं।
फिल्मी लोगों के वैवाहिक बंधन में दरार आने का सिलसिला हाल फिलहाल कुछ ज्यादा बढ़ा है। पहले के सितारे ऐसी स्थिति को पनपने ही नहीं देते थे। निजी और व्यावसायिक जीवन को उन्होंने पूरी तरह अलग रखा। हालांकि उनके रोमांस के किस्सों के छींटे उनके घर को लगातार भिगोते रहे। लेकिन घरेलू पत्नियों के लिए उसका प्रतिरोध करना संभव नहीं हो पाया। गनीमत यह रही कि धर्मेंद्र को छोड़ कर बाकी घर-परिवार के प्रति इतने निष्ठावान जरूर रहे कि कई तरह की चर्चाओं में घिरने के बाद भी उन्होंने पारिवारिक मयार्दाओं को नहीं लांघा। धर्मेंद्र ने भी धर्म परिवर्तन कर हेमा मालिनी से दूसरी शादी की तो अपने आर्य समाजी पिता के निधन के बाद। हीरोइनें भी आमतौर पर फिल्मी लोगों, खास कर हीरो से शादी करने का खतरा कम ही उठाती हैं। निर्देशक, लेखक उन्हें स्वीकार्य है, हीरो नहीं। दोनों अगर प्रतिष्ठित हों तो अहं का टकराव होने की आशंका रहती है। शशि कपूर और अभिनेत्री जेनिफर की शादी टिकी जरूर रही लेकिन उसमें उथल-पुथल मचती रही।
कहा जाता है कि शबाना आजमी से शशि कपूर की बढ़ती करीबी से त्रस्त होकर एक बार जेनिफर ने आत्महत्या तक की कोशिश की। ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान नरगिस को आग से बचाने वाले सुनील दत्त जब उनके पति बन गए तो नरगिस ने पहला काम यह किया कि करिअर को ताला लगा दिया और घर गृहस्थी में रम गईं। वहीदा रहमान से सुनील दत्त के रिश्ते की खबरों पर उन्होंने कान नहीं दिया। फिल्मी सक्रियता खत्म होने की भरपाई नरगिस ने सामाजिक सक्रियता बढ़ा कर की। राज्यसभा की वे सदस्य रहीं। यह नरगिस की ही पहल थी जिसकी वजह से उनका वैवाहिक जीवन किसी बड़े विवाद में नहीं उलझा। ऐसी ही परिपक्वता जया भादुड़ी ने दिखाई, जिसकी वजह से करीब तीन दशक से ज्यादा का उनका वैवाहिक जीवन आज भी स्थिर है। बावजूद इसके कि रेखा रूपी भूचाल ने उसकी नींव झिंझोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। ‘अभिमान’ वाली कहानी घर में न दोहराई जाने लगे, इसके लिए जया ने अपना अभिनय दायरा समेट लिया। ऋषि कपूर-नीतू सिंह का 25 साल से ज्यादा का वैवाहिक सफर कभी विवादों में नहीं रहा तो नीतू सिंह के संयम की वजह से।
दिलीप कुमार-सायरा बानो का वैवाहिक जीवन मिसाल है। डिंपल कपाडि़या और राजेश खन्ना के रिश्तों में लगातार बनी रही खटास से उनकी बेटी ट्विंकल ने खासा सबक सीखा। अक्षय कुमार से शादी के बाद उन्होंने अभिनय का मोह तो त्याग दिया लेकिन और फिल्मी पत्नियों की तरह सजने संवरने में व्यस्त रहने की बजाए उन्होंने अपनी क्षमता व ऊर्जा का इस्तेमाल लेखन में किया।

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