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यथावत की पत्रकारिता का लक्ष्य

भारतीय पत्रकारिता की एक श्रेष्ठ परंपरा रही है लेकिन उसे जीने और परिवर्तन का माध्यम मानने वाले पत्रकारों को कुछ सवाल सालने लगे हैं। जो पत्रकारिता आजादी के आंदोलन की वाहक रही और बाद में नवनिर्माण का जरिया बनी, उसे वैश्वीकरण (उधारीकरण) के इस दौर में बड़ी पूंजी का पिछलग्गू और लाभ का लालची बना दिया गया है। कहीं वह किसी दल के दलदल में नजर आती है तो कहीं विज्ञापनों की विवशता के कारागार में कैद है। लोकहित की राह से भटके सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती देने का साहस पत्रकारिता में शिथिल पड़ता जा रहा है। इस बहकते सरोकारों से पत्रकारिता को लोकहितकारी परिवर्तन के सुमार्ग पर लाने का कार्य आवश्यक हो गया है। इस दिशा में ‘यथावत’ सार्थक पहल करना चाहता है।

ऐसी पत्रकारिता जो निर्भय हो। भय, लोभ और दवावों से मुक्त हो। उसमें जनता की आवाज और आकांक्षा हो। वह किसी व्यक्ति, संस्था, संगठन, दल का हित साधक न हो। विचार प्रधान हो। जो स्वार्थों के तले दबे नहीं। सत्ता चाहे जैसी और जिसकी हो, जो उससे लोकहित पर समझौता न करे। बड़े घरानों और उसके विज्ञापनदाताओं के दबाव में न आए। जिसका सबसे बड़ा संबल जन सहयोग हो। जो लोकमत के परिष्कार से निखरा हो।यह समय हिन्दी पट्टी की पत्रकारिता के सामने चुनौतियों से भरा हुआ है। इस पट्टी से देश को नेतृत्व मिलता रहा है। उसे याद दिलाते रहना भी पत्रकारी कार्य है। हिन्दी में गंभीर पाठक हैं। उनकी बहुतायत है। उन्हें मंच की जरूरत है। ऐसा मंच जहां प्रबुद्ध और साधारण नागरिक बातचीत कर सकें। अपनी चुनौतियों को समझ सके। ऐतिहासिक संदर्भों को वर्तमान में परिभाषित कर सके। जिससे भविष्य का नक्शा साफ हो।‘यथावत’ का प्रयास रहेगा कि वह पाठकों को देश-दुनिया की हलचल का अर्थ समझाने का जरिया बने। यह तभी संभव है जब घटनाओं को उसके पूरे संदर्भ, सार्थकता और सरोकार के साथ पेश किया जा सके। संस्थाओं का स्वरूप बदला है। नई संस्थाएं बनी हैं। कुछ संस्थाओं का विकास हुआ है। हर विकास उसकी जड़ों के दायरे में ही नहीं होता। इन्हें पूरी पृष्ठभूमि सहित समझना समय के साथ चलने में मदद करना है। यह लक्ष्य ‘यथावत’ ने सोचा है।

पत्रिका नवरचना के लक्ष्य से प्रेरित होगी। वह बताएगी कि जिस शासन, प्रशासन और राज-समाज में हम जी रहे हैं उसके नव-संस्कार की आवश्यकता है। इस मायने में आम आदमी के विचारों का ‘यथावत’ आईना होगी। जहां जरूरत होगी वहां हस्तक्षेप करेगी। यह सब करते हुए राज-काज, शासन और समाज-व्यवस्था का मूल्यांकन भी करते रहना होगा।

यह सबकी पत्रिका होगी। पक्ष, संस्था, धाराओं को अपने में समेटते हुए अपनी बात कहेगी। यह उन लोगों के साथ खड़ी होगी जो रचनात्मक परिवर्तन के लिए सक्रिय हैं। पाठकों से संवाद बनाएगी। अपनी सामग्री के बल पर पाठकों से जुड़ेगी। भाषा, कलेवर और प्रकृति-प्रवृति हिन्दी की होगी। इसका सरोकार राष्ट्रीय और मानवीय होगा। यह मुख्य धारा की पत्रिका होगी। सबको झुठलाकर अपनी दुनिया बनाने वालों की पत्रिका नहीं होगी। यह पत्रिका विकल्प का नजरिया पेश करने का प्रयास करेगी। संक्षेप में कहें तो यह वाद-विवाद-संवाद की पत्रिका होगी।

रवींद्र किशोर सिन्हा (अध्यक्ष)

श्री रवींद्र किशोर सिन्हा ने अपने कैरियर की शुरुआत पत्रकार के रूप में की। उन्हें खोजी पत्रकार की ख्याती मिली। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में उन्होंने युद्ध संवाददाता के बतौर रिपोर्टिंग की। 1974-75 के लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन में वे सक्रिय रहे। फिर अपने अनुभवों पर आधारित किताब लिखी, ‘जनांदोलन’।

इसके बाद उन्होंने सुरक्षा को अपना कार्य क्षेत्र बनाया और एक सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज की स्थापना की, जो आज देश-दुनिया में मानी-जानी संस्था है। वे शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय रहे और फरवरी 2014 में भाजपा की ओर से बिहार से राज्यसभा में चुनकर आए।

इसके अलावा वे अनेक सामाजिक और कल्याणकारी संस्थाओं के भी अध्यक्ष हैं। देहरादून में उन्होंने एक आवासीय ‘दि इंडियन पब्लिक स्कूल’ की स्थापना की। वे स्कूल के संस्थापक अध्यक्ष हैं। ‘यथावत’ पत्रिका के भी वे अध्यक्ष हैं।

रामबहादुर राय (संपादक)

विश्वसनीयता और प्रामाणिकता रामबहादुर राय की पत्रकारिता की जान है। वे जनसत्ता के उन चुने हुए शुरुआती सदस्यों में एक रहे हैं, जिनकी रपट ने अखबार की धमक बढ़ाई। 1983-86 तथा 1991-2004 के दौरान जनसत्ता से संपादक, समाचार सेवा के रूप में संबद्ध रहे हैं। वहीं 1986-91 तक दैनिक नवभारत टाइम्स से विशेष संवाददाता के रूप में जुड़े रहे हैं। 2006-10 तक पाक्षिक पत्रिका ‘प्रथम प्रवक्ता’ के संपादक रहे। फिलहाल यथावत के संपादक हैं।

मोहन सहाय (सलाहकार संपादक)

दैनिक अखबार ‘स्टेट्समैन’ से श्री मोहन सहाय ने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत की थी। वे करीब तीन दशक तक स्टेट्समैन से जुड़े रहे। इस दौरान सहाय ने जो खबरें की, उससे उनकी स्वतंत्र पहचान बनी। यथावत के शुरुआती दिनों से ही मोहन सहाय बतौर सलाहकार संपादक पत्रिका से जुड़े हैं।

यथावत के अन्य महत्वपूर्ण लोग

समन्वय संपादक- संजीव कुमार

एसोसिएट संपादक- ब्रजेश कुमार झा

कॉपी संपादक- जुगनू शारदेय

ब्यूरो प्रमुख- जितेन्द्र तिवारी

प्रमुख संवाददाता- प्रदीप सिंह

संवाददाता- जितेन्द्र चतुर्वेदी

कला एवं सज्जा- हितेश कुमार

सहायक- रविकांत कुमार