वह ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह

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महात्मा गांधी की 71 वीं पुण्यतिथि यानी 30 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवसारी जिले के दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक (दांडी स्मारक) राष्ट्र को समर्पित किया। यह स्मारक 110 करोड़ रुपये की लागत से 15 एकड़ में बनाया गया है। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर और छात्रों ने इस स्मारक को तैयार किया है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 18 फीट ऊंची प्रतिमा। हाथ में नमक और चेहरे पर संतुष्टि के भाव। राष्ट्रपिता के अलावा 80 अन्य सत्याग्रहियों की प्रतिमा भी इस पावन भूमि की शोभा बढ़ा रही है। सभी प्रतिमाएं गतिमान स्थिति में हैं। उन्हें देखकर यूं आभास हो रहा है कि सभी सत्याग्रही अपने गंतव्य पर जल्द से जल्द पहुंचने को आतुर हों। बेशक आज यह तस्वीर सत्याग्रहियों के प्रतिमाओं की है लेकिन 88 वर्ष पूर्व यह सजीव थी। तब महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी यात्रा निकली थी। ब्रिटिश गुलामी के उस विद्रोही इतिहास को स्मारक का रूप दिया गया है ताकि आज की दुनिया उससे रू-ब-रू हो सके।

गांधी जी की पहली प्रतिमा बनाने वाले शिल्पकार सदाशिव साठे ने ही दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक (दांडी स्मारक) का निर्माण किया। उन्होंने मुख्य प्रतिमा को महज 45 लाख में ही तैयार कर दिया, वह भी केवल एक साल में।

महात्मा गांधी की 71 वीं पुण्यतिथि यानी 30 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवसारी जिले के दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक (दांडी स्मारक) राष्ट्र को समर्पित किया। यह स्मारक 110 करोड़ रुपये की लागत से 15 एकड़ में बनाया गया है। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर और छात्रों ने इस स्मारक को तैयार किया है। इस स्मारक को बनने में 14 साल का लंबा समय लग गया। दरअसल, दांडी यात्रा के 75 वर्ष पर अप्रैल 2005 में तत्कालीन रखी थी। इसका मूल उद्देश्य भारतीय इतिहास के इस धरोहर को वैश्विक फलक पर रखना था। मगर कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की कछुआ चाल ने इस ऐतिहासिक स्मारक का गौरव परवान चढ़ने से पहले ही अधर में लटका दिया।

साल 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद इस स्मारक के कार्यों ने गति पकड़ा। मोदी सरकार ने पहले चरण में करीब 90 करोड़ रुपये मंजूर कर इसे गति दी। आखिरकार लंबे समय से लटका यह स्मारक 2019 में बनकर तैयार हो गया। दक्षिण गुजरात में स्टेच्यू आॅफ यूनिटी के बाद दांडी स्मारक दूसरा बड़ा ऐतिहासिक स्थल बना है। इसके बाद दक्षिण गुजरात दुनिया के लोगों को और ज्यादा आकर्षित करेगा। इससे गुजरात में देश-दुनिया के पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इसे गुजरात के पर्यटन विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री का कार्यभाल संभालने के बाद से ही सुनिश्चित करते रहे हैं कि महात्मा गांधी के आदर्शों, सिद्धांत और उनकी सीख उनके भाषणों और कार्यों के जरिये भारत और विदेशों में उच्च स्तर पर प्रकट होती रहें। दांडी स्मारक इसकी एक कड़ी मात्र है। यह स्मारक प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहलों में से सिर्फ एक पहल है, जो महात्मा गांधी की विरासत को आगे ले जाती है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक क्षणों में से एक नमक सत्याग्रह को स्मारक का रूप देना बड़ा ऐतिहासिक कार्य माना जा रहा है। यह महात्मा गांधी और उनके 80 अनुयायी सत्याग्रहियों की दांडी यात्रा को दर्शाता है।

यह ऐसा अवसर था जब एक चुटकी नमक में औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी थीं। नमक सत्याग्रह स्मारक में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की 18 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है। स्मारक में दांडी यात्रा के दौरान मौजूद 80 महत्वपूर्ण सत्याग्रहियों की भी प्रतिमा यहां बनी। इसके अलावा यहां खारे पानी के कृत्रिम तालाब भी बनाए गए हैं। यहां बापू के दांडी मार्च को दर्शाया गया है। नमक बनाने के लिए यहां सोलर मेकिंग बिल्डिंग वाले 14 जार भी रखे गए हैं। इसके अलावा सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र क्रिस्टल होगा। जो रात के समय लेजर से चमकेगा। इस स्मारक में 1930 के ऐतिहासिक नमक मार्च से जुड़ी विभिन्न घटनाओं और कथाओं को दर्शाने वाले 24 बोलते भित्ति चित्र हैं। जो दिखने में बेहद खूबसूरत हैं। स्मारक परिसर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इसमें सौर वृक्ष लगाए गए हैं। दांडी गांव में एकड़ भूमि पर बना यह स्मारक राष्ट्र पिता गांधी के जीवन- मूल्यों को दर्शाता और साकार करता है। दांडी यात्रा, नमक सत्याग्रह के साथ गांधी के जीवन से जुड़े प्रसंगों एवं विचारों की यादें यहां ताजा होती है। इसके अलावा आधुनिक उपकरणों से खारे पानी से नमक बनाना, कलाकृतियां, आडिटोरियम, लाइब्रेरी, और आॅडियो-विज्युअल कमरे भी इस स्मारक में बनाए गए हैं। देश-दुनिया से आने वाले लोगों, शोधकर्ताओं के ठहरने के लिए स्मारक परिसर में ही गेस्ट हाउस बनाया गया है। स्मारक में दांडी यात्रा के दौरान साबरमती आश्रम से अंग्रेजी हुकूमत को पत्र लिखने से लेकर यात्रा में जिन 24 स्थानों पर गांधी अपने साथियों के साथ ठहरे, उनसे जुड़ी यादों को तैयार किया गया है।

यहां आने वाले पर्यटक अपने साथ खुद से बनाया नमक ले जा सकते हैं। आधुनिक तकनीक के सहारे इलेक्ट्रॉनिक पॉट पर नमक तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए पर्यटकों को खारा पानी पॉट में डालकर खुद ही मशीन से नमक तैयार करना होगा। नमक तैयार करते समय हर पर्यटक को गांधी का नमक सत्याग्रह का अनुभव कराएगा। इस अनुभव को पाने के लिए स्मारक में पर्यटकों का आना शुरू भी हो गया है। भारत सरकार ने स्मारक को तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी मुंबई को सौंपी थी। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर कीर्ति त्रिवेदी और प्रोफेसर सेतु दास के नेतृत्व में उनकी टीम ने स्मारक की डिजाइन तैयार की। बताया जाता है कि स्मारक की मुख्य प्रतिमा के लिए दिल्ली की एक महिला शिल्पकार से सम्पर्क किया गया। उस महिला शिल्पकार ने मुख्य प्रतिमा को बनाने में 80 करोड़ का खर्च बताया। इसके बाद मुंबई के युवा शिल्पकार से भी सम्पर्क किया गया। उस युवा शिल्पकार ने प्रतिमा पर 20 करोड़ का खर्च बताया। आखिरकार गांधी की पहली प्रतिमा बनाने वाले शिल्पकार सदाशिव साठे से सम्पर्क किया गया। बताया जाता है कि उन्होंने मुख्य प्रतिमा को महज 45 लाख में ही तैयार कर दिया, वह भी केवल एक साल में।

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