पूरे भारत में एनआरसी की जरूरत

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सेवावृत्त मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कारगिल युद्ध में सफलतापूर्वक एक बटालियन का नेतृत्व किया और दुश्मनों को मार भगाया। इसके लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल मिला। उन्हें कई आंतकी आपरेशन का भी अनुभव है।

अवैध बांग्लादेशी भारत की सुरक्षा के लिहाज से कितने खतरनाक हैं?

अवैध बांग्लादेशी सबसे पहले जनसांख्यिकी संतुलन (डेमोग्राफिक बैलेंस) को बदल सकता है। नया वोट बैंक बन सकता है ताकि उनकी रक्षा के लिए एक सराकर आए और उन्हें भारत में सुरक्षित करे। इस तरह का जनसांख्यिकीय विस्तार होता है तो भारत विरोधी ताकतें इसके बीच अपना एजेंट, हथियार, तस्करी के सामान भेज सकती हैं। हम जानते हैं कि पाकिस्तान ऐसी हरकतों में लगा रहता है। बांग्लादेश में उन्होंने ऐसे ही सरकार पलटी थी। इसका आर्थिक पक्ष भी है। किसी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो आसपास के गरीब देशों के नागरिक वहां काम करने आते हैं लेकिन यह हमारी सरकार पर है कि ऐसे लोगों को भारतीय नागरिक न बनाएं। बांग्लादेश के साथ जबसे संबंध अच्छे हुए हैं तब से बीएसएफ पर सरकार का दवाब रहा है कि वे सीमा पर बांग्लादेशियों के साथ ऐसा कुछ न करें, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़े। हमारे बीएसएफ के जवान ‘बेचारे’ हो गए हैं। सीमा पर स्मगलर हावी हो गए हैं। बांग्लादेश की सीमा पर बीएसएफ को थोड़ा अधिकार देना चाहिए। यह भी सही है कि बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने भारत के खिलाफ आतंकी शिविर को अपने देश से खत्म करने में सहयोग की है।

आतंकी संगठनों ने क्या कभी भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों का इस्तेमाल किया है? क्या इसके सबूत कभी मिले हैं?

सबसे बड़ा उदाहरण रोहिंग्या मुसलमान हैं। वे म्यंमार से बांग्लादेश आये और वहां से भारत में घुसे। तब की जम्मू-कश्मीर सरकार की हिमाकत देखिये, उसने हजारों रोहिंग्या को जम्मू में बसाया, वहां जहां हिन्दू बहुल आबादी है। इसके अलावा जम्मू के सैन्य इलाके के चारों ओर इन रोहिंग्या को बसाया गया है ताकि वे आर्मी की गतिविधियों पर नजर रखने के काम आ सके। आतंकवादियों को ‘आधार’ दे सके। यह देश को तोड़ने की कोशिश है। साठ हजार रोहिंग्या को लद्दाख में बसाया ताकि वहां का भी जनसंख्या संतुलन बिगड़ जाए। दिल्ली के चारों तरफ इनकी कॉलोनी है। ताकि दिल्ली में आतंकवादी हमला किया जा सके। रोहिंग्या क्रिमिनल ट्राइब (अपराधी जनजाति) हैं। ऐसे लोगों को अपने देश में स्वागत करना अच्छा नहीं है। जम्मू कश्मीर में आप और हम (आम भारतीय) संपत्ति नहीं खरीद सकते। वहां रोहिंग्या को बसाया जा रहा है। इसके खतरनाक नतीजे हो सकते हैं। आप क्या चाहते हैं कि लद्दाख में भी आतंकी गतिविधि हो। रोहिंग्या को ऐसे क्षेत्रों में बसाना एक योजना के तहत भी हो सकता है।

सेना ने क्या कभी कोई सर्वेक्षण किया है कि कितने बांग्लोदशी भारत में हैं?

सेना आधिकारिक सर्वेक्षण नहीं कर सकती है। लेकिन जब हम लोग असम में आॅपरेशन कर रहे थे तो हमने चेक किया कि कहां से और कैसे एक निश्चित क्षेत्र की आबादी में 100 फीसद का इजाफा हो गया है। यह इजाफा कई गांवों में और एक निश्चित क्षेत्र में हुआ है। उसे चेक करने के बाद हमें असलियत का पता चला। असम आंदोलन भी तो इसी के कारण हुआ था। वहां के लोग अपनी पहचान को खतरे में महसूस कर रहे हैं। इसे रोकना बहुत जरूरी है। नहीं तो दुश्मन देश भारत के टुकड़े करने के अपने मंसूबे में कामयाब हो जाएगा।

असम में एनआरसी की प्रक्रिया चल रही है। क्या एनआरसी पूरे भारत की जरूरत है?
बिल्कुल जरूरत है। कम से कम अपने रजिस्टर आॅफ सिटीजन तो होने ही चाहिए। कहीं तो एक रिकार्ड हो कि ये भारतीय हैं और वे बाहरी हैं। बाहर से आने वाला यहां वाटर कैसे हो सकता है? जबकि हो यह रहा है कि बाहरी लोगों को वोटर कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट पहले मिलता है और हमें बाद में। इतनी छूट देना खतरनाक है।

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