सद्भाव का कॉरिडोर

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26 नवंबर का दिन एक बार फिर इतिहास में दर्ज हो गया। 26 नवंबर 1949 के दिन भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था। इसे हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। 26 नवंबर 2018 को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पंजाब के डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर (गलियारा) की आधारशिला रखी। यह ऐतिहासिक दिन इसलिए हो गया क्योंकि इस कॉरिडोर के बनने से बिना वीजा सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन कर सकेंगे। पाकिस्तान ने भी अपने यहां करतारपुर कॉरिडोर का रास्ता ठीक करने का फैसला लिया है। आजादी के बाद पहली बार भारत पाकिस्तान किसी मामले पर एक मत हुए। करतारपुर कॉरिडोर की मांग सालों से की जा रही थी। पाकिस्तान इसके लिए तैयार नहीं था। केंद्र की सरकारों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

कुछ दिन पहले मोदी सरकार ने कैबिनेट की बैठक कर इसके निर्माण का फैसला किया। उधर पाकिस्तान भी करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए रास्ता खोलने के लिए तैयार हो गया। पाकिस्तान सीमा से सटे मानगांव में डेरा बाबा नानक (पिंड) और करतारपुर साहिब रोड कॉरिडोर का निर्माण कुछ महीनों में हो जाएगा। यह पहल गुरुनानक देव के जीवन से जुड़े इस गुरुद्वारे का निर्बाध दर्शन अमन का माध्यम बन सकती है। इस कॉरिडोर का निर्माण केवल चार लेन सड़क का निर्माण नहीं है। यह दो देशों के दिलों को जोड़ने वाला सेतु भी बन सकता है। भारत विभाजन के बाद सिखों के गुरु नानक का यह पवित्र स्थान पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था।

तभी से पंजाब और शेष देश के सिख उसका दर्शन नहीं कर पा रहे थे। उन्हें वीजा लेकर अटारी बॉर्डर से होकर पाकिस्तान जाना पड़ता था या डेरा बाबा नानक से दूरबीन के माध्यम से दर्शन करना पड़ता था। सहज ही महसूस किया जा सकता है कि अपने आराध्य के दूर से दर्शन से संतोष तो मिलता था लेकिन उनके मन में एक टीस भी रहती होगी। कॉरिडोर उनके मन की मुराद पूरी करने वाला सिद्ध होगा। इस मौके पर उपस्थित केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कॉरिडोर का काम जल्द पूरा करने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर के निर्माण की 70 सालों से प्रतीक्षा हो रही थी, उसे वह 70 दिन में पूरा करना चाहेंगे।

माना जा सकता है कि 2019 में करतार साहिब के दर्शन की मुराद पूरी होगी। यहां मूल सवाल यह है कि क्या इसे पाकिस्तान की भारत से दुश्मनी का भाव खत्म होने की शुरुआत माना जा सकता है। फिलहाल तो अभी नहीं। इसके लिए पाक को भारत से दुश्मनी का रास्ता भी बंद करना होगा। भारत पाक नियंत्रण रेखा से घुसपैठियों को भेजने का सिलसिला बंद करना होगा। जम्मू-कश्मीर में करीब-करीब रोज आतंकवादी और घुसपैठिये मारे जा रहे हैं। बीते दिनों पंजाब में निरंकारी भवन पर आतंकी हमला पाकिस्तान की कुत्सित मानसिकता को दर्शाता है। इसीलिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उसे हिंसक वारदातों को अंजाम देने से बाज आने की चेतावनी भी दी। नायडू ने कहा कि कॉरिडोर शुरू होने से नई संभावनाएं पैदा होंगी, पुरानी दरारें भरी जा सकेंगी।

साथ ही जोड़ा कि बेगुनाहों की हत्या और दहशतगर्दी को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अमरिंदर सिंह ने पाक सेना प्रमुख जावेद कमर बाजवा को नसीहत दी कि सेना को बेगुनाहों की हत्या की सीख नहीं दी जाती है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हिंसा और पंजाब में हाल में हुए निरंकारी भवन पर हमले का भी जिक्र करते हुए कहा कि हमें हत्या की राजनीति से निपटना आता है। अब देखना है कि आने वाले समय में पाकिस्तान सद्भाव का रास्ता अपनाता है कि नहीं? वैसे भारत की ओर से सद्भाव की कई कोशिशें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो बिना निमंत्रण तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के यहां एक समारोह में गए थे। इसका भी पाकिस्तान पर असर नहीं पड़ा। दरअसल, वहां की राजनीति में मुख्य खिलाड़ी सेना है। वह नहीं चाहती कि भारत से किसी भी प्रकार की मैत्री हो। इसलिए भारत की ओर से जब-जब ऐसी मित्रता की कोशिशें हुयीं, पाकिस्तानी सेना ने ऐसी कोशिशों पर पानी फेर दिया।

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