’संस्कार के साथ शिक्षा

‘स्कूलों में सामान्यतया युवा अध्यापक ही पढ़ाते देखे जाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चे इनसे डरते हैं, सवाल नहीं पूछ पाते हैं। बच्चे मम्मी पापा की बात उतने ध्यान से नहीं सुनते जितने ध्यान से दादा दादी की सुनते हैं। इस स्कूल में बच्चों को एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि दादा और दादी मिलते हैं। उनसे बच्चों को डर नहीं लगता। वह उनसे प्यार से अपने सभी जवाब पा लेते हैं।

 

रकारी सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद अक्सर लोग घर पर बैठ कर अपना समय काटते हैं। इससे उलट दिल्ली से सटे नोएडा में अवकाश प्राप्त लोग बच्चों का भविष्य संवारने में लगे हैं। अपने खाली समय में वे गरीब बच्चों को शिक्षित करने में लगे हैं। इस मुहिम के पीछे कोई शिक्षक नहीं बल्कि पेशे से चिकित्सक डॉ. प्रसून चटर्जी हैं। वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कार्यरत हैं।
प्रसून समाज को बेहतर बनाने की जिद के चलते नित नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। उनकी ही प्रेरणा से नोएडा के सेक्टर-12 के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में इंटर जनरेशनल लर्निंग सेंटर (आईजीएलसी) इस मुहिम को साकार रूप देने में लगा है। उनके इस संकल्प को आगे बढ़ाने में सरकारी सेवा से रिटायर हुए कुछ लोग भी शामिल हैं। कहते हैं, ‘बच्चे देश का भविष्य होते हैं। यदि देश के बच्चे शिक्षित और सभ्य होंगे तो आने वाले दिनों में हमारा देश शिक्षित और संपन्न बनेगा।’ इस आदर्श को साकार करने के लिए 14 सितंबर, 2017 को चार शिक्षकों ने एक पहल की। आज यह आंकड़ा 40 तक पहुंच चुका है।

फैज अहमद यहां सातवीं कक्षा का विद्यार्थी है। क्या बनना चाहते हो? इस सवाल के जवाब में वह निस्संकोच बोलता है कि आईपीएस (पुलिस अफसर)। ये शब्द भले ही फैज के हों लेकिन इसके पीछे का भरोसा डॉ. प्रसून चटर्जी का है। उन्होंने ये सोचा कि हम कैसे अपने स्तर पर एक कदम बढ़ाकर उन बच्चों के भविष्य की नींव में एक ईंट जोड़ सकते हैं जिससे उनकी मजबूत इमारत निर्मित हो सके।

विभा कक्षा 6 की छात्रा है। उसको हिंदी व्याकरण के सभी चिन्हों की पूरी जानकारी हो गई है जिससे उसको अपने बराबरी के विद्यार्थियों की तुलना में अधिक आत्मविश्वस हासिल हो चुका है। इसका पूरा श्रेय विभा आईजीएलसी को देती हैं। विभा एक उदाहरण है। उसके अलावा मुनिरका, फलक और न जाने कितने बच्चे अपने भविष्य को बुनने में जुट गये हैं।
अनिता गुप्ता एक सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। अब वह आईजीएलसी से जुड़कर दुबारा शिक्षा के काम में जुट गईं हैं। अनिता गुप्ता यहां सामाजिक विज्ञान पढ़ा रहीं हैं। वह कहती हैं कि ‘बच्चों के चतुर्मुखी विकास के लिए उनको अभिभावकों का ज्यादा से ज्यादा समय चाहिए होता है लेकिन आज की भागदौड़ की दिनचर्या में ये संभव नहीं हो पा रहा है। मां बाप आज अपने बच्चों को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। आईजीएलसी शायद इसी कमी को आंशिक रूप से पूरा करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है।’

प्रश्न ये भी उठा कि आखिर क्यों जरूरी है आईजीएलसी? बुजुर्ग अध्यापक बच्चों को कैसे पढ़ा सकेंगे, जब नौजवान अध्यापक भी कई बार बच्चों को अपनी बात नहीं समझा पाते। इस सवाल का जवाब वहां गणित पढ़ा रहीं शिक्षिका शाक्षी मलिक बड़ी ही सहजता से देती हैं। शाक्षी कहती हैं- ‘सामान्यतया स्कूलों में कम आयु वाले युवा अध्यापक ही कक्षा में पढ़ाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चे इनसे डरते हुए या अलग वजहों से अपने सवाल नहीं पूछ पाते हैं। उदाहरण के तौर पर देखिये तो बच्चे मम्मी पापा की बात नहीं सुनते जितनी दादा दादी की सुनते हैं। यहां इस स्कूल में आकर बच्चों को एक शिक्षक नहीं बल्कि एक दादा और दादी मिलते हैं जिनसे बच्चों को डर नहीं लगता। वह उनसे प्यार से अपने सभी जवाब पा लेते हैं।’

‘फैजान हमारे बीच मात्र एक उदाहरण है। जब फैजान हमारे पास आया था तो उसको अपना नाम बताने में भी झिझक होती थी। आज उसी फैजान को पूरा गायत्री मंत्र याद है। अगर प्राथमिक शिक्षा किसी भी छात्र की ठीक हो जाए तो उस छात्र का जीवन संवर सकता है, इसमें कोई शंका नहीं है। हमारे द्वारा पढ़ाए जा रहे सभी छात्र इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बन सकते लेकिन मैं एक बात पक्के तौर पर कहना चाहता हूं कि यहां के बच्चे अब गलत रास्ते पर नहीं आगे बढ़ेंगे।’ – डॉ. प्रसून चटर्जी

चंद्रशेखर राय कभी एनटीपीसी में काम कर रहे थे लेकिन अब आईजीएलसी से जुड़कर बच्चों को विज्ञान पढ़ा रहे है। राय कहते हैं, ‘बच्चों को नई चीजें जानने को मिल रही हैं। यहां बच्चों की, विषय से अलग, अन्य तरह की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। जो बच्चे कभी घर पर पहुंच कर अपना समय खेल में बिता दिया करते थे, वह आज पूरी तरह से पढ़ाई में समय बिता रहे हैं।’

‘फैजान हमारे बीच मात्र एक उदाहरण है। जब फैजान हमारे पास आया था तो उसको अपना नाम बताने में भी झिझक होती थी। आज उसी फैजान को पूरा गायत्री मंत्र याद है। अगर प्राथमिक शिक्षा किसी भी छात्र की ठीक हो जाए तो उस छात्र का जीवन संवर सकता है, इसमें कोई शंका नहीं है। हमारे द्वारा पढ़ाए जा रहे सभी छात्र इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बन सकते लेकिन मैं एक बात पक्के तौर पर कहना चाहता हूं कि यहां के बच्चे अब गलत रास्ते पर नहीं आगे बढ़ेंगे।’ 

डॉ. प्रसून चटर्जी

इμको में कभी अपनी सेवा दे रहे गुलशन कुमार नवीन इन दिनों आईजीएलसी में अंग्रेजी और हिंदी पढ़ा रहे है। गुलशन कुमार नवीन ने बच्चों के मन में इसको स्थापित कर दिया है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। नवीन बच्चों को संस्कार के साथ आधुनिक शिक्षा का पाठ पढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि एक बच्चे ने इनके एक इशारे पर गायत्री मंत्र का स्पष्ट और सुंदर उच्चारण शुरू कर दिया। ये बच्चे अंग्रेजी के वे शब्द धड़ल्ले से बोल रहे थे जिन शब्दों को प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थी सामान्यतया नहीं बोल पाते।

इस पूरी व्यवस्था को मूर्त रूप देने वाले डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि हमने सबसे पहले कक्षा छह के बच्चों का चुनाव किया। यह चुनाव उनकी सामान्य अभिरुचि के प्रश्नों के बाद किया गया। फिर हमने उनको पढ़ाना शुरू किया। ये अध्यापक वरिष्ठ नागरिक थे। इनमें सिर्फ पढ़ाना ही नहीं था, इसमें छात्रों के प्रति अध्यापकों का एक प्रेम था, एक लगाव था। इसके तीन महीने बाद ही गजब के परिणाम सामने आने शरू हो गये। जो बच्चे ये तय नहीं कर पा रहे थे कि आगे उनको क्या करना है? वह आज बोल रहे हैं कि मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। इंजीनियर बनना चाहता हूं।

अध्यापक अशोक आहूजा कहते हैं, ‘हम यहां आकर अपने बचपन में पहुंच जाते हैं। यही उम्र होती है जब आप बच्चों और बचपन को सबसे ज्यादा समझते हैं। आईजीएलसी ने हमारे अनुभव को इस योग्य समझा जिससे हम बच्चों का भविष्य संवारने में लगे हैं।’ मोहम्मद फैजान ने एम्स में हुए कार्यक्रम में गणेश वन्दना प्रस्तुत की जिसको देखर कोई भी कह सकता था कि एक सकारात्मक शिक्षा से व्यक्तित्व में कैसे बदलाव आते हैं? प्रसून चटर्जी कहते हैं, ‘फैजान हमारे बीच मात्र एक उदाहरण है। जब फैजान हमारे पास आया था तो उसको अपना नाम बताने में भी झिझक होती थी। आज उसी फैजान को पूरा गायत्री मंत्र याद है। अगर प्राथमिक शिक्षा किसी भी छात्र की ठीक हो जाए तो उस छात्र का जीवन संवर सकता है, इसमें कोई शंका नहीं है। हमारे द्वारा पढ़ाए जा रहे सभी छात्र इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बन सकते लेकिन मैं एक बात पक्के तौर पर कहना चाहता हूं कि यहां के बच्चे अब गलत रास्ते पर नहीं आगे बढ़ेंगे।’

 

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