क्वांटम कम्प्यूटर से बदलेगी दुनिया

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क्वांटम इन्फार्मेशन के क्षेत्र में दुनिया की दो बड़ी आर्थिक शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता इसके महत्व को दर्शाती है। दरअसल यह तकनीक इतनी शक्तिशाली होगी कि दुनिया को बदल कर रख देगी।

क्वांटम इन्फार्मेशन के क्षेत्र में दुनिया की दो बड़ी आर्थिक शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता इसके महत्व को दर्शाती है। दरअसल यह तकनीक इतनी शक्तिशाली होगी कि अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे ‘क्वांटम कम्प्यूटर’ के विकास के लिए होड़ चल रही है जो इस दुनिया को बदल देगा। सूचना तकनीक के क्षेत्र में यह उसी तरह की क्रांति होगी जैसे कि कम्प्यूटर के आने से हुई। अमेरिका ने 118 योजनाओं में लगभग 25 करोड़ डालर का निवेश प्रस्तावित किया है। उधर चीन सरकार हेफेई में नेशनल लेबोरेट्री आॅफ क्वांटम इन्फार्मेशन साइंस विकसित कर रही है। दस अरब अमरीकी डॉलर की लागत से बनने वाले इस केन्द्र के 2020 में शुरू होने की उम्मीद है। दो साल पहले ही चीन ने पहले क्वांटम कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्च किया था। 2017 में चीनी सरकार ने जिनान में एक कम्प्यूनिकेशन नेटवर्क स्थापित करने की भी घोषणा की थी। सेना, सरकार और निजी कम्पनियों से जुड़े अधिकतर 200 यूजर ही इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। क्वांटम इन्फार्मेशन के क्षेत्र में दुनिया की दो बड़ी आर्थिक शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता इसके महत्व को दर्शाती है। दरअसल यह तकनीक इतनी शक्तिशाली होगी कि दुनिया को बदल कर रख देगी। क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों के अनुसार क्वांटम तकनीक सूचनाओं की प्रोसेसिंग में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है। सभी सूचनाएं बाइनरी सिस्टम में एनकोड होती हैं (लिखी जाती है)-यानी जीरो और वन में लेकिन 60 के दशक में ये पता चला कि जहां ये सूचनाएं रखी जाती हैं वह जगह इनके इस्तेमाल को प्रभावित कर सकती है। इसका मतलब ये है कि हम सूचनाओं को कम्प्यूटर चिप पर स्टोर कर सकते हैं, जैसा कि हम आजकल कर रहे हैं, लेकिन हम उन जीरो और वन को अन्य बेहद सूक्ष्म सिस्टम में स्टोर कर सकते हैं जैसे कि एक अकेले परमाणु या फिर छोटे-छोटे अणुओं में। चीनी वैज्ञानिक एलेखांद्रो पोज़ास के अनुसार-‘ये परमाणु और अणु इतने छोटे होते हैं कि इनके व्यवहार को अन्य नियम भी निर्धारित करते हैं। ये नियम जो परमाणु और अणु के व्यवहार को तय करते हैं ये ही क्वांटम थ्योरी या क्वांटम दुनिया के नियम हैं। क्वांटम इन्फार्मेशन साइंस इन बेहद सूक्ष्म सिस्टम में दिखने वाले क्वांटम गुणों का इस्तेमाल करके सूचनाओं को ट्रांसमिट और प्रोसेस करने के काम में सुधार लाती है। यानी सीआईसी हमारे सूचनाओं को प्रोसेस करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव लाने का भरोसा देती है, जिससे विशेषज्ञों का मानना है कि क्वांटम साइंस हर चीज को बदल कर रख देगी। इस क्षेत्र में अभी तक जो हुआ है उसके आधार पर कहा जा सकता है कि चीन ने इस दौड़ में अपनी बढ़त बना ली है। साल 2016 में चीन ने दुनिया की सबसे पहली क्वांटम कम्यूनिकेशन सैटेलाइट लांच करने की घोषणा की और एक साल बाद यह दावा किया कि वह इसके जरिये एनक्रिप्टेड संचार स्थापित कर सकता है जिसे दुनिया का कोई और देश नहीं पढ़ सकता। एलेखांद्रो पोजास समझाते हैं, ‘यहां दो प्रयोग किये गये थे। पहले प्रयोग में सैटेलाइट के साथ जमीन से सम्पर्क स्थापित किया गया और फिर उस सैटेलाइट का फायदा उठाते हुए जमीन पर मौजूद दो केन्द्रों के बीच ‘क्वांटम एनक्रिप्टेट सिग्नल’ से सम्पर्क स्थापित किया गया। इसमें सैटेलाइट ने दोनों केन्द्रों के बीच रिपीटर की भूमिका निभाई। सूचना अपने गंतव्य तक पहुंची है या नहीं या उसे रास्ते में इंटरसेप्ट तो नहीं किया गया है, अभी इस्तेमाल किये जा रहे इन्फार्मेशन ट्रांसफर के तरीकों में ये जानने की क्षमता नहीं है। हालांकि चीन के प्रयोगों ने सिर्फ इस कांसेप्ट को ही साबित नहीं किया बल्कि उसने ये भी दिखा दिया कि उसके पास ऐसा करने की क्षमता है। क्वांटम तकनीक भविष्य में क्रांति ला सकती है। यह क्रांति ऐसी ही होगी जैसी सबसे पहले कम्प्यूटर के कारण शुरू हुई थी। हम ऐसी नई चीजें कर पायेंगे जैसे दवाइयां बनाना या प्रोटोटाइप करना या फिर ईधन का कम इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए रास्ते निर्धारित करना। क्वांटम कम्प्यूटर से इस तरह की समस्याओं को सुलझा सकेंगे। लेकिन सरकारों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रक्षा क्षेत्र में इनका इस्तेमाल करने में है। जैसे कि बेहद सुरक्षित संवाद स्थापित करना या दुश्मन के विमानों का पता लगाना। लेकिन क्वांटम साइंस के युद्धक्षेत्र में कौन जीत रहा है, फिलहाल ये कहना मुश्किल है। फिलहाल क्वांटम कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में अमरीका आगे है जबकि क्वांटम कम्यूनिकेशन में चीन जीतता दिख रहा है। █

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