सबकी चिंता, सबको न्याय

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वित्त मंत्री अरुण जेटली की अनुपस्थिति में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जो बजट पेश किया, उसे ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। हालांकि यह अंतरिम बजट था लेकिन उन्होंने इसे एक तरह से पूर्ण बजट का रूप दिया। कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों को इस पर काफी एतराज रहा लेकिन सरकार का कहना था कि संविधान में ऐसा कुछ नहीं लिखा है कि अंतरिम बजट में ऐसी घोषणाएं नहीं हो सकतीं। इस तरह का बजट पहले भी पेश हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए राजग सरकार ने हर दिल को खुश करने का बड़ा कदम उठाया। इससे किसानों, नौकरीपेशा वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य को कुछ न कुछ लाभ जरूर मिलेगा।
सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस को मात देने के लिए वित्त मंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी सौगात दी। अब प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि के तहत ऐसे किसानों को जिनके पास 2 हेक्टेयर या 5 एकड़ जमीन है, अब हर साल 6,000 रुपये मिलेंगे। यह धन सीधे उनके खाते में चला जाएगा। मनरेगा की राशि भी बढ़ा दी गई है। दूसरा बड़ा कदम था वेतनभोगी तथा अन्य वर्ग को आयकर में छूट देने का। यह कदम ऐसा रहा जिसने लोगों का दिल जीत लिया। अब डेढ़ लाख रुपये तक निवेश करने पर 6.5 लाख रुपये सालाना आय वालों को कोई कर नहीं देना पड़ेगा। 100 रुपये में 3,000 रुपये की पेंशन गरीबों को देने का भी प्रस्ताव है। विपक्षी दलों को इस कदम ने ‘क्लीन बोल्ड’ कर दिया और वे कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करने लगे। इसी तरह एफडी पर मिलने वाले ब्याज की सीमा भी बढ़ा दी गई। यानी अब 40,000 रुपये तक ब्याज करमुक्त होगा। इसी तरह दूसरा मकान रखने वालों को अब एक सीमा तक कर से मुक्ति मिलेगी। ये दोनों कदम वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत ही बढ़िया हैं और उन्हें काफी फायदा होगा। इसी तरह दस करोड़ लोगों को पेंशन देने का कदम भी शानदार है। सच तो यह है कि यह बजट सभी वर्गों को लाभ पहुंचाएगा।
अब देखना है कि आगामी चुनाव में राजग को इसका लाभ मिलेगा या नहीं? वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बजट पर कई अच्छी बातें कहीं। उनका कहना है कि ‘हम अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले से कहीं तेज गति से बढ़ रहे हैं। हमें अपने प्रदर्शन पर गर्व है। इसके बावजूद हम अधीर हैं। हम दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में हैं। हम और तेज गति से बढ़ना चाहते हैं ताकि छूट गए ऐतिहासिक अवसरों को कवर कर सकें।’

पांच बिन्दु जिनके जरिये लोगों को लाभ मिलेगा

  • साल जब पूर्ण बजट आएगा तो 5 लाख रुपये सालाना आय वालों को कोई कर नहीं देना होगा। भाजपा ने 2014 के चुनाव में यह आश्वासन दिया था। अब व्यावहारिक रूप में वो करदाता जो 6.5 लाख रुपये तक कमाते हैं, कर की सीमा से बाहर हो जाएंगे। उन्हें बस 1.50 लाख रुपये सरकार द्वारा तय योजनाओं जैसे पीपीएफ वगैरह में निवेश करना होगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाकर 40,000 से 50,000 रुपये कर दी गई है। यह एक गेम चेंजर है जो आने वाले चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। यह लाभ देश भर के 3 करोड़ लोगों को मिलेगा। हाउसिंग लोन पर ब्याज भुगतान पर छूट 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई। धारा 80 सी डिडक्शन लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि देश में कर वसूली में अच्छी बढ़ोतरी हुई है जिससे यह संभव हुआ है।
  • पिछले कुछ वर्षों से ज्यादा उपज और कई बार दुर्भिक्ष के कारण किसान तकलीफ उठा रहे हैं। उन्हें सहायता देने के लिए किसान सम्मान निधि की व्यवस्था की गई है। इसके तहत दो हेक्टेयर जमीन रखने वाले किसानों को हर साल 6,000 रुपये (यानी 3,000 रुपये प्रति हेक्टेयर) तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह राशि सीधे उनके खाते में जाएगी। यह बहुत बड़ा कदम है और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि उसने पिछले चुनाव में कर्ज माफी का रास्ता चुना था, अब इस सरकार ने बेहतर कदम उठाते हुए एक स्थायी व्यवस्था कर दी है। प्राकृतिक आपदा से जूझते हुए किसानों को कर्ज के ब्याज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। सरकार का अनुमान है कि इससे कुल 12 करोड़ किसान लाभन्वित होंगे।
  • इस देश में वरिष्ठ नागरिकों की बहुत बड़ी संख्या है। इनमें से ज्यादातर ऐसे लोग हैं जिन्हें कोई पेंशन नहीं मिलती। उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए सरकार ने दो बड़ी घोषणाएं कीं। पहली तो यह कि मकान के किराये से होने वाली आय में 2.4 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। यह बहुत बड़ी राहत है। इसके अलावा बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले ब्याज में छूट की सीमा को बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया है।
  • सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्र में दस करोड़ लोगों के पेंशन की व्यवस्था कर दी है। इसके लिए श्रमिकों को सिर्फ 100 रुपये प्रति माह देना होगा। यह कदम असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बड़ा कदम है। इसी तरह ईपीएफओ में योगदान करने वालों की असामयिक मृत्यु हो जाने पर उनके परिवार को 6 लाख रुपये मिलेंगे। नौकरीपेशा वर्ग की ग्रेच्युटी सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हर कामगार के लिए 3,000 रुपये प्रति माह पेंशन सुनिश्चित की गयी है। इसमें सरकार और कर्मचारी समान रूप से योगदान करेंगे। प्रभावी रूप से यह भारत को एक बड़ा पेंशनधारक देश बनाने की ओर बड़ा कदम है ताकि सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
  • छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों को भी इस बजट में मदद देने की घोषणा की गई है। यह बहुत बड़ा वर्ग है जो इस समय सरकार से थोड़ा नाराज चल रहा है। इस वर्ग को ब्याज में 2 प्रतिशत की छूट मिलेगी। ऐसे कारोबारियों की तादाद लाखों में है। सरकार ने पिछले दिनों जीएसटी के दायरे में कटौती कर दी थी और इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपये सालाना कर दिया जिससे बड़ी तादाद में व्यापारी जीएसटी की सीमा से भी बाहर हो गए हैं। यह एक बड़ा कदम है जिससे व्यापारियों की नाराजगी दूर होगी। जीएसटी पर सरकार को कारोबारियों की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी क्योंकि यह एक ऐसा कदम था जिससे काला धन रखने वालों के लिए परेशानी खड़ी हो रही थी। इस तरह के कर के जाल में कोई नहीं फंसना चाहता था। लेकिन इस बार सरकार ने इसकी सीमा बढ़ाकर उनके गुस्से को शांत कर दिया। इतना ही नहीं, जीएसटी की दरें भी घटा दी गईं। इससे जनता को फायदा हुआ और कर की वसूली भी बढ़ी।
    भविष्य की कल्पना
    सरकार ने भविष्य का एक विजन तैयार किया है जिसमें 10 बिन्दु हैं। इनके तहत बेहतर सड़कों, रेल, हवाई अड्डों, शिक्षा के जरिये देश को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इसके अलावा डिजिटल भारत पर भी जोर दिया गया है। हेल्थकेयर पर भी सरकार का जोर है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए और 8 वर्षों में 10 खरब की। इससे भारत दुनिया की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा।

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