…मैं झूठ के सिवा कुछ नहीं बोलूंगा

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मोदी-अंबानी का देखो खेल, एचएएल से छीन लिया राफेल। धन्नासेठ की भक्ति, घटा दिया सेना की शक्ति। जिस अफसर ने चोरी से रोका, ठगों के सरदार ने उसको ठोका। पिट्ठुओं को शाबाशी, सेठों ने उड़ती चिडि़या फांसी। जन-जन में फैल रही सनसनी, मिलकर रोकेंगे लुटेरों की कंपनी।

 

ये तुकबंदियां कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी की हैं जिन्हें उन्होंने ट्वीट के जरिये व्यक्त किया था। लेकिन राफेल की हवा तो उच्चतम न्यायालय ने निकाल दी। अब ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी ज्यादा आवृत्ति के साथ नहीं लगाए जा रहे हैं। साथ ही राहुल गांंधी के कथित झूठ को आम लोगों के मानस पटल पर सच के रूप में स्थापित करने की योजना की भी हवा निकल चुकी है। लोग समझने लगे हैं कि राहुल गांधी के संवाद में तथ्य कम, राजनीति ज्यादा हैं। बीते जनवरी माह के दौरान राहुल गांधी रोग संतप्त गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से मिलने गए थे लेकिन वहां से अपने साथ राफेल पर एक और झूठ लेकर निकले। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुलाकात के दौरान पर्रिकर ने उन्हें बताया कि राफेल डील में बिना उनकी (पर्रिकर की) सहमति के ही बदलाव कर दिया गया। पर्रिकर डील के वक्त देश के रक्षामंत्री थे। पर्रिकर ने तत्काल राहुल की हवा निकालते हुए कहा कि राफेल मुद्दे पर राहुल से कोई बात ही नहीं हुई। फिर राहुल ने पैंतरा बदलते हुए कहा कि पर्रिकर की ओर से कही गई बात तो पहले से ही लोगों के सज्ञान में उपलब्ध है। यानी राहुल ने पर्रिकर से मुलाकात के माध्यम से राफेल को ताजा करने का प्रयास किया।

अर्बन नक्सल शीर्षक से लिखी गई किताब के लेखक व फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने राहुल की झूठ पर सटीक टिप्पणी की है। जब राहुल का शब्दाडंबर विफल हो जाता है तो वह अतिशयोक्ति पर उतर जाते हैं, जब उनका यह प्रयास भी असफल रहता है तो वह झूठ की बैसाखी पकड़ते हैं और जब वह इस पर भी नहीं चल पाते तो वह झूठी कहानी गढ़ते हैं और जब यह प्रयास भी अंजाम तक नहीं पहुंचता तो वह गुस्से में कहते हैं, ‘चौकीदार चोर’ है। अग्निहोत्री कहते हैं कि राहुल के शुभचिंतकों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि देश की जनता मूर्ख है। भाजपा ने एक ही झूठ को सौ बार बोलकर बहुमत बटोर लिया और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए। लेकिन राहुल गांधी को यह बात समझ में क्यों नहीं आती कि नरेन्द्र मोदी की साख अभी तक इसलिए बरकरार है कि उनके सगे संबंधियों को कम ही लोग जानते हैं। दूसरी तरफ राहुल के बहनोई राबर्ट वाड्रा को उनकी नकारात्मकता को लेकर सभी जानते हैं। वाड्रा से देश की केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय की टीम हाल ही में उनकी कथित लंदन स्थित संपत्ति के बारे में पूछताछ कर चुकी है। लोग शायद वाड्रा के उस संवाद को नहीं भूले होंगे जिसमें उन्होंने एक समाचार एजेंसी के संवाददाता से कहा था कि आर यू सीरियस, आर यू सीरियस (क्या आप गंभीर हैं)। हालांकि उस संवाददाता ने हरियाणा से जुड़े भूमि घोटाले में उनकी भूमिका के बारे में उनसे सवाल कर रहा था।

जब राहुल का शब्दाडंबर विफल हो जाता है तो वह अतिशयोक्ति पर उतर जाते हैं। जब उनका यह प्रयास भी असफल रहता है तो वह झूठ की बैसाखी पकड़ते हैं। जब वह इस पर भी नहीं चल पाते तो वह झूठी कहानी गढ़ते हैं और जब यह प्रयास भी अंजाम तक नहीं पहुंचता तो वह गुस्से में कहते हैं, ‘चौकीदार चोर’ है।

विवेक अग्निहोत्री (फिल्म निर्माता)

जानना जरूरी है कि भाजपा, मोदी, हिन्दुत्व, भारतीय संस्कृति, समाज आदि को नकारात्मक रूप में दर्शाने का काम तो नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही अनवरत शुरू कर दिया था। वह जर्मनी के हेमबर्ग स्थित समर स्कूल का थियेटर था। प्रश्न और उत्तर का सत्र चल रहा था। राहुल वहां भारतीयता पर लोगों के प्रश्न का जवाब दे रहे थे। इस दौरान राहुल शायद यह भूल गए कि उनकी मां देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की 19 सालों तक अध्यक्ष पद पर काबिज रहीं। राहुल ने तो वहां भारतीय पुरुष मानसिकता को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। शायद उन्हें यह भी याद नहीं रहा कि वह भी भारतीय पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के लिए भारतीय पुरुषों की वह मानसिकता जिम्मेदार है जिसके तहत वे महिलाओं को अपने बराबर नहीं समझते। लाजमी है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोनिया गांधी के लगभग दो दशकों तक देश की एक बड़ी राजनीतिक दल के अध्यक्ष पद पर काबिज होने का उदाहरण दे हुए राहुल की मानसिकता को पूरी तरह खारिज कर दिया।

जब मुस्लिम महिलाओं को ‘तीन तलाक’ से उबारने की बात की जाती है तो राहुल की पार्टी कांग्रेस इसके खिलाफ खड़ी हो जाती है। एक मुस्लिम नेता ने तो यहां तक कह दिया कि अगर उनकी पार्टी की सरकार आएगी तो वह ‘तीन तलाक’ मुस्लिम पुरुषों को आजादी दे देगी। ये भी अलग बात है कि राहुल गांधी अपने को जनेऊधारी ब्राह्मण कहते हैं लेकिन वह इस बात से अवगत नहीं हैं कि हिन्दू समाज, शक्ति मानकर महिलाओं की पूजा करता है। फिर बार-बार अपने को जनेऊधारी ब्राह्मण बताना राजनीति नहीं है तो क्या है? राहुल गांधी के इस दावे पर जनता दल (यू) के मीडिया सेल के प्रभारी सत्यप्रकाश मिश्र कहते हैं कि ब्राह्मण की परिभाषा उसे ब्रह्म ज्ञान के लिए प्रेरित करता है। हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि राहुल गांधी ब्रह्म को जानते हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।

वहीं, जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक के मुताबिक राहुल गांधी द्वारा बार-बार अपने को जनेऊधारी ब्राह्मण कहना एक नौटंकी है। आलोक तो यहां तक कह गए कि आजकल राहुल गांधी का मानसिक संतुलन ही बिगड़ गया है।
जर्मनी में राहुल गांधी यहीं नहीं रुके। उक्त जवाब-सवाल के सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि इराक व सीरिया में आतंकी संगठन आईएसआईएस का प्रादुर्भाव इसलिए संभव हो पाया कि वहां ज्यादातर लोगों को विकास की धारा से वंचित रखा गया। राहुल ने कहा कि भाजपा दलितों व अल्पसंख्यकों को विकास से वंचित रख रह रही है। स्पष्ट है कि राहुल के मुताबिक भारत में आईएसआईएस की मानसिकता को बल मिलने का कारण भाजपा व आरएसएस है। इस परिपेक्ष्य में आरएसएस संचालित बनवासी कल्याण आश्रम की चर्चा इसलिए जरूरी है कि यह संस्था देश स्तर पर जनजातियों के उद्धार के लिए काम करती है। राफेल पर राहुल की कथित गलतबयानी की तो बात ही कुछ और है। इस पर तो उन्होंने हर बार हर तरह की बात की। शायद इसके पीछे तो राहुल की ही पार्टी के नेता व पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की वह मानसिकता है जिसके तहत उन्होंने कहा था कि जनता की यादाश्त कमजोर होती है। यह बात उन्होंने निर्भया कांड पर टिप्पणी करते हुए कही थी।

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